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चीनी कंपनी अली बाबा और जैक मा पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप

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गुरुग्राम की कोर्ट ने कंपनी को समन भेज 30 दिनों में मांगा जवाब

नरेंद्र कुंडू

गुरुग्राम (विसंकें). चीन की विस्तारवादी नीति ने अनेक देशों को परेशान किया है. यद्यपि चीन अपनी इस नीति का अनुसरण पिछले कई दशकों से कर रहा है, लेकिन अब विश्व के सामने चीन का असली चेहरा उजागर हो चुका है. चीन के झूठे चेहरे को छिपाने के लिए अब चीनी कंपनियां तरह-तरह के झूठ फैला कर अपनी साख बचाने का असफल प्रयास करने में जुटी हैं.

हाल ही में चीनी कंपनियों का एक नया चेहरा सामने आया है. चीनी कंपनी अली बाबा पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप लगा है. कंपनी के ही एक पूर्व कर्मचारी की शिकायत पर गुरुग्राम की अदालत ने संज्ञान लेते हुए चीनी कंपनी अली बाबा व जैक मा को समन जारी कर जवाब तलब किया है. अदालत ने अली बाबा व संस्थापक जैक मा को 30 दिन के अंदर जवाब देने को कहा है. चीन के अली बाबा ग्रुप की कंपनी यूसी वेब के खिलाफ पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर ने गुड़गांव कोर्ट में याचिका दायर की है. आरोप है कि उन्होंने वेबसाइट पर चलाई गई झूठी खबरों का विरोध किया तो कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया.

भारत-चीन सीमा पर हिसंक झड़प के बाद भारत ने सुरक्षा कारणों से अली बाबा के यूसी न्यूज, यूसी ब्राउजर समेत 59 अन्य चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था. इसके कुछ समय बाद ही यह मामला सामने आया है. यूसी वेब में काम करने वाले पूर्व कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह परमार ने 20 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई कि कंपनी सभी कंटेंट को सेंसर करती थी. इतना ही नहीं परमार ने आरोप लगाया कि यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज ऐप झूठी खबरें दिखाते थे, जिससे भारत में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा हो. पूर्व कर्मचारी की शिकायत पर गुरुग्राम की सिविल जज ने अली बाबा और इसके संस्थापक जैक मा को समन जारी किया है. कोर्ट ने कंपनी के प्रतिनिधियों को 29 जुलाई को हाजिर होने का आदेश दिया है और कंपनी से लिखित रूप में 30 दिनों के अंदर जवाब मांगा है.

59 प्रतिबंधित मोबाइल ऐप में अली बाबा भी शामिल

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा विवाद के बाद भारत सरकार की ओर से प्रतिबंधित की गई चीन की 59 मोबाइल ऐप में अली बाबा ग्रुप की यूसी न्यूज और यूसी ब्राउजर ऐप भी शामिल है. अलीबाबा ग्रुप की कंपनी यूसी वेब के गुडग़ांव ऑफिस में जुलाई 2017 तक असोसिएट डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके पुष्पेंद्र सिंह परमार की ओर से उनके वकील अतुल अहलावत ने यह याचिका दायर की है. याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कंपनी चीन विरोधी कंटेंट को सेंसर करने के लिए संवेदनशील शब्दों का इस्तेमाल करती थी. इसके ऐप यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल मचाने के लिए झूठी खबरें फैलाते हैं. कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कुल 12 लोगों को समन जारी कर 29 जुलाई तक खुद या वकील के जरिए पेश होने के निर्देश दिए हैं. इन 12 में अली बाबा ग्रुप, यूसी वेब मोबाइल प्राइवेट लिमिटेड, फाउंडर जैक मा, कंपनी के दो चीनी व दो भारतीय डायरेक्टर आदि शामिल हैं. याचिकाकर्ता की ओर से दायर की गई 56 पेज की याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अक्तूबर 2017 में उन्हें बगैर किसी नोटिस के निकाल दिया. यूसी न्यूज की कुछ पोस्ट क्लिप भी लगाई गई हैं, जिनमें कई फर्जी न्यूज के स्क्रीनशॉट शामिल हैं.
दो खबरों के दिए उदाहरण

पूर्व कर्मचारी का आरोप है कि साल 2017 के दौरान ऐप पर एक पोस्ट डालकर कहा गया था कि आज आधी रात से 2000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. 2018 के दौरान एक पोस्ट की हेडलाइन थी, अभी-अभी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया है. लेकिन भारत ने न ही दो हजार रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाया और न ही साल 2018 के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच कोई युद्ध हुआ था.

यह मामला कोर्ट में है और हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे

यूसी इंडिया ने एक बयान में कहा है कि स्थानीय कर्मचारियों के साथ भारतीय बाजार के अनुसार क्या प्रतिबद्धता थी, इसके बारे में हमें जानकारी नहीं है. वहां की नीतियां स्थानीय कानूनों के अनुसार होंगी. यह मामला कोर्ट में है और हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

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