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    स्वामी विवेकानंद

    भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत महापुरुषों में स्वामी विवेकानंद का अन्यतम स्थान है. उनका जन्म 12 जनवरी सन 1863 में कोलकाता में एक सम्मानित परिवार में हुआ था . इनकी माता आध्यात्मिकता में पूर्ण विशवास करती थीं, परन्तु इनके पिता स्वतंत्र विचार के गौरवपूर्ण व्यक्ति थे. इनका पहला नाम नरेन्द्र नाथ था, शारीरिक दृष्टि से नरेन्द्र नाथ हृष्ट-पुष्ट और शौर्यवान थे.  उनका शारीरिक गठन और प्रभावशाली मुखाकृति प्रत्येक को अपनी ...

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    1 जुलाई/जन्म-दिवस- श्रमिक हित को समर्पित : राजेश्वर दयाल जी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह महिमा है कि उसके कार्यकर्त्ता को जिस काम में लगाया जाता है, वह उसमें ही विशेषज्ञता प्राप्त कर लेता है. श्री राजेश्वर जी ऐसे ही एक प्रचारक थे, जिन्हें भारतीय मजदूर संघ के काम में लगाया गया, तो उसी में रम गये. कार्यकर्त्ताओं में वे ‘दाऊ जी’ के नाम से प्रसिद्ध थे. राजेश्वर जी का जन्म एक जुलाई, 1933 को ताजगंज (आगरा) में पण्डित नत्थीलाल शर्मा तथा श्रीमती चमेली देवी के घर में हुआ था. ...

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    28 जून / जन्म-दिवस; अनुपम दानी: भामाशाह

    दान की चर्चा होते ही भामाशाह का नाम स्वयं ही मुँह पर आ जाता है. देश रक्षा के लिये महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सारी की सारी जमा पूँजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1547 को हुआ था. उनके पिता श्री भारमल्ल तथा माता श्रीमती कर्पूरदेवी थीं. श्री भारमल्ल राणा साँगा के समय रणथम्भौर के किलेदार थे. अपने पिता की तरह भामाशाह भी राणा परिवार के लिये समर्पित थे. एक समय ऐसा आया जब ...

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    27 जून / पुण्य-तिथि; कर्तव्य कठोर : दादाराव परमार्थ

    बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डा. हेडगेवार किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डा. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे c, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुये. दादाराव का जन्म नागपुर के इतवारी म ...

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    26 जून / जन्म-दिवस; वन्देमातरम् के गायक : बंकिमचन्द्र चटर्जी

      भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में वन्देमातरम् नामक जिस महामन्त्र ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जन-जन को उद्वेलित किया, उसके रचियता बंकिमचन्द्र चटर्जी का जन्म ग्राम काँतलपाड़ा, जिला हुगली,पश्चिम बंगाल में 26 जून, 1838 को हुआ था. प्राथमिक शिक्षा हुगली में पूर्ण कर उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कालिज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. पढ़ाई के साथ-साथ छात्र जीवन से ही उनकी रुचि साहित्य के ...

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    22 जून / बलिदान-दिवस नगर सेठ अमरचन्द बांठिया

    स्वाधीनता समर के अमर सेनानी सेठ अमरचन्द मूलतः बीकानेर (राजस्थान) के निवासी थे. वे अपने पिता श्री अबीर चन्द बाँठिया के साथ व्यापार के लिये ग्वालियर आकर बस गये थे. जैन मत के अनुयायी अमरचन्द जी ने अपने व्यापार में परिश्रम, ईमानदारी एवं सज्जनता के कारण इतनी प्रतिष्ठा पायी कि ग्वालियर राजघराने ने उन्हें नगर सेठ की उपाधि देकर राजघराने के सदस्यों की भाँति पैर में सोने के कड़े पहनने का अधिकार दिया. आगे चलकर उन्हें ...

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    पुण्य तिथि 21जून, डॉ हेडगेवार – संघ संस्थापक का विलक्षण व्यक्तित्व

    संघ का विकास कर हिन्दू राष्ट्र को अपने बल और वैभव के साथ पुनः एक बार विश्व में शीर्षस्थान प्राप्त कराने की महत्त्वाकांक्षा से ही डॉक्टर हेडगेवारजी ने भगवान् की दी हुई सम्पूर्ण शक्तियों को बटोरकर अपने जीवन की रचना और सब प्रयत्न किये थे. उस कार्य के हेतु वे बीच-बीच में बाहर दौरे पर जाते थे पर प्रत्येक प्रवास के पश्चात् कुछ दिन संघ के केन्द्र नागपुर में अवश्य रहते. उनके दिन-प्रतिदिन के व्यवहार में किसी ने काकद ...

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    20 जून/बलिदान-दिवस – राजा दाहरसेन का बलिदान

    भारत को लूटने और इस पर कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध की वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था. इसी सिन्ध के राजा थे दाहरसेन, जिन्होंने युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी. उनके बाद उनकी पत्नी, बहिन और दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक नयी परम्परा का सूत्रपात किया. सिन्ध के महाराजा चच के असमय देहांत के बाद उनके 12 वर्षीय पुत्र दाहरसेन गद्द ...

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    19 जून / जन्म-दिवस: आत्मविलोपी व्यक्तित्व : श्रीपति शास्त्री

    संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, इतिहास के प्राध्यापक तथा राजनीति, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषयों के गहन अध्येता श्रीपति सुब्रमण्यम शास्त्री का जन्म 19 जून, 1935 को कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग जिले के हरिहर ग्राम में हुआ था. बालपन में ही वे स्वयंसेवक बने तथा अपने संकल्प के अनुसार अविवाहित रहकर अंतिम सांस तक संघ कार्य करते रहे. 1956 में वे मैसूर नगर कार्यवाह बने. उस दौरान उन्होंने मैसूर वि.वि. से इतिहास में स्वर्ण ...

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    17 जून / बलिदान-दिवस: रानी लक्ष्मीबाई

    भारत में अंग्रेजी सत्ता के आने के साथ ही गाँव-गाँव में उनके विरुद्ध विद्रोह होने लगा; पर व्यक्तिगत या बहुत छोटे स्तर पर होने के कारण इन संघर्षों को सफलता नहीं मिली. अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित संग्राम 1857 में हुआ. इसमें जिन वीरों ने अपने साहस से अंग्रेजी सेनानायकों के दाँत खट्टे किये, उनमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम प्रमुख है. 19 नवम्बर, 1835 को वाराणसी में जन्मी लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मनु था ...

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