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प्रांत में हरित घर संकल्पना के विस्तार का प्रयास किया जाए – डॉ. मोहन भागवत

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पणजी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा, कि संघ की छह गतिविधियों (उपक्रम) द्वारा समाज के आचरण में बदलाव लाया जा सकता है. इन बदलावों से देश का सर्वांगीण विकास करना संभव है. सरसंघचालक शुक्रवार, २९ जनवरी से गोवा प्रवास पर हैं. पहले दिन उन्होंने छह गतिविधियों के कार्यकर्ताओं से वार्तालाप किया.

कार्य की दृष्टि से पर्यावरण संरक्षण, समरसता, गोसेवा, ग्रामविकास, कुटुंब प्रबोधन, धर्मजागरण के उपक्रम गतिविधि के अंतर्गत आते हैं. इन गतिविधियों के अंतर्गत अलग-अलग उपक्रम कोकण प्रांत में चलाए जा रहे हैं. गतिविधियों के कार्य की जानकारी लेने के साथ ही यह कार्य अधिक समाजोपयेगी हो, इस दृष्टि से सरसंघचालक ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया.

पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सरसंघचालक ने कहा कि हरित घर संकल्पना के अंतर्गत हर एक परिवार द्वारा वृक्षारोपण किया जाए. जल एवं ऊर्जा की बचत हो, गीले कचरे से कंपोस्ट बनाया जाए, हर घर में पक्षी घर हो. हरित घर संकल्पना का विस्तार किया जाए. हर एक घर में सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा जमा न हो, इसलिये ईको ब्रिक्स के उपयोग की मात्रा बढ़ाने का प्रचार किया जाए. पानी बचाएं, पेड़ लगाएं और प्लास्टिक का कम उपयोग करें. इन तीन बिंदुओं का अधिकाधिक कार्यविस्तार हो.

समरसता गतिविधि के कार्य की जानकारी लेते समय उन्होंने गतिविधि का उद्देश्य स्पष्ट करते कहा कि भेदभाव रहित समाज रचना तैयार करना, विषमता फैलाने वाली घटनाओं को रोकने के लिये प्रयास करना, विविध महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथि के कार्यक्रम सभी समाज बांधवों के साथ मनाना, उसके लिये समाज मानस तैयार करना, उसके लिये अपने आचरण में योग्य बदलाव लाना और भेदभाव रहित परिवार रचना खड़ी करने के लिये प्रयत्नशील रहना, इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोगी उपक्रमों का आयोजन गतिविधि के अंतर्गत किया जाए.

ग्रामविकास गतिविधि के अंतर्गत कोकण प्रांत में 71 गांवों में 1362 कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित किये गए. सरसंघचालक ने कहा कि, जल, जंगल, जमीन, जन, ऊर्जा, जीव एवं गौ विकास इस सप्तसंपदा पर आधारित शाश्वत ग्रामविकास करना आवश्यक है.

कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत 27 जिलों के 667 किसानों को गो आधारित खेती अर्थात जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया. प्रांत में लगभग 135 कार्यकर्ता कार्यरत हैं. हर एक किसान के घर में एक देसी गाय का पालन हो. दीपावली के कालखंड में 41 गोपालक किसान परिवारों ने 1,02,776 गोमय दिये तैयार किये. हर परिवार में एक देसी गाय के पालन की तरह हर एक घर में देसी गाय का घी और दूध पहुंचे, इसलिये सभी प्रयत्नशील हों. सरसंघचालक ने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया.

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