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    धन्य वह भूमि जहां साक्षात शंकर के चरण पड़े

    आदि शंकराचार्य अवतरण दिवस – वैशाख शुक्लपंचमी जयराम शुक्ल अपने देश की सनातन संस्कृति के अविरल प्रवाह की प्रशस्ति के लिए सर्वप्रिय गीत.. सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा की एक पंक्ति है – कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा. यूनान, मिस्र, रोमा सभी मिट गए काल के प्रवाह के साथ और हमारी सनातन संस्कृति सृष्टि की रचना के समय से अब तक निरंतर चलती चली आ रही है.. क्यों…? कवि ...

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    सरसंघचालक परंपरा के आदर्श हैं डॉक्टर हेडगेवार

    - लोकेन्द्र सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष 2025 में शतायु हो जाएगा. अपनी सुदीर्घ यात्रा में संघ ने आदर्श, अनुशासन, सामाजिक एवं व्यक्ति निर्माण के कार्य में नित नए प्रतिमान स्थापित किए हैं. अपनी इस यात्रा में संघ कहीं ठहरा नहीं, निरंतर गतिमान रहा. समय के साथ कदमताल करता रहा. दशों दिशाओं में फैलकर संघ ने समाज जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है. जबकि उसके आगे-पीछे प्रारंभ हुए अन ...

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    राष्ट्राभिमुख समाज निर्माण में रत आध्यात्मिक कर्मयोगी : श्री गुरुजी

    नरेंद्र सहगल भारत के प्रत्येक जिले में प्रवास करते हुए श्री गुरुजी राष्ट्रीय महत्व की समस्याओं और मुद्दों पर लोगों एवं सरकार को सचेत करते हुए भविष्य में आने वाले संकटों की जानकारी तथा उनका समाधान बताते रहते थे. दिसंबर 1951 में वैश्य कॉलेज रोहतक (हरियाणा) के मैदान में स्वयंसेवकों तथा नागरिकों को संबोधित करते हुए श्री गुरुजी ने कहा था - “भारत ने चीन को तिब्बत की भूमि भेंट करके एक भयानक भूल कर डाली है. जो गलती ...

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    पुण्यतिथि – स्वतंत्रता के साधक बाबा गंगादास

    भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बाबा गंगादास का जन्म 14 फरवरी, 1823 (बसंत पंचमी) को गंगा के तट पर बसे प्राचीन तीर्थ गढ़मुक्तेश्वर (उ.प्र.) के पास रसूलपुर गांव में हुआ था. इनके पिता चौधरी सुखीराम एक बड़े जमींदार थे. बाबा गंगादास के बचपन का नाम गंगाबख्श था. बचपन में ही माता-पिता का देहांत होने के कारण संसार से मोह भंग हो गया. मात्र 11 वर्ष की आयु में इन्होंने घर छोड़ दिया. बाद में उदा ...

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    मैं एक इंच पीछे नहीं हटूंगा और तब तक लड़ता रहूंगा, जब तक कि मेरे पास आखिरी जवान और आखिरी गोली है – मेजर सोमनाथ शर्मा

    जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. इसमें महाराजा हरी सिंह का अतुलनीय योगदान है. उन्होंने अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर कर पाकिस्तान और अंग्रेजों के काले मंसूबों को फेल किया. दूसरी तरफ भारतीय सेना ने समय पर कश्मीर में पहुंच कर पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया था. ऐसी ही कहानी देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा की है. उन्होंने अपने सैनिकों के साथ मिलकर बड़गाम हवाई अड्डे को पाकिस्तानी सेना ...

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    प्रोफेसर राजेंद्र सिंह – राष्ट्र को समर्पित जीवन

    प्रो. राजेंद्र सिंह (29 जनवरी 1922 - 14 जुलाई 2003), उपाख्य रज्जू भैया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक थे. वह 1994 से 2000 तक सरसंघचालक रहे. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग में प्रोफेसर और विभाग प्रमुख के रूप में काम किया था. 1960 के दशक के मध्य में पद छोड़कर अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित कर दिया. व्यक्ति अपने कार्य और कार्यशीलता से व्यक्तित्व बन जाता है और प्रोफे ...

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    विनम्र श्रद्धांजलि – वनयोगी बालासाहब देशपाण्डे

    रमाकान्त केशव (बालासाहब) देशपांडे जी का जन्म अमरावती (महाराष्ट्र) में केशव देशपांडे जी के घर में 26 दिसम्बर, 1913 को हुआ था. अमरावती, अकोला, सागर, नरसिंहपुर तथा नागपुर में पढ़ाई पूरी करने के 1938 में वे राशन अधिकारी के पद नियुक्त हुए. उन्होंने एक बार एक व्यापारी को गड़बड़ करते हुए पकड़ लिया; पर बड़े अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण वह व्यापारी छूट गया. इससे बालासाहब का मन खिन्न हो गया और उन्होंने नौकरी छोड ...

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    विख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन

    श्रीनिवास रामानुजन गणित के क्षेत्र में ध्रुव तारे के समान आज भी चमक रहे हैं. 98 वर्षों के बाद भी उनके द्वारा 32 वर्ष 4 मास एवं 4 दिन के छोटे से जीवनकाल में गणित के क्षेत्र में जो कार्य किया गया, उसे सिद्ध करने के लिए दुनिया के गणित के विद्वान आज भी प्रयासरत हैं. रामानुजन ने 13 वर्ष की उम्र से ही अनुसंधान कार्य शुरु किया था एवं 15 वर्ष की उम्र में स्वयं किये हुए कार्य को नोटबुक में लिखने की शुरुआत की थी. उन् ...

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    मुगल सेना को हराने वाले वीर सेनानी लाचित बोड़फुकन को नमन

    जो देश अपने सपूतों को भूल जाता है, उस देश के आत्म सम्मान को हीनता की दीमक चट कर जाती है. आक्रांताओं से लोहा लेकर देश की अस्मिता की रक्षा करने वालों की वीरता को अगर विस्मृत कर दिया जाए तो फिर हम देशप्रेम पर लम्बे चौड़े व्याख्यान देने का नैतिक अधिकार खो देते हैं. अखंड भारत के स्वप्न को लेकर आगे बढ़ रही युवा पीढ़ी को हमारे नायकों की गाथा सुनाने से पहले इस तथ्य के कारणों को भी जानना होगा, जिनके चलते राष्ट्रीय स्तर ...

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    20 नवम्बर / जन्मदिवस – वैकल्पिक सरसंघचालक डॉ. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे

    नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था. शाखाओं की संख्या बहुत कम थी. डॉ. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये. अतः वे अपने मित्र तथा कर्मठ कार्यकर्ता डॉ. परांजपे को सरसंघचालक की जिम्मेदारी दे कर गये. डॉ. परांजपे ने इस दायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाया. उन्होंने इस दौर ...

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