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    08 सितम्बर / जन्मदिवस – उदासीन सम्प्रदाय के प्रवर्तक : बाबा श्रीचंद

    नई दिल्ली. हिन्दू धर्म एक खुला धर्म है. इसमें हजारों मत, पंथ और सम्प्रदाय हैं. इस कारण समय-समय पर अनेक नये पंथ और सम्प्रदायों का उदय हुआ है. ये सब मिलकर हिन्दू धर्म की बहुआयामी धारा को सबल बनाते हैं. उदासीन सम्प्रदाय भी ऐसा ही एक मत है. इसके प्रवर्तक बाबा श्रीचंद सिख पंथ के प्रवर्तक गुरु नानकदेव के बड़े पुत्र थे. उनका जन्म आठ सितम्बर, 1449 (भादों शुक्ल 9, वि.संवत् 1551) को सुल्तानपुर (पंजाब) में हुआ था. जन् ...

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    06 सितम्बर / जन्मदिवस – क्रांतिवीर दिनेश गुप्त जी

    नई दिल्ली. क्रांतिवीर दिनेश गुप्त जी का जन्म छह सितम्बर, 1911 को पूर्वी सिमलिया (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था. आगे चलकर वह भारत की स्वतंत्रता के समर में कूद गए. उनके साथियों में सुधीर गुप्त एवं विनय बोस प्रमुख थे. उन दिनों जेल में क्रांतिकारियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तोड़ने के लिये बहुत यातनाएं दी जाती थीं. कोलकाता जेल भी इसकी अपवाद नहीं थी. वहां का जेल महानिरीक्षक कर्नल एनएस सिम्पसन बहुत क्रूर व्य ...

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    05 सितम्बर / इतिहास स्मृति – पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपम बलिदान

    नई दिल्ली. प्रतिवर्ष पांच जून को हम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते हैं, लेकिन यह दिन हमारे मन में सच्ची प्रेरणा नहीं जगा पाता. क्योंकि इसके साथ इतिहास की कोई प्रेरक घटना नहीं जुड़ी है. इस दिन कुछ जुलूस, धरने, प्रदर्शन, भाषण तो होते हैं, पर उससे सामान्य लोगों के मन पर कोई असर नहीं होता. दूसरी ओर भारत के इतिहास में पांच सितम्बर, 1730 को एक ऐसी घटना घटी, जिसकी विश्व में कोई तुलना नहीं की जा सकती. राजस्थान तथा भार ...

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    04 सितम्बर / जन्मदिवस – ईसाई षड्यन्त्रों के अध्येता कृष्णराव सप्रे

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना से कई प्रचारक शाखा कार्य के अतिरिक्त समाज जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी काम करते हैं. ऐसा ही एक क्षेत्र वनवासी क्षेत्र भी है. ईसाई मिशनरियां उन्हें आदिवासी कहकर शेष हिन्दू समाज से अलग कर देती हैं. उनके षड्यन्त्रों से कई क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलन भी खड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल को एक बार भ्रमण के दौरान जब वनवासी ईसाइयों ने काले झंडे द ...

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    03 सितम्बर / जन्म दिवस – दक्षिण के सेनापति यादवराव जोशी

    नई दिल्ली. दक्षिण भारत में संघ कार्य का विस्तार करने वाले यादव कृष्ण जोशी जी का जन्म अनंत चतुर्दशी (3 सितम्बर, 1914) को नागपुर के एक वेदपाठी परिवार में हुआ था. वे अपने माता-पिता के एकमात्र पुत्र थे. उनके पिता कृष्ण गोविन्द जोशी जी एक साधारण पुजारी थे. अतः यादवराव जी को बालपन से ही संघर्ष एवं अभावों भरा जीवन बिताने की आदत हो गयी. यादवराव जी का डॉ. हेडगेवार जी से बहुत निकट सम्बन्ध था. वे डॉ. जी के घर पर ही रह ...

