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सिर्फ भावनात्मक नहीं गौ प्रेम, वैज्ञानिकों ने भी माना वरदान है भारतीय नस्ल की गाय

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भोपाल (विसंकें). मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ‘गौ कैबिनेट’ का गठन करने के बाद अब मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य बन चुका है, जहां गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए मंत्रिमंडल स्तर पर फैसले लिए जा सकेंगे. बीते रविवार को कैबिनेट की पहली वर्चुअल बैठक में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए.

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 2000 गौशाला खोलने की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार गाय को समृद्धि का आधार बनाएगी. गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हम भारतीय संस्कृति के संरक्षण के पक्षधर हैं. गाय, गीता और गंगा भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं. इसीलिए सरकार ने गौ कैबिनेट का गठन कर पूरे देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है.

कई लोग गाय को धर्म से जोड़कर देखते हैं. वास्तविकता है कि हिन्दू धर्म में गाय का अत्यधिक महत्व है, लेकिन यह महत्व वैज्ञानिक ज्ञान पर आधारित है. पिछले दशक में हुए कई शोधों ने इस बात को प्रमाणित किया है. कई वैज्ञानिकों का यह मानना है कि गाय की उपस्थिति मात्र ही पर्यावरण के लिए एक महत्त्वपूर्ण योगदान है, दूसरी तरफ हमारे प्राचीन ग्रंथ भी यह बताते हैं कि गाय की पीठ पर सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोक कर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं.

कृषि में गाय के गोबर की खाद, औषधि से काफी सुधार है. प्रकृति के 99% कीट प्रणाली के लिये गाय का गोबर लाभदायक है, गौमूत्र या खमीर हुए छाछ से बने कीटनाशक इन सहायक कीटों को प्रभावित नहीं करते. एक गाय का गोबर 7 एकड़ भूमि को खाद और मूत्र 100 एकड़ भूमि की फसल को कीटों से बचा सकता है. विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि गाय के गोबर में विटामिन बी-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, यह रेडियोधर्मिता को भी सोख लेता है.

गाय का दूध पीला रंग लिये होता है, जो केसर जैसा होता है. यह ‘‘क्यूरोसिन’’ नामक प्रोटीन के कारण होता है. यह आरोग्यवर्धक, बुद्धिवर्धक, शीतलतादायक औषधि है, जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है.

डॉ. फ्रैंक लाऊन्टेन कहते हैं कि ‘‘एक लीटर गाय का दूध लेकर उसका पृथक्करण किया तो देखने में आया कि इसमें आठ अण्डे तथा पांच सौ ग्राम मुर्गी का मांस तथा ७५० ग्राम मछली जितने तत्व मिल सकते हैं. गाय का दूध मांस से श्रेष्ठ है क्योंकि इसके विटामिन तथा पोषक तत्व उच्च कोटि के होने के साथ साथ सुपाच्य और सात्विक होते हैं. इन तत्वों को शरीर स्वाभाविक रूप से ग्रहण करता है.

गाय के कच्चे दूध में ऑक्साइड रिडक्टेस जैसे पाचक रस अच्छी मात्रा में होते हैं जो शरीर में पैदा होने वाले टोकिसन्स तथा टोमेन्स जैसे विकारों को दूर करता है. भारतीय नस्ल की गाय के दूध के अन्दर जल 87 %, वसा 4 %, प्रोटीन 4%, शर्करा 5 %, तथा अन्य तत्व 1 से 2 % प्रतिशत पाया जाता है. गाय के दूध में 8 प्रकार के प्रोटीन 11 प्रकार के विटामिन, पाए जाते हैं. गाय के दूध में ‘कैरोटिन‘ नामक प्रदार्थ भैंस या जर्सी गाय के दूध की तुलना में दस गुना अधिक होता है.

दूध को दो श्रेणियों मे बांटा गया है – A1 और A2 {A1 जर्सी का और A2 भारतीय देशी गाय का} एक शोध के अनुसार भारत सहित पूरे विश्व में A1 दूध पीकर लोग मधुमेह, गठिया, अस्थमा, मानसिक विकार जैसे गंभीर रोगों का शिकार हो गए हैं. दुनिया भर में डेयरी उद्योग अपने पशुओं की प्रजनन नीतियों में BCM7 मुक्त A2 दूध के उत्पादन के आधार पर बदलाव ला रहा है. विश्व बाज़ार में न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, जापान और अब अमेरिका मे प्रमाणित A2 दूध के दाम साधारण A1 दूध से कही अधिक हैं. जबकि A2 दूध सिर्फ भारतीय नस्ल की देशी गाय से प्राप्त होता है.

वैज्ञानिकता की कसौटी पर कसा गया यह एक सत्य है कि गाय के समीप जाने से ही संक्रामक रोग कफ सर्दी, खांसी, जुकाम से लड़ने वाली ऊर्जा का विकिरण होता है. एशियन वैज्ञानिक शिरोमियना का कहना है कि ‘गाय पालने से या संपर्क में रहने से मनुष्य की उम्र बढ़ती है क्योंकि मनुष्य के सांस के हानिकारक लार्वा, बैक्टीरिया, गाय की श्वास में नष्ट होते हैं.’ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार सुबह ख़ाली पेट गौ मूत्र के सेवन करने से कैंसर जैसा रोग भी नष्ट हो सकता है. चूंकि गौ मूत्र में पॉटेशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड होता है, दूध देते समय गाय के मूत्र में लेक्टोज की वृद्धि होती है. जो हृदय रोगों के लिए लाभकारी है.

गाय के इसी महत्व को समझते हुए महान तत्व चिंतक बाल गंगाधर तिलक ने कहा था – ‘चाहे मुझे मार डालो, लेकिन गाय पर हाथ ना उठाओ’.

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गठित ‘गौ कैबिनेट’ ने गौ माता की सेवा, सुरक्षा और संवर्धन सुनिश्चित करते हुए समृद्ध मध्यप्रदेश के संकल्प के साथ सार्थक कदम बढ़ाया है. यह तो गौ संरक्षण और संवर्धन की दिशा मे एक सकारात्मक शुरुआत भर है, सबकी सहभागिता और संकल्प से ही समृद्धि संभव है.

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