You Are Here: Home » व्यक्तित्व (Page 3)

    मैं एक इंच पीछे नहीं हटूंगा और तब तक लड़ता रहूंगा, जब तक कि मेरे पास आखिरी जवान और आखिरी गोली है – मेजर सोमनाथ शर्मा

    जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. इसमें महाराजा हरी सिंह का अतुलनीय योगदान है. उन्होंने अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर कर पाकिस्तान और अंग्रेजों के काले मंसूबों को फेल किया. दूसरी तरफ भारतीय सेना ने समय पर कश्मीर में पहुंच कर पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया था. ऐसी ही कहानी देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा की है. उन्होंने अपने सैनिकों के साथ मिलकर बड़गाम हवाई अड्डे को पाकिस्तानी सेना ...

    Read more

    प्रोफेसर राजेंद्र सिंह – राष्ट्र को समर्पित जीवन

    प्रो. राजेंद्र सिंह (29 जनवरी 1922 - 14 जुलाई 2003), उपाख्य रज्जू भैया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक थे. वह 1994 से 2000 तक सरसंघचालक रहे. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग में प्रोफेसर और विभाग प्रमुख के रूप में काम किया था. 1960 के दशक के मध्य में पद छोड़कर अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित कर दिया. व्यक्ति अपने कार्य और कार्यशीलता से व्यक्तित्व बन जाता है और प्रोफे ...

    Read more

    विनम्र श्रद्धांजलि – वनयोगी बालासाहब देशपाण्डे

    रमाकान्त केशव (बालासाहब) देशपांडे जी का जन्म अमरावती (महाराष्ट्र) में केशव देशपांडे जी के घर में 26 दिसम्बर, 1913 को हुआ था. अमरावती, अकोला, सागर, नरसिंहपुर तथा नागपुर में पढ़ाई पूरी करने के 1938 में वे राशन अधिकारी के पद नियुक्त हुए. उन्होंने एक बार एक व्यापारी को गड़बड़ करते हुए पकड़ लिया; पर बड़े अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण वह व्यापारी छूट गया. इससे बालासाहब का मन खिन्न हो गया और उन्होंने नौकरी छोड ...

    Read more

    विख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन

    श्रीनिवास रामानुजन गणित के क्षेत्र में ध्रुव तारे के समान आज भी चमक रहे हैं. 98 वर्षों के बाद भी उनके द्वारा 32 वर्ष 4 मास एवं 4 दिन के छोटे से जीवनकाल में गणित के क्षेत्र में जो कार्य किया गया, उसे सिद्ध करने के लिए दुनिया के गणित के विद्वान आज भी प्रयासरत हैं. रामानुजन ने 13 वर्ष की उम्र से ही अनुसंधान कार्य शुरु किया था एवं 15 वर्ष की उम्र में स्वयं किये हुए कार्य को नोटबुक में लिखने की शुरुआत की थी. उन् ...

    Read more

    मुगल सेना को हराने वाले वीर सेनानी लाचित बोड़फुकन को नमन

    जो देश अपने सपूतों को भूल जाता है, उस देश के आत्म सम्मान को हीनता की दीमक चट कर जाती है. आक्रांताओं से लोहा लेकर देश की अस्मिता की रक्षा करने वालों की वीरता को अगर विस्मृत कर दिया जाए तो फिर हम देशप्रेम पर लम्बे चौड़े व्याख्यान देने का नैतिक अधिकार खो देते हैं. अखंड भारत के स्वप्न को लेकर आगे बढ़ रही युवा पीढ़ी को हमारे नायकों की गाथा सुनाने से पहले इस तथ्य के कारणों को भी जानना होगा, जिनके चलते राष्ट्रीय स्तर ...

    Read more

    20 नवम्बर / जन्मदिवस – वैकल्पिक सरसंघचालक डॉ. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे

    नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था. शाखाओं की संख्या बहुत कम थी. डॉ. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये. अतः वे अपने मित्र तथा कर्मठ कार्यकर्ता डॉ. परांजपे को सरसंघचालक की जिम्मेदारी दे कर गये. डॉ. परांजपे ने इस दायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाया. उन्होंने इस दौर ...

    Read more

    18 नवम्बर / जन्मदिवस – परोपकार की प्रतिमूर्ति स्वामी प्रेमानन्द

    नई दिल्ली. भारत में सन्यास की एक विशेष परम्परा है. हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और फिर सन्यास को आश्रम व्यवस्था कहा गया है, पर कई लोग पूर्व जन्म के संस्कार या वर्तमान जन्म में अध्यात्म और समाज सेवा के प्रति प्रेम होने के कारण ब्रह्मचर्य से सीधे सन्यास आश्रम में प्रविष्ट हो जाते हैं. आद्य शंकराचार्य ने समाज में हो रहे विघटन एवं देश-धर्म पर हो रहे आक्रमण से रक्षा हेतु दशनामी सन्यासियों की परम ...

    Read more

    17 नवम्बर / बलिदान दिवस – पंजाब केसरी लाला लाजपतराय

    ‘‘यदि तुमने सचमुच वीरता का बाना पहन लिया है, तो तुम्हें सब प्रकार की कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए. कायर मत बनो. मरते दम तक पौरुष का प्रमाण दो. क्या यह शर्म की बात नहीं कि कांग्रेस अपने 21 साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा राजनीतिक संन्यासी पैदा नहीं कर सकी, जो देश के उद्धार के लिए सिर और धड़ की बाजी लगा दे....’’ इन प्रेरणास्पद उद्गारों से 1905 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में लाला ...

    Read more

    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन्नायक श्री अशोक सिंहल जी की पुण्यतिथि पर नमन

    बीसवीं इक्कीसवीं सदी का संधि काल हिन्दू समाज के नवजागरण के काल खण्ड के रूप में इतिहास के पन्नों में अंकित होगा. यह वह कालखंड है, जब शताब्दियों से पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े जाने से उत्पन्न आत्मविस्मृति एवं आत्महीनता की भावना को तोड़कर हिन्दू समाज ने विश्वपटल पर हूंकार भरी थी. सोए हुए हिन्दू पौरुष को जगाने का आधार बना श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और इस आंदोलन के स्मरण के साथ ही इसके नायकों में जो नाम प्रमुखता ...

    Read more

    16 नवम्बर / जन्म दिवस – ब्रह्मदेश में संघ के प्रचारक रामप्रकाश धीर जी

    नई दिल्ली. ब्रह्मदेश (बर्मा या म्यांमार) भारत का ही प्राचीन भाग है. अंग्रेजों ने जब 1905 में बंग-भंग किया, तो षड्यंत्रपूर्वक इसे भी भारत से अलग कर दिया था. इसी ब्रह्मदेश के मोनीवा नगर में 16 नवम्बर, 1926 को रामप्रकाश धीर जी का जन्म हुआ था. बर्मी भाषा में उनका नाम ‘सयाजी यू सेन टिन’ कहा जाएगा. उनके पिता नंदलाल जी वहां के प्रसिद्ध व्यापारी एवं ठेकेदार थे. सन् 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब अंतरराष्ट्र ...

    Read more

    हमारे न्यूज़लेटर के लिए साइन अप करें

    VSK Bharat नवीनतम समाचार के बारे में सूचित करने के लिए अभी सदस्यता लें

    Scroll to top