You Are Here: Home » व्यक्तित्व (Page 9)

    20 अगस्त / पुण्यतिथि – इतिहासकार गंगाराम सम्राट

    श्री गंगाराम सम्राट का जन्म 1918 ई. में सिन्धु नदी के तट पर स्थित सन गाँव में हुआ था. उनके गाँव में शिक्षा की अच्छी व्यवस्था थी. पढ़ाई पूरी कर वे उसी विद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाने लगे. इसी समय उनका सम्पर्क आर्य समाज से हुआ. आर्य संन्यासियों की अनेक पुस्तकों का अंग्रेजी में अनुवाद कर उन्होंने साहित्य की दुनिया में प्रवेश किया. इसके बाद नौकरी छोड़कर वे सिन्धी समाचार पत्र ‘संसार समाचार’ से जुड़ गये और अनेक वर्ष ...

    Read more

    19 अगस्त / बलिदान दिवस – देवनागरी के नवदेवता बिनेश्वर ब्रह्म

    पूर्वोत्तर भारत में चर्च के षड्यन्त्रों के अनेक रूप हैं. वे हिन्दू धर्म ही नहीं, तो हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि के भी विरोधी हैं. ‘बोडो साहित्य सभा’ के अध्यक्ष श्री बिनेश्वर ब्रह्म भी उनके इसी षड्यन्त्र के शिकार बने, चूंकि वे बोडो भाषा के लिये रोमन लिपि की बजाय देवनागरी लिपि के प्रबल समर्थक थे. श्री बिनरेश्वर ब्रह्म का जन्म 28 फरवरी, 1948 को असम में कोकराझार के पास भरतमुरी ग्राम में श्री तारामुनी एवं श्रीम ...

    Read more

    18 अगस्त / जन्म दिवस – अपराजेय नायक पेशवा बाजीराव

    नई दिल्ली. छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने भुजबल से एक विशाल भूभाग मुगलों से मुक्त करा लिया था. उनके बाद इस ‘स्वराज्य’ को संभाले रखने में जिस वीर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण योगदान रहा, उनका नाम था बाजीराव पेशवा. बाजीराव का जन्म 18 अगस्त, 1700 को अपने ननिहाल ग्राम डुबेर में हुआ था. उनके दादा विश्वनाथ भट्ट जी ने शिवाजी महाराज के साथ युद्धों में भाग लिया था. उनके पिता बालाजी विश्वनाथ छत्रपति साहू जी महाराज के महाम ...

    Read more

    17 अगस्त/ पुण्यतिथि – पहाड़ का सीना चीरने वाले दशरथ मांझी

    नई दिल्ली. स्वर्ग से धरती पर गंगा लाने वाले तपस्वी राजा भगीरथ को कौन नहीं जानता. उनके प्रयासों के कारण ही भारत के लोग लाखों साल से मां गंगा में स्नान, पूजन और आचमन से पवित्र हो रहे हैं. आज भी यदि कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से लगातार किसी सद् संकल्प को लेकर काम करता रहे, तो उसे भगीरथ ही कहते हैं. ऐसे ही एक आधुनिक भगीरथ थे, दशरथ मांझी. जिन्होंने संकल्प शक्ति से पहाड़ का सीना चीर डाला. दशरथ मांझी का जन्म कब हुआ ...

    Read more

    16 अगस्त / बलिदान दिवस – सर्वस्व बलिदानी दम्पत्ति – फुलेना बाबू व तारा रानी

    नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम में देश के हर भाग से लोगों ने प्राणाहुति दी. सिवान, बिहार के फुलेना बाबू तथा उनकी पत्नी तारा रानी ने इस यज्ञ में अपना पूरा परिवार अर्पण कर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कराया है. अगस्त 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के लिए गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था. फुलेना बाबू और उनकी पत्नी तारा रानी दोनों आंदोलन में कूद पड़े. तारा रानी को राष्ट्रीयता के संस्कार विरासत में मिले ...

