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रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है – नरेन्द्र मोदी

40 से ज्यादा देशों को डिफेंस का सामान निर्यात कर रहे

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री ने आज रक्षा क्षेत्र में केंद्रीय बजट प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित वेबिनार को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में कैसे आत्मनिर्भर बने, इस संदर्भ में आज का संवाद बहुत अहम है. आजादी के पहले हमारे यहां सैकड़ों ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां होती थीं. दोनों विश्व युद्धों में भारत से बड़े पैमाने पर हथियार बनाकर भेजे गए थे. लेकिन आजादी के बाद अनेक वजहों से इस व्यवस्था को उतना मजबूत नहीं किया गया, जितना किया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने इंजीनियरों-वैज्ञानिकों और तेजस लड़ाकू विमान की क्षमताओं पर भरोसा किया है और आज तेजस शान से आसमान में उड़ान भर रहा है. कुछ सप्ताह पहले ही तेजस के लिए 48 हजार करोड़ रुपए का ऑर्डर दिया गया है. 2014 से ही प्रयास करके transparency, predictability और ease of doing business के साथ हम इस sector में आगे बढ़ रहे हैं. De-Licensing, de-regulation, export promotion, foreign investment liberalization, आदि के साथ इस sector में एक के बाद एक कदम उठाए हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिफेंस से जुड़े ऐसे 100 महत्वपूर्ण डिफेंस आइटम्स की लिस्ट बनाई है, जिन्हें हम अपनी स्थानीय इंडस्ट्री की मदद से ही मैन्यूफैक्चर कर सकते हैं. इसके लिए टाइमलाइन इसलिए रखी गई है ताकि हमारी इंडस्ट्री इन ज़रूरतों को पूरा करने का सामर्थ्य हासिल करने के लिए प्लान कर सके.

सरकारी भाषा में ये Negative list है, लेकिन आत्मनिर्भरता की भाषा में ये Positive List है. ये वो पॉजिटिव लिस्ट है, जिसके बल पर हमारी अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ने वाली है. ये वो पॉजिटिव लिस्ट है जो भारत में ही रोज़गार निर्माण का काम करेगी. ये वो पॉजिटिव लिस्ट है जो अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए हमारी विदेशों पर निर्भरता को कम करने वाली है. ये वो पॉजिटिव लिस्ट है, जिसकी वजह से भारत में बने प्रॉडक्ट्स की, भारत में बिकने की गारंटी है.

भारत के विकसित होते डिफेंस सेक्टर की बहुत बड़ी भूमिका है, बहुत बड़ा अवसर भी है. आज हम 40 से ज्यादा देशों को डिफेंस का सामान निर्यात कर रहे हैं. Import पर निर्भर देश की पहचान से बाहर निकलकर हमें दुनिया के अग्रणी डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में अपनी पहचान बनानी है.

रक्षा के capital budget में भी domestic procurement के लिए एक हिस्सा reserve कर दिया गया है. उन्होंने निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि manufacturing के साथ-साथ design और development में भी निजी क्षेत्र आगे आए और भारत का विश्व भर में परचम लहराएं.

उन्होंने कहा कि MSMEs तो पूरे मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर के लिए रीढ़ का काम करती हैं. आज जो रिफॉर्म्स हो रहे हैं, उससे MSMEs को ज्यादा आजादी मिल रही है, उनको Expand करने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि देश में आज जो डिफेंस कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं, वो भी स्थानीय उद्यमियों, लोकल मैन्यूफैक्चरिंग को मदद करेंगे. यानि आज हमारे डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को हमें ‘जवान भी और नौजवान भी’, इन दोनों मोर्चों के सशक्तिकरण के रूप में देखना होगा.

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