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पृथ्वी ही जगत में उपस्थित समस्त वस्तुओं का आधार – सूर्य प्रताप शाही

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काशी. कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं भाऊराव देवरस संस्थान भारतीय किसान संघ अक्षय कृषि परिवार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सुफलाम पृथ्वी तत्व पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया.

सूर्य प्रताप शाही जी ने कहा कि पृथ्वी ही जगत में उपस्थित समस्त वस्तुओं का आधार है. जिसका उल्लेख अथर्वेद के बारहवें सर्ग के प्रथम अध्याय पृथ्वी सूक्त में मिलता है. पृथ्वी पंचतत्व में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है. पंच तत्वों की महती भूमिका पर बल देते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानव शरीर की संरचना में पंच तत्वों का वर्णन किया है. इसी क्रम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के निर्माण में भी पंच तत्वों की भूमिका को वरीयता दी थी. उन्होंने कृषि में रासायनिक खादों के प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों द्वारा रासायनिक खादों का प्रयोग कृषि योग्य भूमि को लगातार कम कर रहा है. जब मिट्टी में उर्वरा शक्ति नहीं रहेगी तो हम जनता का पेट भर सकते हैं, किन्तु उसके स्वास्थ्य को सुरक्षित नहीं रख सकते.

इन समस्याओं और उसके समाधान को सुफलाम द्वारा आयोजित पूर्व की 12 प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया गया है. वर्तमान में आयोजित प्रदर्शनी में भी पृथ्वी तत्व के महत्वपूर्ण अवयवों को मॉडल, पोस्टर एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. प्रदर्शनी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कृषि से संबंधित समस्याओं का संभाव्य समाधान हमें प्राप्त हो सकता है.

प्रदर्शनी के आयोजन के लिए कृषि मंत्री ने भाऊराव देवरस न्यास, भारतीय किसान संघ, अक्षय कृषि परिवार ग्राम्य विकास, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का आभार व्यक्त किया.

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर ए.एस. रघुवंशी निदेशक पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, ने कहा कि वर्तमान में परंपरागत कृषि को अपनाने की आवश्यकता है. प्रदर्शनी के उद्घाटन में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री के दिनेश दत्तात्रेय कुलकर्णी जी, अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत प्रसाद महापात्र, सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं छात्र व किसान, कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन सुफलाम के सचिव प्रोफेसर राकेश सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर ओ पी सिंह जी ने किया.

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