    Read more

    15 अगस्त / जन्म दिवस – स्वतन्त्रता के उद्घोषक श्री अरविन्द

    नई दिल्ली. भारतीय स्वाधीनता संग्राम में श्री अरविन्द का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनका बचपन घोर विदेशी और विधर्मी वातावरण में बीता, पर पूर्वजन्म के संस्कारों के बल पर वे महान आध्यात्मिक पुरुष कहलाये. उनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को डॉ. कृष्णधन घोष के घर में हुआ था. उन दिनों बंगाल का बुद्धिजीवी और सम्पन्न वर्ग ईसाइयत से अत्यधिक प्रभावित था. वे मानते थे कि हिन्दू धर्म पिछड़ेपन का प्रतीक है. भारतीय परम्पराएं अन्धवि ...

    Read more

    14 अगस्त / बलिदान दिवस – देश पर बलिदान होने की खुशी में 4.5 किग्रा बढ़ गया वजन

    नई दिल्ली. अपनी मृत्यु की बात सुनते ही अच्छे से अच्छे व्यक्ति का दिल बैठ जाता है. उसे कुछ खाना-पीना अच्छा नहीं लगता, पर भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में ऐसे क्रान्तिकारी भी हुए हैं, जिनकी फांसी की तिथि निश्चित होते ही प्रसन्नता में वजन बढ़ना शुरू हो गया. ऐसे ही एक वीर थे सरदार बन्ता सिंह. बन्ता सिंह का जन्म वर्ष 1890 में ग्राम सागवाल (जालन्धर, पंजाब) में हुआ था. वर्ष 1904-05 में कांगड़ा में भूकम्प के समय अपने म ...

    Read more

    13 अगस्त / जन्मदिवस – मारवाड़ का रक्षक वीर दुर्गादास राठौड़

    नई दिल्ली. अपनी जन्मभूमि मारवाड़ को मुगलों के आधिपत्य से मुक्त कराने वाले वीर दुर्गादास राठौड़ का जन्म 13 अगस्त, 1638 को ग्राम सालवा में हुआ था. उनके पिता जोधपुर राज्य के दीवान आसकरण तथा माता नेतकंवर थीं. आसकरण की अन्य पत्नियां नेतकंवर से जलती थीं. अतः मजबूर होकर आसकरण ने उसे सालवा के पास लूणवा गांव में रखवा दिया. छत्रपति शिवाजी की तरह दुर्गादास का लालन-पालन उनकी माता ने ही किया. उन्होंने दुर्गादास को वीरता क ...

    Read more

    12 अगस्त / जन्म दिवस – महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई

    नई दिल्ली. जिस समय देश अंग्रेजों के चंगुल से स्वतन्त्र हुआ, तब भारत में विज्ञान सम्बन्धी शोध प्रायः नहीं होते थे. गुलामी के कारण लोगों के मानस में यह धारणा बनी हुई थी कि भारतीय लोग प्रतिभाशाली नहीं है. शोध करना या नयी खोज करना इंग्लैण्ड, अमरीका, रूस, जर्मनी, फ्रान्स आदि देशों का काम है. इसलिए मेधावी होने पर भी भारतीय वैज्ञानिक कुछ विशेष नहीं कर पा रहे थे. पर, स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश का वातावरण बदला. ...

    Read more

    11 अगस्त / बलिदान दिवस – अमर बलिदानी खुदीराम बोस

    नई दिल्ली. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में अनेक कम आयु के वीरों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी. उनमें खुदीराम बोस का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता है. अनेक अंग्रेज अधिकारी भारतीयों से बहुत दुर्व्यवहार करते थे. ऐसा ही एक मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड उन दिनों मुज्जफरपुर, बिहार में तैनात था. वह छोटी-छोटी बात पर भारतीयों को कड़ी सजा देता था. अतः क्रान्तिकारियों ने उससे बदला लेने का निश्चय किया. कोलकाता में ...

    Read more

    हमारे न्यूज़लेटर के लिए साइन अप करें

    VSK Bharat नवीनतम समाचार के बारे में सूचित करने के लिए अभी सदस्यता लें

    Scroll to top