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नाबालिग मूक बधिर बालिका के साथ हुई दरिंदगी की जांच सी.बी.आई. को सौंपने से उत्पन्न प्रश्न?

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राज्य सरकार ने घटना के मात्र 6 दिन में ही यह मान लिया है कि राज्य का पुलिस प्रशासन इस योग्य नहीं है कि इस प्रकरण में दोषी व्यक्तियों को पकड़ सके या कहीं ऐसा तो नहीं कि राज्य सरकार इस अपराध में लिप्त व्यक्तियों को अपने राजनीतिक लाभ के लिये बचाने का प्रयास कर रही है. यह शंका ना तो निर्मूल है और ना ही दुर्भावनापूर्ण है. इसका आधार वर्तमान सरकार एवं इसी नेतृत्व में पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा की गई कार्यवाही है.

अलवर में नाबालिग मूक-बधिर के साथ हुई दरिंदगी की प्राथमिक रिपोर्ट में स्वयं पुलिस ने धारा 375-376 की परिभाषा के अनुसार बलात्कार का प्रकरण दर्ज किया था. फिर अचानक ही एस.एफ.एल. की रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए मंत्रियों और अधिकारियों ने समाचार पत्रों में बयान दिया कि पीड़िता के साथ बलात्कार नहीं हुआ है. तो क्या धारा 375-376 बलात् बनाए गए शारीरिक सम्बन्धों को ही दुष्कर्म मानती है, प्राइवेट पार्ट को नुकीली चीजों से क्षतिग्रस्त करने को दुष्कर्म नहीं मानती. जबकि पीड़िता की मां कह रही है कि मैं अपनी मूक बधिर लड़की को पाल रही हूं और उसकी आंखें बता रही हैं कि उसके साथ बहुत बुरा हुआ है और अभी तक पीड़िता के बयान भी नहीं हुए हैं. पांच दिन की जांच में यह रहस्य बन गया है कि पीड़िता के साथ क्या हुआ है.

घटना – 1: इसी सरकार द्वारा वर्ष 2019 में ग्राम झिवाणा भिवाड़ी के हरीश जाटव की हत्या में एक समुदाय विशेष के नामजद व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट के बावजूद हरिश जाटव की हत्या को एक्सीडेंट में हुई मौत बताकर माननीय न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया.

घटना- 2: सितम्बर 2021 में बड़ौदामेव थाने के भटपुरा निवासी योगेश जाटव के साथ एक समुदाय विशेष के व्यक्तियों द्वारा की गई मारपीट और उसकी मृत्यु के बाद परिवार द्वारा हत्या का प्रकरण दर्ज कराने के बाद भी योगेश जाटव की मौत भी एक्सीडेंट में बताकर माननीय न्यायालय में चालान पेश कर दिये.

घटना – 3: बालोत नगर रामगढ़ निवासी बालिका के साथ एक समुदाय विशेष के लोगों द्वारा किये गये सामूहिक दुष्कर्म की घटना में दर्ज रिपोर्ट को वापस लेने के लिये पीड़ित परिवार पर धन, बल आदि का दबाव बनाया गया. असफल होने पर पीड़िता के बाप सरवन की पेड़ से लटकाकर हत्या कर दी. हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के बाद भी इस प्रकरण में मृतक सरवन की मौत आत्महत्या बताकर माननीय न्यायालय में चालान पेश किये गए.

घटना – 4: सितम्बर 2011 को मेवात क्षेत्र के गांव गोपालगढ़ थाना गोपालगढ़ में एक समुदाय विशेष की उपद्रवी भीड़ पर राज्य सरकार ने उपस्थित अधिकारियों को बल प्रयोग नहीं करने दिया. जब उपद्रवी भीड़ ने गांव पर हमला किया, और हिंसक भीड़ को रोकने के लिए की गई पुलिस फायरिंग में 10 लोग मारे गए. ये सभी स्थानीय गोपालगढ़ के नहीं थे, अन्य गांवों से आए थे. इस घटना में भी उ.प्र. में होने वाले चुनावों को देखते हुए एक समुदाय के गुस्से से बचने के लिये कुछ दिनों के अन्दर ही जांच सी.बी.आई. को सौंप दी गई और राजनीतिक चतुराई का उपयोग कर तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर एक जघन्य हत्याकाण्ड को दो समुदाय के संघर्ष में बदल दिया.

कहीं ऐसा तो नहीं कि अलवर में मूक बधिर बालिका के साथ हुई दरिंदगी में राज्य सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिये जांच सी.बी.आई. को सौंपी है. इस प्रकरण में भी राज्य सरकार जांच सी.बी.आई. को सौंपकर स्वयं को जनता के आक्रोश से बचा रही है.

इन दिनों सम्पूर्ण मेवात क्षेत्र एक समुदाय विशेष के आतंक से पीड़ित है. क्षेत्र में गौ तस्करी, अवैध वसूली, महिलाओं के साथ दुर्वयवहार, भूमि पर अनाधिकृत कब्जे की घटनाएं आम हो गई हैं. इससे सम्पूर्ण मेवात से बहुसंख्यक हिन्दू पलायन कर रहा है. लगभग 150 से अधिक गांव से शत प्रतिशत पलायन हो गया है.

विश्व हिन्दू परिषद् राजस्थान सरकार एवं केंद्र सरकार से आग्रह करती है. इस सम्पूर्ण क्षेत्र में हो रही घटनाओं को रोकने के लिये कठोर कदम उठाए. ऐसा नहीं होने पर विश्व हिन्दू परिषद् सम्पूर्ण मेवात में बड़ा जन आन्दोलन खड़ा करेगी.

सुरेश उपाध्याय

क्षेत्र मंत्री, विश्व हिन्दू परिषद्, राजस्थान

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