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    12 सितम्बर / पुण्य तिथि – तमिल काव्य में राष्ट्रवादी स्वर : सुब्रह्मण्य भारती

    नई दिल्ली. भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम से देश का हर क्षेत्र और हर वर्ग अनुप्राणित था. ऐसे में कवि भला कैसे पीछे रह सकते थे. तमिलनाडु में इसका नेतृत्व कर रहे थे सुब्रह्मण्य भारती. यद्यपि उन्हें अनेक संकटों का सामना करना पड़ा, पर उनका स्वर मन्द नहीं हुआ. सुब्रह्मण्य भारती का जन्म एट्टयपुरम् (तमिलनाडु) में 11 दिसम्बर, 1882 को हुआ था. पाँच वर्ष की अवस्था में ही वे मातृविहीन हो गये. इस दुःख को भारती ने अपने काव्य ...

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    11 सितम्बर / जन्मदिवस – भूदान यज्ञ के प्रणेता : विनोबा भावे

    नई दिल्ली. स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद निर्धन भूमिहीनों को भूमि दिलाने के लिये हुए ‘भूदान यज्ञ’ के प्रणेता विनायक नरहरि (विनोबा) भावे का जन्म 11 सितम्बर, 1895 को महाराष्ट्र के कोलाबा जिले के गागोदा ग्राम में हुआ था. इनके पिता नरहरि पन्त जी तथा माता रघुमाई जी थीं. विनायक बहुत ही विलक्षण बालक था. वह एक बार जो पढ़ लेता, उसे सदा के लिये कण्ठस्थ हो जाता. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा बड़ौदा में हुई. वहाँ के पुस्तकालय म ...

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    10 सितम्बर / पुण्य तिथि – प्रेमावतार नीम करौली बाबा

    नई दिल्ली. बात बहुत पुरानी है. अपनी मस्ती में एक युवा योगी लक्ष्मण दास हाथ में चिमटा और कमण्डल लिये फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश) से टूण्डला जा रही रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चढ़ गया. गाड़ी कुछ दूर ही चली थी कि एक एंग्लो इण्डियन टिकट निरीक्षक वहाँ आया. उसने बहुत कम कपड़े पहने, अस्त-व्यस्त बाल वाले बिना टिकट योगी को देखा, तो क्रोधित होकर अंट-शंट बकने लगा. योगी अपनी मस्ती में चूर था. अतः वह चुप रहा. कुछ दे ...

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    09 सितम्बर / जन्मदिवस- भारती पत्रिका के संस्थापक – दादा भाई

    नई दिल्ली. आज सब ओर अंग्रेजीकरण का वातावरण है. संस्कृत को मृत भाषा माना जाता है. ऐसे में गिरिराज शास्त्री जी (दादा भाई) ने संस्कृत की मासिक पत्रिका ‘भारती’ का कुशल संचालन कर लोगों को एक नयी राह दिखाई है. दादा भाई का जन्म नौ सितम्बर, 1919 (अनंत चतुर्दशी) को राजस्थान के भरतपुर जिले के कामां नगर में आचार्य आनंदीलाल जी और चंद्राबाई जी के घर में हुआ था. इनके पूर्वज राजवैद्य थे. कक्षा छह के बाद दादा भाई ने संस्कृ ...

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    08 सितम्बर / जन्मदिवस – उदासीन सम्प्रदाय के प्रवर्तक : बाबा श्रीचंद

    नई दिल्ली. हिन्दू धर्म एक खुला धर्म है. इसमें हजारों मत, पंथ और सम्प्रदाय हैं. इस कारण समय-समय पर अनेक नये पंथ और सम्प्रदायों का उदय हुआ है. ये सब मिलकर हिन्दू धर्म की बहुआयामी धारा को सबल बनाते हैं. उदासीन सम्प्रदाय भी ऐसा ही एक मत है. इसके प्रवर्तक बाबा श्रीचंद सिख पंथ के प्रवर्तक गुरु नानकदेव के बड़े पुत्र थे. उनका जन्म आठ सितम्बर, 1449 (भादों शुक्ल 9, वि.संवत् 1551) को सुल्तानपुर (पंजाब) में हुआ था. जन् ...

