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ढांचे के धराशायी होने से ही प्रशस्त हुआ राम मंदिर का मार्ग – डॉ. सुरेन्द्र जैन

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सवा 5 लाख गांवों के 65 करोड़ लोगों से 44 दिन में संपर्क का बनेगा इतिहास

कर्णावती. विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने पत्रकार वार्ता में कहा कि गीता जयन्ती पर भगवान श्रीकृष्ण की कर्म-भूमि गुजरात में आकर मैं गौरव का अनुभव करता हूँ और सभी को गीता जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ. कर्मयोग का संदेश देने वाली गीता को मानने वाला हिन्दू हमेशा से कर्म-योगी रहा है. इसीलिए उन्होंने गीता जयन्ती पर ही 1992 में कारसेवा का निर्णय लिया था. यह सौभाग्य और गर्व का विषय है कि वो कलंक का टीका जिसे हटाने का संघर्ष 1528 से किया जा रहा था, 1992 की गीता जयन्ती पर दुनिया से हट गया. हिन्दू समाज का पुरुषार्थ साकार हुआ और लाखों लोगों का बलिदान सार्थक हुआ. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर अन्तिम निर्णय दिया और केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वे मन्दिर निर्माण के लिए न्यास का गठन करें. संतों के नेतृत्व में न्यास का गठन किया गया और अब मन्दिर का निर्माण प्रारम्भ हो गया.

प्रारम्भ से ही तय किया गया था कि हम सरकार से कोई पैसा नहीं लेंगे. ऐसे पूंजीपति भी आए, जिन्होंने कहा कि हम मंदिर का बजट पूरा कर सकते हैं. हमने उनको भी विनम्रता से अस्वीकार कर दिया. हमने निर्णय लिया, गांव-गांव तक जाएंगे, जन-जन तक जाएंगे, हर व्यक्ति को राम के साथ जोड़ेंगे और हर मोहल्ले, हर गांव, हर शहर, हर कस्बे में रहने वाले हर हिन्दू का सहयोग राम मन्दिर के निर्माण के लिए लेंगे.

हमने प्रारम्भ में लक्ष्य रखा था कि हम चार लाख गांवों के 11 करोड़ परिवारों को सम्पर्क कर 50 करोड़ हिन्दुओं का योगदान राम मंदिर के निर्माण के लिए लेंगे. लेकिन प्रान्तों की बैठकों में आश्चर्यजनक उत्साह लोगों में दिखाई दिया. अब यह लक्ष्य बहुत बढ़ गया है. अब 5,23,395 गांवों में 13 करोड़ से अधिक परिवारों के 65 करोड़ हिन्दुओं से सम्पर्क करके भव्य राम मन्दिर निर्माण हेतु निधि समर्पण अभियान को पूरा किया जाएगा. इसके निमित्त 10 लाख टोलियां बनी हैं, जिनमें 40 लाख कार्यकर्ता लगेंगे.

वैश्विक इतिहास का यह सबसे बड़ा सम्पर्क अभियान होगा. वास्तव में इस अभियान के पश्चात् राम जन्मभूमि पर पवित्र मन्दिर से रामराज्य की यात्रा प्रारम्भ हो जाएगी. यह अभियान रामराज्य के

लिए एक लॉन्चिंग पैड सिद्ध होगा. ऐसा लगता है कि आने वाले तीन वर्षों के अन्दर भव्य मन्दिर साकार होगा और 2023 के अन्त तक मन्दिर के शिखर पर भव्य भगवा पताका लहराएगी. उसका परिणाम यह होगा कि वर्तमान सह्स्त्राब्दि राम की सहस्त्राब्दी होगी, सब ओर राम के आदर्शों  के अनुसार चलने की प्रेरणा होगी. गुजरात प्रान्त ने तय किया है कि अपने 18556 गांवों में से, प्रत्येक गांव में शत प्रतिशत सम्पर्क व हर हिन्दू से समर्पण कराने का प्रयास किया जाएगा. एक समिति बनाई गई है. संतों के मार्गदर्शक मंडल में सभी सम्प्रदायों के संत और आचार्य सम्मिलित किए गए हैं. जैन समाज का उत्साह तो अद्वितीय दिखाई दे रहा है. पूज्य पद्मसागरसूरीश्वर जी महाराज की प्रेरणा से पहले ही जैन समाज ने एक 25 किलो की चाँदी की ईंट राम मन्दिर के निर्माण के लिए दी थी. अब उन्होंने बढ़-चढ़कर और भी सहयोग करने का निर्णय लिया है. आखिर क्यों न हो.  भगवान राम इक्ष्वाकु वंश के थे. 24 में से 22 तीर्थंकर इक्ष्वाकु वंश के ही तो हैं. इसीलिए, हर जैन को भी यह लग रहा है यह राम मन्दिर उनका अपना मन्दिर है. वे आर्थिक योगदान तो दे ही रहे हैं, उनकी कई टोलियां गांव-गांव तक सम्पर्क करेंगी.

इस अभियान के बाद निश्चित तौर पर एक नए सशक्त भारत का उदय होगा, जो एक महाशक्ति के रूप में सामने खड़ा होगा और विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा.

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