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    02 सितम्बर / बलिदान दिवस – अनाथ बन्धु एवं मृगेन्द्र दत्त का बलिदान

    नई दिल्ली. अंग्रेजों के जाने के बाद भारत की स्वतन्त्रता का श्रेय भले ही कुछ नेता स्वयं लेते हों, पर वस्तुतः इसका श्रेय उन क्रान्तिकारी युवकों को है, जो अपनी जान हथेली पर लेकर घूमते थे. बंगाल ऐसे युवाओं का गढ़ था. ऐसे ही दो मित्र थे अनाथ बन्धु तथा मृगेन्द्र कुमार दत्त, जिनके बलिदान से शासकों को अपना निर्णय बदलने को विवश होना पड़ा. उन दिनों बंगाल के मिदनापुर जिले में क्रान्तिकारी गतिविधियां जोरों पर थीं. इससे ...

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    01 सितम्बर / जन्मदिवस – सबके हितचिंतक केशवराव गोरे

    नई दिल्ली. माता-पिता प्रायः अपने बच्चों के काम, मकान, दुकान, विवाह आदि की चिन्ता करते ही हैं. पर, 1 सितम्बर, 1915 को गोंदिया (महाराष्ट्र) में जन्मे केशव नरहरि गोरे ने प्रचारक बनने से पूर्व पिताजी के लिए मकान बनवाकर एक बहिन का विवाह भी किया. ये लोग मूलतः वाई (महाराष्ट्र) के निवासी थे. केशवराव के पिता नरहरि वामन गोरे तथा माता यशोदा गोरे थीं. रेलवे में तार बाबू होने के कारण नरहरि जी का स्थानान्तरण होता रहता था ...

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    31 अगस्त / प्रेरक प्रसंग – देशद्रोही का वध

    नई दिल्ली. स्वाधीनता प्राप्ति के प्रयत्न में लगे क्रांतिकारियों को जहां एक ओर अंग्रेजों से लड़ना पड़ता था, वहां कभी-कभी उन्हें देशद्रोही भारतीय, यहां तक कि अपने गद्दार साथियों को भी दंड देना पड़ता था. बंगाल के प्रसिद्ध अलीपुर बम कांड में कन्हाईलाल दत्त, सत्येन्द्रनाथ बोस तथा नरेन्द्र गोस्वामी गिरफ्तार हुए थे. अन्य भी कई लोग इस कांड में शामिल थे, जो फरार हो गये. पुलिस ने इन तीन में से एक नरेन्द्र को मुखबिर ब ...

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    30 अगस्त / पुण्यतिथि – तरुण तपस्वी, रामानुज दयाल

    नई दिल्ली. उ.प्र. में गाजियाबाद के पास पिलखुआ नगर वस्त्र-निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. यहीं के एक प्रतिष्ठित व्यापारी व निष्ठावान स्वयंसेवक श्री रामगोपाल तथा कौशल्या देवी के घर में 1943 में जन्मे रामानुज दयाल ने अपना जीवन संघ को अर्पित किया; पर काल ने अल्पायु में ही उन्हें उठा लिया. सन् 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा, तो पिलखुआ के पहले सत्याग्रही दल का नेतृत्व रामगोपाल जी ने किया. रामानुज पर इसका इतना प्रभाव पड ...

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    29 अगस्त / जन्मदिवस – उनकी हॉकी से गेंद मानो चिपक जाती थी – ऐसे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द

    नई दिल्ली. भारतीय हॉकी का पूरे विश्व में दबदबा था और उसका श्रेय मेजर ध्यानचन्द को जाता है. मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयाग, उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, 1905 को हुआ था. उनके पिता सेना में सूबेदार थे. उन्होंने 16 साल की अवस्था में ध्यानचन्द को भी सेना में भर्ती करा दिया. वहां वे कुश्ती में बहुत रुचि लेते थे, पर सूबेदार मेजर बाले तिवारी ने उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद तो ध्यानचंद और हॉकी एक दूसर ...

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