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वरिष्ठ प्रचारक कला साधक पद्मश्री बाबा योगेंद्र का देवलोकगमन

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व संस्कार भारती के संरक्षक कला साधक पद्मश्री बाबा योगेंद्र 98 वर्ष की आयु में आज प्रातः देवलोकगमन कर गए. 10 जून 2022, शुक्रवार (भीमसेन एकादशी) को लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में प्रातः 8:00 बजे शरीर शांत हुआ. बाबा योगेंद्र ज़ी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे तथा उनका लखनऊ स्थित अस्पताल में उपचार चल रहा था.

बाबा योगेंद्र कला के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था संस्कार भारती के अनेक वर्षों तक राष्ट्रीय संगठन मंत्री रहे.

बाबा योगेंद्र का जन्म 7 जनवरी, 1924 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में प्रसिद्ध वकील बाबू विजय बहादुर श्रीवास्तव के घर में हुआ था. बचपन में गांव में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाने लगे. जब मोहल्ले में संघ की शाखा लगने लगी, तो योगेन्द्र को भी वहां जाने के लिए कहा. छात्र जीवन में उनका सम्पर्क गोरखपुर में संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख से हुआ. योगेन्द्र जी यद्यपि सायं शाखा में जाते थे; पर नानाजी प्रतिदिन प्रातः उन्हें जगाने आते थे, जिससे वे पढ़ सकें. एक बार तो तेज बुखार की स्थिति में नाना जी उन्हें कन्धे पर बिठाकर डेढ़ किमी. पैदल चलकर पडरौना गए और उनका उपचार करवाया. इसका इतना प्रभाव पड़ा कि उन्होंने शिक्षा पूर्ण कर स्वयं को संघ कार्य के लिए ही समर्पित करने का निश्चय कर लिया.

1942 में लखनऊ में प्रथम वर्ष ‘संघ शिक्षा वर्ग’ का प्रशिक्षण करने के बाद 1945 में प्रचारक बने. बाबा योगेंद्र गोरखपुर, प्रयाग, बरेली, बदायूं और सीतापुर में प्रचारक रहे.

विभाजन को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था. उन्होंने इस पर एक प्रदर्शनी बनाई. संघ शिक्षा वर्ग में जिसने भी यह प्रदर्शनी देखी, वह अपनी आँखें पोंछने को मजबूर हो गया. फिर तो ऐसी प्रदर्शिनियों का सिलसिला चल पड़ा. शिवाजी, धर्म गंगा, जनता की पुकार, जलता कश्मीर, संकट में गोमाता, 1857 के स्वाधीनता संग्राम की अमर गाथा, विदेशी षड्यन्त्र, माँ की पुकार…आदि ने संवेदनशील मनों को झकझोर दिया. ‘भारत की विश्व को देन’ नामक प्रदर्शिनी को विदेशों में भी प्रशंसा मिली.

उनकी प्रतिभा को देखकर वर्ष 1981 में जब संस्कार भारती संगठन बना, तो बाबा योगेंद्र को कार्य सौंपा गया. विश्व को भीमबेटका तथा सरस्वती नदी के मार्ग की जानकारी देने वाले पद्मश्री डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर जी के साथ मिलकर उन्होंने कला साधकों के मन में राष्ट्रीय भावना के जागरण का कार्य लम्बे समय तक किया. उनके मार्गदर्शन में संस्कार भारती आज कला के क्षेत्र में  देश की अग्रणी संस्था है. आज सामाजिक दायित्वबोध एवं राष्ट्रप्रेम से युक्त कला-साधकों की अग्रणी संस्था है.

विनम्र श्रद्धांजलि..

ॐ शांतिः

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