करंट टॉपिक्स

राष्ट्र ध्वज की निर्माण कथा – भाग एक

ध्वज समिति के अनुशंसा, भगवा रंग का हो राष्ट्र ध्वज लोकेन्द्र सिंह ध्वज किसी भी राष्ट्र के चिंतन और ध्येय का प्रतीक तथा स्फूर्ति का...

विभाजन की चुभन / ३

... और कांग्रेस ने विभाजन स्वीकारा ! प्रशांत पोळ अपने देश में चालीस का दशक अत्यंत उथल-पुथल वाला रहा. दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था....

विभाजनकालीन भारत के साक्षी

वासुदेव प्रजापति “विभाजनकालीन भारत के साक्षी”, भारत विभाजन के विषय पर वैसे तो अनेक पुस्तकें लिखी गईं हैं, किन्तु यह पुस्तक उनसे भिन्न है और...

अमृत महोत्सव –  रावलापानी संघर्ष : स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति समाज का योगदान

रावलापानी संघर्ष दिवस. यह दिवस रावलापानी बलिदान दिवस के नाम से भी जाना जाता है. खान्देश के नंदुरबार जिले में तलोदा तहसील के 'रावलापानी' में...

स्वर्णिम अतीत, लक्ष्य सिद्ध करने वाला वर्तमान व समुज्जवल भविष्य

वर्तमान केन्द्र सरकार सांस्कृतिक विरासत के भू-क्षेत्रीय इतिहास के चरणबद्ध अध्ययन और उसके पुनरूत्थान और संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है, क्योंकि किसी देश...

विभाजन की चुभन / २

‘डायरेक्ट एक्शन’ का डर...! प्रशांत पोळ हमारे देश में जब १८५७ का स्वातंत्र्य युद्ध समाप्त होने को था, उस समय अमरीका का दृश्य बड़ा भयानक...

जनजाति समाज में रक्षाबंधन मनाने की परंपरा

रक्षाबंधन का उत्सव देशभर में उत्साह से मनाया जाता है. सनातन संस्कृति में सबसे पवित्र संबंध भाई एवं बहन का होता है. इस पवित्र संबंध...

विभाजन की चुभन – १

  विभाजन टल सकता था..! प्रशांत पोळ ‘और १५ अगस्त १९४७ को हमारा देश बंट गया..!’ इस वाक्य के साथ कहानी का अंत नहीं हुआ....

इंडिजेनस डे – यूरोपियन्स के लिए पश्चाताप व क्षमा मांगने का दिन

प्रवीण गुगनानी मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे, भारत में एक नया षड्यंत्र है. सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजाति समाज...

जनजाति समाज – अंग्रेजों ने षड्यंत्रपूर्वक बार-बार बदला धर्म कोड, पर जीवन व पूजा पद्धति नहीं बदल सके

ईसाई मिशनरियां और कुछ ताकतें पिछले लगभग डेढ़ सदी से यह स्थापित करने में लगी हैं कि वनवासी हिन्दू नहीं हैं. हालाँकि, उनके नेरेटिव को...