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    06 सितम्बर / जन्मदिवस – क्रांतिवीर दिनेश गुप्त जी

    नई दिल्ली. क्रांतिवीर दिनेश गुप्त जी का जन्म छह सितम्बर, 1911 को पूर्वी सिमलिया (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था. आगे चलकर वह भारत की स्वतंत्रता के समर में कूद गए. उनके साथियों में सुधीर गुप्त एवं विनय बोस प्रमुख थे. उन दिनों जेल में क्रांतिकारियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तोड़ने के लिये बहुत यातनाएं दी जाती थीं. कोलकाता जेल भी इसकी अपवाद नहीं थी. वहां का जेल महानिरीक्षक कर्नल एनएस सिम्पसन बहुत क्रूर व्य ...

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    05 सितम्बर / इतिहास स्मृति – पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपम बलिदान

    नई दिल्ली. प्रतिवर्ष पांच जून को हम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते हैं, लेकिन यह दिन हमारे मन में सच्ची प्रेरणा नहीं जगा पाता. क्योंकि इसके साथ इतिहास की कोई प्रेरक घटना नहीं जुड़ी है. इस दिन कुछ जुलूस, धरने, प्रदर्शन, भाषण तो होते हैं, पर उससे सामान्य लोगों के मन पर कोई असर नहीं होता. दूसरी ओर भारत के इतिहास में पांच सितम्बर, 1730 को एक ऐसी घटना घटी, जिसकी विश्व में कोई तुलना नहीं की जा सकती. राजस्थान तथा भार ...

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    04 सितम्बर / जन्मदिवस – ईसाई षड्यन्त्रों के अध्येता कृष्णराव सप्रे

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना से कई प्रचारक शाखा कार्य के अतिरिक्त समाज जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी काम करते हैं. ऐसा ही एक क्षेत्र वनवासी क्षेत्र भी है. ईसाई मिशनरियां उन्हें आदिवासी कहकर शेष हिन्दू समाज से अलग कर देती हैं. उनके षड्यन्त्रों से कई क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलन भी खड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल को एक बार भ्रमण के दौरान जब वनवासी ईसाइयों ने काले झंडे द ...

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    03 सितम्बर / जन्म दिवस – दक्षिण के सेनापति यादवराव जोशी

    नई दिल्ली. दक्षिण भारत में संघ कार्य का विस्तार करने वाले यादव कृष्ण जोशी जी का जन्म अनंत चतुर्दशी (3 सितम्बर, 1914) को नागपुर के एक वेदपाठी परिवार में हुआ था. वे अपने माता-पिता के एकमात्र पुत्र थे. उनके पिता कृष्ण गोविन्द जोशी जी एक साधारण पुजारी थे. अतः यादवराव जी को बालपन से ही संघर्ष एवं अभावों भरा जीवन बिताने की आदत हो गयी. यादवराव जी का डॉ. हेडगेवार जी से बहुत निकट सम्बन्ध था. वे डॉ. जी के घर पर ही रह ...

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    02 सितम्बर / बलिदान दिवस – अनाथ बन्धु एवं मृगेन्द्र दत्त का बलिदान

    नई दिल्ली. अंग्रेजों के जाने के बाद भारत की स्वतन्त्रता का श्रेय भले ही कुछ नेता स्वयं लेते हों, पर वस्तुतः इसका श्रेय उन क्रान्तिकारी युवकों को है, जो अपनी जान हथेली पर लेकर घूमते थे. बंगाल ऐसे युवाओं का गढ़ था. ऐसे ही दो मित्र थे अनाथ बन्धु तथा मृगेन्द्र कुमार दत्त, जिनके बलिदान से शासकों को अपना निर्णय बदलने को विवश होना पड़ा. उन दिनों बंगाल के मिदनापुर जिले में क्रान्तिकारी गतिविधियां जोरों पर थीं. इससे ...

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