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    समाज व देश विरोधियों का अड्डा बना टिकटॉक

    टिकटॉक – एंटरटेनमेंट के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता प्रखरादित्य द्विवेदी मेरी मजबूरी पर जरा गौर करिए, ऑनलाइन माध्यमों के अधिक प्रयोग से पड़ने वाले दुष्प्रभावों को मुझे मोबाइल पर ही लिखकर बताना पड़ रहा है. इससे एक कदम और आगे बढ़ेंगे तो पाएंगे कि इसे पढ़ने-देखने वाला भी ऑनलाइन होकर ही इसे देख-समझ सकता है. खैर, पिछले कुछ समय से कोरोना महामारी के कारण विश्व के अधिकांश देशों में कार्यस्थलों पर ताला लग चुका है. ...

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    कोरोना से लड़ाई में भारत के अहम हथियार – प्रभावी नेतृत्व और सहयोगी समाज

    सौरभ कुमार मुश्किल समय किसी की भी क्षमताओं की परीक्षा लेता है, कोरोना महामारी के इस दौर ने विश्व के सभी देशों की परीक्षा ली है. अमेरिका और यूरोप जैसे शक्तिसंपन्न, समृद्ध देश भी घुटने टेकते नजर आए. अस्पतालों में इतनी जगह नहीं बची कि मरीजों का इलाज किया जा सके, सालों के परिश्रम से खड़ा किया गया तानाबाना बिखरने लगा. अमेरिका में 96,000, यूके में 36000, इटली में 32000 और फ्रांस में लगभग 28000 लोग काल के गाल में स ...

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    ‘देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है स्वदेशी’

    लोकेन्द्र सिंह मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आई कि कुछ लोग स्वदेशी जैसे अनुकरणीय, उदात्त और वृहद विचार का विरोध क्यों करते हैं? स्वदेशी से उन्हें क्या दिक्कत है? मुझे लगता है कि स्वदेशी का विरोध वे ही लोग करते हैं जो मानसिक रूप से अभी भी गुलाम हैं या फिर उनको विदेशी उत्पाद से गहरा लगाव है. संभव है, इनमें से बहुत से लोग उन संस्थाओं और संगठनों से जुड़े हों या प्रभावित हों, जो विदेशी कंपनियों से चंदा पाते हैं. जब ...

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    पुलित्ज़र पुरस्कारों की आड़ में रची जा रही भारत विरोधी साजिश

    सौरभ सिंह इस साल जब पुलित्ज़र पुरस्कारों की घोषणा की गयी तो तीन नामों ने भारतीयों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा. चन्नी आनंद, मुख्तार खान और डार यासीन को फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार दिया गया. परिचय में ही लिखा गया कि “कश्मीर के विवादित क्षेत्र में”. जबकि “कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है”, भारत के बार-बार यह स्पष्ट करने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय लिबरल गैंग भारत की छवि को दुनिया में धूमिल करने का दुष्कृत्य ...

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    देवर्षि नारंद जयंती पर विशेष – ‘तद्विहीनं जाराणामिव.’ अर्थात् वास्तविकता (पूर्ण सत्य) की अनुपस्थिति घातक है

    - लोकेन्द्र सिंह भारतीय परंपरा में प्रत्येक कार्यक्षेत्र के लिए एक अधिष्ठाता देवता/देवी का होना हमारे पूर्वजों ने सुनिश्चित किया है. इसका उद्देश्य प्रत्येक कार्य क्षेत्र के लिए कुछ सनातन मूल्यों की स्थापना करना ही रहा होगा. सनातन मूल्य अर्थात् वे मूल्य जो प्रत्येक समय और परिस्थिति में कार्य की पवित्रता एवं उसके लोकहितकारी स्वरूप को बचाए रखने में सहायक होते हैं. यह स्वाभाविक ही है कि समय के साथ कार्य की पद्ध ...

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    सामर्थ्य नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए – किसान ने 2 एकड़ के खेत से अपनी आधी उपज जरूरतमंदों की सहायता के लिए दान की

    भोपाल (विसंकें). दान करने के लिए सामर्थ्य नहीं दिल बड़ा होना चाहिए, इस कहावत को चरितार्थ किया है जबलपुर के एक किसान ने. जिन्होंने अपनी 2 एकड़ फसल में से आधी फसल कोरोना महामारी से लड़ रहे जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए सेवा भारती को दान कर दी. कोरोना महामारी से देश की आर्थिक गतिविधियां रुक गई हैं, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को रोटी का संकट है. ऐसी स्थिति में समाज के बीच में से आ रहे सकारात्मक समाचार दिल को ...

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    कोरोना महामारी – जरूरतमंदों की सहायता कर रहा भारत भारती संस्थान

    भोपाल (विसंकें). कोरोना महामारी से उत्पन्न परिस्थिति के कारण सम्पूर्ण देश मे लॉकडाउन है. इससे अनेक लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. ऐसे में सरकार और प्रशासन के साथ अनेक समाजसेवी संस्थाएं गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन व अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवा रही हैं. जगह-जगह उनके लिए आश्रय स्थल बनाये गए. संकटकालीन परिस्थितियों में जिले की अग्रणी शैक्षिक व समाजसेवी संस्था भारत भारती अपने उपलब्ध साधनों, पूर ...

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    ग्रीन बुक के खुलासे और बुद्धिजीवियों की भूमिका

    लोकेन्द्र सिंह पाकिस्तानी सेना के रणनीतिक एवं गोपनीय प्रकाशन ‘ग्रीन बुक-2020’ के सामने आने से भारत के विरुद्ध चलने वाले प्रोपोगंडा का खुलासा हो गया है. जो तथ्य सामने आए हैं, वे सब चौंकाने वाले हैं. अकसर यह प्रश्न उठते हैं कि भारत के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी/लेखक अनावश्यक रूप से भारत सरकार की आलोचना क्यों करते हैं? जब भारत के पक्ष में लिखा जाना चाहिए, तब वे भारत को परेशानी में डालने वाला लेखन अंतरराष्ट्रीय मीड ...

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    कल्पना और झूठ पर आधारित है अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट

    लोकेन्द्र सिंह अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में जो सुझाव दिया है, वह कोरी कल्पनाओं और सफेद झूठ पर आधारित है. यूएससीआईआरएफ ने भारत को ‘कुछ खास चिंताओं’ वाले उन 14 देशों की सूची में शामिल करने का सुझाव दिया है, जहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है. दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों पर नजर रखने वाली अमेरिक ...

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    संघ की संकल्पना : सेवा उपकार नहीं, समाज के प्रति कर्तव्य

    लोकेन्द्र सिंह देश के किसी भी हिस्से में, जब भी आपदा की स्थितियां बनती हैं, तब राहत/सेवा कार्यों में राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के स्वयंसेवक अग्रिम पंक्ति में दिखाई देते हैं. चरखी दादरी विमान दुर्घटना, गुजरात भूकंप, ओडिसा चक्रवात, केदारनाथ चक्रवात, केरल बाढ़ या अन्य आपात स्थितियों में संघ के स्वयंसेवकों ने पूर्ण समर्पण से राहत कार्यों में अग्रणी रहकर महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया. अब जबकि समूचा देश कोरोना ...

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