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रक्षामंत्री ने बीआरओ द्वारा निर्मित 24 पुलों तथा तीन सड़कों को वर्चुअल माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया

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नई दिल्ली. रक्षामंत्री ने चार राज्यों तथा दो केंद्र शासित प्रदेशों में सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित 24 पुलों और तीन सड़कों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्र को समर्पित किया. इन 24 पुलों में से नौ जम्मू और कश्मीर में हैं; लद्दाख एवं हिमाचल प्रदेश में पांच-पांच; उत्तराखंड में तीन तथा सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश में एक-एक पुल बनाए गए हैं. तीन सड़कों में से दो लद्दाख में और एक पश्चिम बंगाल में तैयार की गई है. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण  भारत के पहले स्वदेशी श्रेणी 70 140-फीट डबल-लेन वाले मॉड्यूलर ब्रिज का उद्घाटन था, जिसे सिक्किम के फ्लैग हिल डोकला और चिसुमले-डेमचोक रोड पर 11,000 फीट की ऊंचाई पर और लद्दाख में 19,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उमलिंग ला दर्रे पर बनाया गया है. यह दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने योग्य सड़क होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी रखता है.

रक्षामंत्री ने इन परियोजनाओं को सीमावर्ती इलाकों की प्रगति के लिए बीआरओ की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब बताया और विश्वास व्यक्त किया कि ये निर्माण कार्य नए भारत के विकास में एक लंबा रास्ता तय करेंगे. उमलिंग-ला दर्रे पर बनी सड़क सशस्त्र बलों की तेज आवाजाही, पर्यटन को बढ़ावा देने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करेगी. राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें सामरिक जरूरतों को पूरा करती हैं और देश के विकास में दूरदराज के क्षेत्रों की समान भागीदारी सुनिश्चित करती हैं. उन्होंने शून्य से नीचे के तापमान और ऊंचाई की चुनौतियों के बावजूद इस उपलब्धि को हासिल करने में अपनी दृढ़ता के लिए बीआरओ की सराहना की.

रक्षामंत्री ने स्वदेशी डबल-लेन मॉड्यूलर ब्रिज को ‘आत्मनिर्भरता’ का शानदार उदाहरण बताया और इस तथ्य की सराहना की कि इसे बेहद कम लागत पर तैयार किया गया है तथा जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से हटाया जा सकता है. यह प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘मेक इन इंडिया’ का उद्देश्य प्राप्त करने के मार्ग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. यह सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से संपर्क प्रदान करने के सरकार के संकल्प का प्रतीक भी है. यह पुल ऐसे क्षेत्रों में और अधिक पुलों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा.

बीआरओ द्वारा निष्पादित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की संख्या को रिकॉर्ड 102 तक पहुंचा दिया है, यह उपलब्धि भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में हासिल की गई है. बीआरओ ने रिकॉर्ड समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा किया है, जिनमें से अधिकांश परियोजनाओं में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है. इससे पहले इसी वर्ष जून महीने में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में 12 सड़कों और 63 पुलों – कुल मिलाकर 75 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया था.

उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, राजमार्गों, सुरंगों एवं पुलों के निर्माण को एक मजबूत तथा समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जो देश अपने मार्ग स्वयं विकसित करता है, वह दुनिया को रास्ता दिखाता है. उन्होंने दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार करके और देश को अपनी सुरक्षा, संचार तथा व्यापार उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करके राष्ट्र निर्माण में बीआरओ के योगदान की सराहना की. उन्होंने अटल सुरंग, कैलाश मानसरोवर सड़क, हाल ही में 54 पुलों का उद्घाटन और ‘सड़क सुरक्षा’ तथा ‘सड़क, पुल, सुरंग, हवाई क्षेत्र’ पर उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना सहित बीआरओ की हालिया उपलब्धियों का विशेष तौर पर उल्लेख किया.

राष्ट्र के समग्र विकास के संकल्प को दोहराते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिस तरह से देश के आंतरिक भागों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

 

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