करंट टॉपिक्स

झाबुओ जाग गयो है…..

अहा! कितना सुखद है ये! ये झाबुआ की हाथीपावा की पहाड़ी का चित्र है, आज एक समाचार पत्र में छपा है. ये झाबुआ के सामान्य...

राष्ट्रचिंतन लेखमाला – भारत में ‘भारतीय’ बन कर रहें

नरेंद्र सहगल ‘भारतीय होने का सीधा और स्पष्ट मापदंड है, भारत के अखंड भूगोल, सनातन संस्कृति और गौरवशाली अतीत के प्रति आस्था/विश्वास और इसी के...

‘अलग-थलग’ और ‘मित्रविहीन’ भारत चाहता है चीन

क्या चीनी आक्रामकता का कारण केवल उसका व्यापारिक लाभ है? यह उग्रता कोई एकाएक पैदा नहीं हुई. इस चिंतन की जड़ें चीन के सभ्यतागत लोकाचार...

कुंभ की आवश्यकता – समाज संगठन व समाज जागरण के लिए कुंभ

बंजारा और लबाना नायकड़ा समुदाय का कुंभ जलगांव जिले के गोद्री में हो रहा है. इससे पहले 2006 में गुजरात में शबरी कुंभ और 2020...

सबके भाऊ….. राजाभाऊ

नर्मदा साहित्य मंथन के प्रथम दिवस "एक भूला सा सेनानी" शीर्षक से नाट्य मंचन हुआ था, नाट्य मंचन सतीश दवे जी की मंडली ने किया...

28, 29 जनवरी 1528 – स्वत्व और स्वाभिमान रक्षा केलिए 1500 क्षत्राणियों का जौहर

भारतीय इतिहास के असंख्य पन्ने बलिदानी परंपरा से भरे पड़े हैं. घटनाओं का ऐसा विवरण है जो रोंगटे खड़े कर देता है. आक्रांताओं के अहंकार...

राष्ट्रचिंतन लेखमाला – परम वैभवशाली अखंड भारतवर्ष

नरेंद्र सहगल देशवासियों ने प्रसन्नता और उल्लास के साथ अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाया है. यह हमारी राष्ट्रभक्ति का स्वाभाविक परिचय है. परंतु यह खंडित...

कैसा बसन्त? जब सरस्वती लन्दन में कैद हो..!

बसन्त दहलीज पर है. बसन्त पंचमी के दिन देशभर में छोटे–बड़े हजारों उत्सव होते हैं. वर्ष भर उत्सवों को उत्सव कलाकार अपनी कला से बनाते...

गणतंत्र दिवस – आत्मचिंतन करने का समय

बलबीर पुंज आज भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. सभी पाठकों को इसकी असीम शुभकामनाएं. यह अवसर जहां जश्न मनाने का है, तो...

31 अगस्त, 1952 बंजारा समाज की स्वतंत्रता की शुभ तिथि

सृष्टि में मानव जन्म के साथ ही अपने घर की कल्पना विकसित हो गई होगी. बाद में मनुष्य की चेतना में अपना घर, मोहल्ला, नगर...