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दुनियाभर में मेड इन इंडिया वैक्सीन की मांग, अनेक देशों से भारत को मिला अनुरोध

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नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही. पहले त्वरित निर्णयों से कोरोना को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की और विश्व को राह दिखाई. उसके पश्चात विभिन्न देशों की सहायता के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (HCQ) की आपूर्ति में सबसे आगे रहा. वहीं, अब भारत में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन को इमरजेंसी उपयोग की अप्रूवल मिलने के पश्चात विश्व के विभिन्न देश वैक्सीन के लिए भारत से आस लगाए बैठे हैं. कई देशों से भारत को अनुरोध प्राप्त हो चुके हैं, कुछ देशों ने सीधे कंपनी से भी संपर्क किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि भारत मानवता को बचाने के लिए बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है. प्रवासी भारतीय दिवस पर कहा था कि भारत पीपीई किट्स, मास्क, वेंटिलेटर और टेस्टिंग किट्स बाहर से मंगवा रहा था. पर अब देश आत्मनिर्भर है. आज भारत मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन के साथ मानवता को बचाने के लिए तैयार है.

कोरोना वैक्सीन के बॉक्स पर सर्वे संतु निरामयाः उद्घोषित है, इसका अर्थ है सभी निरोगी हों…..और भारत अपनी इस भूमिका को निभाने के लिए तैयार है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पड़ोसी देशों के अलावा अन्य देशों से भी वैक्सीन की डिमांड आ रही है. हाल ही में सीरम के CEO अदार पूनावाला और भारत बायोटेक के चेयरमैन व  MD डॉ. कृष्णा ऐल्ला ने संयुक्त बयान में कहा था कि दोनों कंपनियां भारत और दुनिया के अन्य देशों को जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही हैं. अमेरिका और यूके सहित 12-14 देशों ने स्वदेशी (मेड इन इंडिया) वैक्सीन में रुचि दिखाई है. यह सभी देश सुरक्षित टेक्नोलॉजी चाहते हैं. लॉन्ग टर्म साइड-इफेक्ट्स नहीं चाहते. हम बांग्लादेश सरकार से भी बातचीत कर रहे हैं ताकि वहां क्लीनिकल ट्रायल्स शुरू किए जा सकें.

भारत ने वैक्सीन का उत्पादन बढ़ा दिया है. पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों को भारत से वैक्सीन सप्लाई होगी. इसके साथ ही ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका ने तो औपचारिक रूप से घोषणा भी कर दी है कि वे मेड इन इंडिया वैक्सीन का इस्तेमाल करने वाले हैं.

मेड इन इंडिया वैक्सीन की मांग…..पड़ोसी पहले की नीति

नेपाल – नेपाल ने 20% आबादी को वैक्सीनेट करने की योजना बनाई है. इसके लिए काठमांडू ने 12 मिलियन डोज मांगे हैं. विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने 14 जनवरी को अपनी प्रस्तावित यात्रा से पहले कहा कि वे भारत सरकार के साथ वैक्सीन सप्लाई पर डील कर सकते हैं.

भूटान – भूटान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवी-शील्ड वैक्सीन के 10 लाख डोज मांगे हैं. इस वैक्सीन को पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रहा है.

म्यांमार – म्यांमार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ पर्चेज कॉन्ट्रैक्ट किया है. आंग सान सु की ने नए वर्ष में देश के नाम संदेश में कहा था कि भारत से पहले बैच की वैक्सीन खरीदने के लिए पर्चेज कॉन्ट्रैक्ट किया जा चुका है. म्यांमार ने अपने देश के गरीब लोगों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवैक्स प्रोग्राम और ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) से भी मदद मांगी है.

बांग्लादेश – बांग्लादेश ने भी कोवी-शील्ड के 30 मिलियन डोज का अनुरोध किया है. नवंबर में बांग्लादेश के बेक्सिमको फार्मा ने सीरम से 30 मिलियन डोज खरीदने के लिए सहमति पत्र पर साइन किए थे. बांग्लादेश का ड्रग रेगुलेटर इस वैक्सीन को पहले ही अप्रूवल दे चुका है.

