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तीन दिवसीय ‘ज्ञानोत्सव’ में शैक्षिक सुधारों और नई शिक्षा नीति पर विमर्श करेंगे देशभर के शिक्षाविद्

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नई दिल्ली. शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रभावी हस्तक्षेप के जरिये नीतिगत पहल और शैक्षिक सुधारों के लिए कार्य करने वाला देश का प्रमुख शैक्षिक संगठन ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ अन्य सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर 17-19 नवंबर को नई दिल्ली के पूसा संस्थान में ‘ज्ञानोत्सव-2079’ का आयोजन कर रहा है. इस बार ‘ज्ञानोत्सव’ का प्रमुख विषय ‘शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना पर आधारित है.

तीन दिवसीय ‘शिक्षा के महाकुंभ’ का उद्घाटन 17 नवंबर को नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित अन्य गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में किया जाएगा. इस दौरान देश में व्यापक शैक्षिक सुधारों के साथ-साथ नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और ‘शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत’ जैसे मुद्दों पर देशभर के प्रख्यात शिक्षाविद, नीति निर्माता, प्रशासक, शोधार्थी और विचारक गहन विमर्श करेंगे.

प्रासंगिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श एवं समाधान प्रदान करने के लिए विद्यालय, उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों की भागीदारी के साथ ‘ज्ञानोत्सव’ का आयोजन किया जाता है. इस बार ‘ज्ञानोत्सव’ में विशेषज्ञों और छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावक भी हिस्सा ले रहे हैं, जो भारत में आवश्यक शैक्षिक सुधारों के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे. शिक्षा से छात्र, शिक्षण संस्थान एवं देश आत्मनिर्भर बने, इस पर ‘ज्ञानोत्सव-2079’ के दौरान विशेष रूप से चिंतन किया जाएगा.

‘ज्ञानोत्सव’ के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं, जिसमें देशभर के प्रतिभागियों की ऑनलाइन प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई हैं. कार्यक्रम के दौरान विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे.

देश में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनूठे नवाचारों पर केंद्रित प्रदर्शनी ‘ज्ञानोत्सव’ एक अहम हिस्सा है. इस बार प्रदर्शनी में देशभर के विभिन्न हिस्सों के करीब 80 नवोन्मेषी शिक्षा संस्थान शामिल हो रहे हैं. ये शैक्षिक नवाचार एक ओर अन्य शिक्षा संस्थानों के लिए प्रेरक हैं, तो दूसरी ओर छात्रों के लिए ये बेहद उपयोगी हैं.

‘ज्ञानोत्सव-2079’ के संयोजक ओम शर्मा ने बताया कि “कार्यक्रम में शिक्षा के प्रत्येक घटक की समान रूप से सहभागिता रहेगी. विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कृषि शिक्षा और विधि शिक्षा सहित अन्य शिक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ ‘शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों पर तीन दिन में कुल 10 सत्रों में विमर्श किया जाएगा. यह उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली-एनसीआर के 5000 से अधिक विद्यार्थियों सहित आम लोग इन तीन दिनों में शैक्षिक नवाचारों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुँच सकते हैं.”

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने बताया कि “शिक्षा के इस महाकुंभ में विमर्श मुख्य रूप से इस पर केंद्रित होगा कि शैक्षणिक संस्थान, सामुदायिक जुड़ाव, शिक्षा और अनुसंधान में स्टार्टअप व विकास के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने में किस प्रकार अपना योगदान दे सकते हैं. इस चिंतन से उभरा एक आधार सभी शिक्षण संस्थानों को प्राप्त हो सकेगा.”

“ज्ञानोत्सव में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी; भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान; कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर; केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल; केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार; कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार; भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे सहित विभिन्न केंद्रीय शिक्षा परिषदों तथा संस्थानों के प्रमुख उपस्थित रहेंगे. इस आयोजन में देशभर के लगभग 100 से अधिक विश्वविद्यालयों व शिक्षा संस्थानों के कुलपति व निदेशक तथा देशभर के 4000 से अधिक शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, छात्र, अभिभावक आदि सहभागिता करेंगे.”

कार्यक्रम के पहले दिन 17 नवंबर को विद्यालयी शिक्षा पर चर्चा होगी. कार्यक्रम के दूसरे दिन 18 नवंबर को उच्च व तकनीकी शिक्षा पर मंथन होगा. तीसरे व अंतिम दिन 19 नवंबर को चिकित्सा, विधि व कृषि शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पक्ष को लेकर चर्चा की जाएगी.

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