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‘योग करें, रोज करें और मौज करें’

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वर्तमान में हमारी शारीरिक सक्रियता काफी कम हो गई है. आधुनिक इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से घिरे हमारे व्यक्तित्व में सहज और स्वाभाविक सक्रियता में काफी कमी आई है. बदलती जीवनशैली ने हमारी शारीरिक ऊर्जा और स्फूर्ति को प्रभावित किया है. ऐसे में अपनी दिनचर्या में चंद मिनट योग के जोड़ लते हैं तो हमारी क्षमता इस कदर बढ़ सकती है जो हम सोच भी नहीं सकते. अनेक शोध बताते हैं कि योग हमारी स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक है, मन-मस्तिष्क को शांत करता है.

हाल ही में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद और आईआईटी दिल्ली द्वारा संयुक्त रुप से किए गए एक प्रारंभिक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है. 40 मिनट का भ्रामरी प्राणायाम स्मरण शक्ति बढ़ा सकता है, बुद्धि तेज कर सकता है. ज्ञान ग्रहण करने की क्षमता में वृद्धि करता है और ब्लड प्रेशर कम करने में भी मददगार हो सकता है और यही नहीं नियमित रूप से इसे अपनाने पर यह आपके तनाव को भी कम कर सकता है.

पूरी रिपोर्ट आने के पश्चात सकारात्मक प्रभावों को लेकर चिकित्सक बता पाएंगे, लेकिन प्रारंभिक परिणाम उत्साहवर्धक हैं. आज हम आठवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं. ‘योगा फॉर ह्यूमैनिटी’ थीम के साथ. भारत की पहल से संयुक्त राष्ट्र में सहमति के पश्चात 2015 में पहला अंरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. विश्व पटल पर योग के माध्यम से सामंजस्य और शांति का संदेश हमने दिया है. ऐसे में हम भारतवासी योग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं तो न केवल हम, हमारा पूरा परिवार, बल्कि पूरा समाज, संपूर्ण राष्ट्र – विलक्षण रुप से क्षमतावान, प्रतिभावान और ऊर्जा से सराबोर होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 28 करोड़ लोग अवसाद से पीड़ित हैं. योग और ध्यान, तनाव को शांत करने में मदद कर सकता है. योग मस्तिष्क में रसायन के लेवल को बढ़ाने में मदद करता है, जिसे गामामिनो ब्यूट्रिक एसिड (जीएबीए) कहते हैं. इसका संबंध बेहतर मूड और चिंता में कमी से है. दुनिया भर के शोधकर्ता अब इस बात पर सहमत हैं कि योग अवसाद के लक्षणों को कम करके, प्रतिरक्षा को बढ़ाकर, ह्रदय की कार्यप्रणाली में सुधार करके और नींद के पैटर्न को सही करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

योग हमारी रचनात्मकता को मनचाहे मुकाम तक ले जा सकता है, इसके अनेक उदाहरण हैं. योग को बढ़ावा देना भी सतत विकास के साथ जुड़ा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2022 के माध्यम से आयुष मंत्रालय का लक्ष्य योग को वैश्विक बनाना है. यह दिन योग की पवित्रता को बढ़ावा देने का एक अनूठा प्रयास है जो राजनीतिक सीमाओं, जाति, धर्म, लिंग और वर्ग की बाधाओं के पार है. तभी तो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान का विजन और मिशन-योग के माध्यम से सभी के लिए स्वास्थ्य, सद्भाव और खुशी की स्थापना करना है.

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती कहते हैं कि योग का सम्मान और बढ़ना चाहिए. योगियों को अपने और अपने संगठन के ‘लोगो’ (प्रतीक चिन्ह) और ‘ईगो’ (अहंकार) को किनारे रखकर लोगों के हित में काम करना होगा. वे निवेदन करते हैं कि – ‘योग करें, रोज करें और मौज करें’, ‘कुछ दिन तो करें योग, फिर देखिए मिट जाएंगे सारे रोग’. योग सदाबहार है. योग रामबाण है. योग संजीवनी है. योग से तन स्वस्थ और मन विकार मुक्त होता है. अवसाद को उत्सव बना दे, वही है योग. अवसाद को भी अवसर बना दे, वही है योग और जो अवसाद को भी प्रसाद बना दे वही है योग.

समस्या शारीरिक हो या मानसिक या फिर पर्यावरण की, सभी का समाधान है योग. योग मन और मस्तिष्क के तनाव को दूर करता है. तनाव से मुक्त व्यक्ति ही सही, स्पष्ट और सुव्यवस्थित निर्णय ले सकता है. युगों बाद दुनिया ने योग के महत्व को पहचाना है. अब योग का कोई विकल्प नहीं.

इंडियन योग एसोसिएशन की प्रेसिडेंट और योग गुरु डॉ. हंसाजी योगेंद्र कहती हैं कि योग का सरल अर्थ है, शरीर और व्यक्तित्व को अनुशासित करना. उसे एक उद्देश्य के लिए तैयार करना. अष्टांग योग व्यक्ति को नैतिक, शारीरिक और मानसिक रूप से अनुशासन में लाने का सबसे अच्छा तरीका है. जीने की राह कॉलम के तहत पं. विजय शंकर मेहता योग की व्याख्या करते हैं कि ‘योग का पर्याय ही शांति है. मनुष्य होने का मोल चुकाइए. यह भोग से नहीं योग से होगा. खूब काम कीजिए, खूब धन कमाइए. पर ध्यान रखिए कि जब हम सफलता की राह पर निकलते हैं तो जो मिलता है, वह अपनी जगह, पर जो दांव पर लगता है, वे पांच चीजें हैं – समय, संबंध, संपत्ति, संतान और स्वास्थ्य. लेकिन जो लोग योग साधेंगे, उनका स्वास्थ्य ठीक रहेगा और स्वास्थ्य ठीक होगा तो बाकी बातें अपने आप सही होती चली जाएंगी. योग की विशेषता है – वह शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है. जीवन में दोनों का संतुलन होना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को ही क्यों?

21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे लोग ग्रीष्म संक्रांति भी कहते हैं. ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है. 21 जून, साल का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. भारतीय परंपरा के अनुसार, माना जाता है कि सूर्य दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए उपयुक्त होता है. साथ ही योग करने से लोगों की आयु भी लंबी होती है. इसी को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में 21 जून को चुना गया. पहला अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2015 को मनाया गया था.

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