श्रीलंका – श्रीलंका ने भी वैक्सीन मांगी है और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कोलंबो में राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे से बातचीत के दौरान भरोसा भी दिलाया है. इस बीच, श्रीलंका की कोशिश यूएन-समर्थित कोवैक्स फैसिलिटी से भी वैक्सीन हासिल करने की है.

मालदीव – नंबर अभी तय नहीं है, पर मालदीव भी वैक्सीन पर बातचीत कर रहा है.

अफगानिस्तान – भारत और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक में वैक्सीन का मसला उठा था. इसके बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अतमार ने सोशल मीडिया पर कहा था कि हम वैक्सीन के लिए भारत की ओर देख रहे हैं.

ज्यादातर देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के गावी (ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन)-कोवैक्स अलायंस के माध्यम से भारत में बनी वैक्सीन हासिल करेंगे. गावी के तहत दी जाने वाली वैक्सीन में भी भारत का अधिकांश योगदान होगा. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देशों से कहा है कि वे द्विपक्षीय वैक्सीन डील्स न करें. अगर किसी देश ने अपनी जरूरत से ज्यादा वैक्सीन सिक्योर कर ली है तो उसे कोवैक्स के तहत डोनेट करें.

ब्राजील – राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने पत्र लिखकर 2 मिलियन कोवी-शील्ड वैक्सीन अर्जेंट बेसिस पर उपलब्ध कराने की अपील की है. ब्राजील में केस तेजी से बढ़ रहे हैं और इस वजह से वह जल्द से जल्द वैक्सीन चाहता है.

दक्षिण अफ्रीका – दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से उसे 1.5 मिलियन वैक्सीन मिलेंगी.

जापान – सरकार ने फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन के 120 मिलियन डोज, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के 120 मिलियन, मॉडर्ना के 50 मिलियन और नोवावैक्स से 250 मिलियन डोज की डील की है.

दक्षिण कोरिया – सरकार ने फाइजर-बायोएनटेक और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका से 20-20 मिलियन डोज की डील की है. कोवैक्स फैसिलिटी से उसे 10 मिलियन डोज मिलेंगी.

ऑस्ट्रेलिया – ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 140 डोज की व्यवस्था की है. ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका से 53.8 मिलियन, नोवावैक्स से 51 मिलियन और फाइजर-बायोएनटेक से 10 मिलियन डोज की डील की है. कोवैक्स से उसे 25.5 मिलियन डोज मिलेंगी.

फिलीपींस – सरकार ने 50 मिलियन डोज की व्यवस्था की है. ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के 2.6 मिलियन डोज का प्री-ऑर्डर किया है. फिलीपींस सरकार ने कहा है कि नोवावैक्स वैक्सीन की 30 मिलियन डोज के लिए उसकी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से बातचीत चल रही है. यह वैक्सीन जुलाई 2021 तक तैयार हो जाएगी.

इंडोनेशिया – इंडोनेशिया ने 338 मिलियन वैक्सीन डोज के ऑर्डर दिए हैं. इसमें चीनी कंपनियों सिनोवेक से 60 मिलियन, सिनोफार्म से 60 मिलियन और कैनसिनो बायोलॉजिक्स से 20 मिलियन डोज के ऑर्डर शामिल है. उसे ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के 100 मिलियन और नोवावैक्स की वैक्सीन के 30 मिलियन डोज मिलेंगे.

थाईलैंडः सरकार ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के 26 मिलियन डोज खरीदी हैं. यह जून तक मिलेंगी. अगले साल तक 66 मिलियन डोज खरीदने की योजना है. बाकी डोज अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और रूस के मैन्युफैक्चर्स और कोवैक्स के जरिए जुटाई जाएंगी.

इनपुट – दैनिक भास्कर

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