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समर्पण राम के नाम

भट्टा क्यारकुली गांव निवासी महमूद हसन की स्वयं की माली हालत बहुत अच्छी नहीं है, फिर भी एक उदाहरण प्रस्तुत करते 70 वर्षीय महमूद हसन ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1100 रुपये समर्पण निधि दी. महमूद कहते हैं कि अगर उनके पास 11 हजार रुपये होते तो वह भी राम मंदिर के लिए देने से पीछे नहीं हटते. महमूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी प्रशंसक हैं.

मसूरी के एक होटल में काम करने वाले महमूद ने बताया कि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए कुछ युवा गांव में कूपन काट रहे थे, तब मैंने भी गांव के राकेश रावत से सहयोग करने की बात कही. इस पर कुछ युवा संकोच भी कर रहे थे, लेकिन राकेश रावत ने खुशी जताई और कहा कि आप भी सहयोग कर सकते हैं. मंदिर निर्माण के लिए दान देने से मुझे बड़ी खुशी हुई है.

महमूद हसन मूल रूप से छुटमलपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. वहीं, महमूद के बेटे नौशाद अली का कहना है कि हमें खुशी हुई कि उनके पिता ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग किया है. 1972 में जब वह मसूरी आए थे तो क्यारकुली गांव के डालू भाई, रतन और प्रेम सिंह ने उनकी बहुत मदद की थी. उस समय उनके पास सिर्फ 20 रुपये थे. महमूद हसन कहते हैं कि जब भी उनके जीवन में कोई संकट आया तो हिन्दू भाइयों ने ही उनकी मदद की. लॉकडाउन के दौरान भी गांव के राकेश रावत सहित कई लोगों ने सहयोग किया.

उधर, दूसरी ओर हरियाणा के गांव माजरा गुरदास निवासी उदयभान राव व डॉ. इंदु राव की बेटी पूर्णिमा राव ने उदाहरण प्रस्तुत किया. उदयभान ने तीन माह पूर्व गुरुग्राम के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ रही अपनी बेटी पूर्णिमा को जन्मदिवस पर मोबाइल फोन के लिए एक लाख रुपये की राशि दी थी. बेटी ने तभी मन बनाया था कि यह राशि अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को समर्पित करेगी. रविवार को अपना संकल्प पूरा किया तथा एक लाख रुपये का चेक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को श्रीराम मंदिर के लिए समर्पित कर दिया. पूर्णिमा ने अपने गुरुग्राम आवास पर विश्व हिन्दू परिषद के गुरुग्राम जिला अध्यक्ष अजीत सिंह को चेक सौंपा.

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