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भारतीय अवधारणाओं का सटीक अर्थ देने वाले शब्दकोश का विमोचन 11 नंवबर को

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पुणे. भारतीय संकल्पनाओं के सटीक अर्थ की व्याख्या करने वाले ‘एकात्म मानव दर्शन – ग्लोसरी ऑफ कांसेप्ट्स’ विशेष कोश का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय जी होसबाले शुक्रवार 11 नवंबर को करेंगे. इस अवसर पर राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी भी उपस्थित रहेंगे.

प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे ने कहा कि भारतीय जनसंघ के नेता और ‘एकात्म मानवदर्शन’ के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय दर्शन के आधार पर विचारों को सूत्रबद्ध किया है. ‘एकात्म मानवदर्शन’ के प्रति जनमानस में काफी रूचि बढ़ रही है. लेकिन इस विचार को आम जनता तक ले जाने के लिए इसकी कई अवधारणाओं का सटीक अर्थ समझाना आवश्यक है. साथ ही, कई भारतीय शब्दों के लिए अंग्रेजी में सटीक शब्द नहीं हैं. उदाहरण के लिए, आत्मा, अहंकार, भाव, बुद्धि, धर्म, चित्त, गुरू, जीवात्मा, काम, माया, मानस, मोक्ष, परमात्मा, प्रकृति, साधना, संस्कार, संस्कृति, शास्त्र व श्रद्धा जैसे कई अन्य शब्द मिलेंगे. इन शब्दों को अंग्रेजी में समझाने के लिए अंग्रेजी के सामान्य शब्दों का उपयोग किया जाता है और इससे अक्सर अनर्थ हो जाता है.

इस पृष्ठभूमि पर सेंटर फॉर इंटीग्रल स्टडीज एंड रिसर्च ने ऐसे शब्दों की शब्दावली तैयार की है. पिछले सात वर्षों से इसी दिशा में प्रयास कर इस कोश का निर्माण किया जा रहा है. इस कोश को मुंबई के एकात्म प्रबोध मंडल ने रवींद्र महाजन और नाना लेले के संपादकीय मार्गदर्शन में 30 विद्वानों के योगदान के साथ 4 साल के प्रयास के बाद तैयार किया है.

इस शब्दकोश में कुल 131 अवधारणाओं को शामिल किया गया है. इनमें पारम्परिक शब्दकोश के विपरीत शब्दों के पीछे के अर्थ को समझाने का विस्तृत प्रयास किया गया है. इन शब्दों में, जो अधिकतर संस्कृत के, विभिन्न भारतीय भाषाओं अथवा अंग्रेजी में लेखन अंतर को यथासंभव उल्लेखित करने का प्रयास किया गया है.

इस शब्दकोश को अंग्रेजी में तैयार किया गया है ताकि भारतीयों के साथ-साथ विभिन्न देशों के बुद्धिजीवी इन शब्दों से परिचित हो सकें. इस उपक्रम के तहत, शब्दकोश को विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी लाने की योजना है.

उन्होंने कहा कि इस विश्वकोश के प्रकाशन के अवसर पर एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया है. जिसमें एकात्म मानवदर्शन और भारतीय विचारधारा से संबंधित पांच सत्र होंगे. इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नंदकुमार ‘एकीकृत मानव दर्शन – भविष्य का मार्ग’, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री विनायकराव गोविलकर ‘भारतीय अर्थव्यवस्था – प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ – एकात्म मानव दर्शन से समाधान’ , पूर्व केंद्रीय मंत्री महेश चंद्र शर्मा ‘राष्ट्रीय सुशासन – मुख्य मुद्दे और चुनौतियाँ – एकात्म मानव दर्शन से समाधान’ और राष्ट्रीय जीवन में एकात्म मानव दर्शन – बाधाएं, कार्यों का अभाव और आवश्यक पहल तथा किससे’ विषयों पर चर्चा करेंगे.

इस कोश में राष्ट्रीय जीवन से संबंधित 131 मूलभूत अवधारणाओं को एकात्म मानवदर्शन के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है. इन्हें धर्म और दर्शन, समाज, अर्थशास्त्र और प्रशासन नामक चार वर्गों में विभाजित किया गया है. यह शब्दकोश भारतीय विचार साधना, पुणे (020-24487225) से प्राप्त किया जा सकता है.

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