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पुण्यतिथि – ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) जगदीश गगनेजा जी का पुण्य स्मरण

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जगदीश गगनेजा जी बाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे. वे सेना में ब्रिगेडियर पद से रिटायर हुए थे. सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद पुनः संघ कार्य में सक्रिय हो गए. उनके पास पंजाब प्रांत के सह-प्रान्त संघचालक का दायित्व था. उन्होंने अपना सारा जीवन देश को समर्पित कर दिया था.

उनका बेटा राहुल भी भारतीय सेना में कर्नल के रूप में सेवा दे रहा है. गगनेजा जी का परिवार लाहौर, पाकिस्तान का रहने वाला था. स्वाधीनता के समय बंटवारे में उनका परिवार फिरोजपुर जिले के जलालाबाद में बस गया. उनके पिताजी जलालाबाद में आढ़त का काम करने लगे. 19 फरवरी, 1950 को, जलालाबाद में ही गगनेजा जी का जन्म हुआ.

कुछ समय बाद उनका परिवार बठिंडा में आकर बस गया. उनकी स्कूली शिक्षा सनातन धर्म हाई सेकेंडरी स्कूल बठिंडा में हुई एवं उच्च शिक्षा बठिंडा के ही राजिंद्रा कॉलेज में हुई. वे पढ़ने में बहुत ही होशियार थे और साथ ही हॉकी के भी बहुत अच्छे खिलाड़ी थे. विद्यार्थी जीवन में ही वे “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” में संपर्क आए.

संघ के स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने द्वितीय वर्ष तक का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया था. 1970 में सेना में भर्ती हुए. सेना में उनके पास 6 साल तक, भारतीय एवं विदेशी अफसरों को प्रशिक्षण देने का दायित्व रहा और उसके बाद उन्होंने तोपखाने की कमांड संभाली. कई साल तक कश्मीर में भी नियुक्त रहे. वर्ष 2006 में ब्रिगेडियर के पद से सेवानिवृत्त हुए.

सेवानिवृत्ति के बाद वे जालंधर कैंट में रहने लगे. वर्ष 2009 में वे फिर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य में सक्रिय हो गए. पहले उन्होंने जालंधर के संघचालक का दायित्व ग्रहण किया और 2013 में पंजाब के सह प्रांत संघचालक बनाए गए. सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षितों करने के उनके अनुभव का लाभ स्वयंसेवकों को भी मिला.

वे अक्सर कहा करते थे कि – ”मुझे फौज और संघ में कोई अंतर नजर नहीं आता. दोनों जगह ही देश की सेवा का ही कार्य और दृढ़ अनुशासन है”. उनका कहना था कि – अधिकाँश सैनिक कभी न कभी स्वयंसेवक अवश्य रहे हैं. ऐसे देशभक्त लोगों से, देशद्रोहियों का नफरत करना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है.

वे 6 अगस्त, 2016 को अपनी धर्म पत्नी के साथ ज्योति चौक (जालन्धर) में फल खरीदने गए. जब वे फल खरीदकर अपनी कार लेने जा रहे थे, तभी मुँह पर कपड़ा बांधे दो मोटरसाइकिल सवार युवक उन्हें गोली मारकर फरार हो गए. डेढ़ माह तक अस्पताल में जिन्दगी और मौत से संघर्ष करने के बाद 22 सितम्बर को दुनिया से विदा हो गए.

देश और समाज की सेवा में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा. संघ के स्वयंसेवक दशकों से देश के लिए बलिदान देते आए हैं और आगे भी हमेशा ही देते रहेंगे. आज भी केरल, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल, नार्थ ईस्ट और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वयंसेवक देश की अखंडता के लिए निरंतर बलिदान दे रहे हैं.

 

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