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गाय के गोबर व गौमूत्र से तैयार किये जा रहे पर्यावरण अनुकूल दीपक व मूर्तियां

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लखनऊ. अवध प्रान्त में स्वदेशी, स्वालंबन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, व गौ संवर्धन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समवैचारिक संगठनों ने दीपावली के अवसर पर विशेष कार्य शुरू किया है.

सहकार भारती द्वारा प्रशिक्षित समूह दीपावली के अवसर पर पर्यावरण के अनुकूल गाय के गोबर व गौमूत्र मिश्रित उत्पाद जैसे  दीपक, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, बंदनवार, ॐ, स्वास्तिक आदि तैयार कर रहे हैं.

गोपेश्वर गौशाला मलिहाबाद के प्रबंधक उमाकांत के अनुसार गौशाला में लगभग 150 महिलाओं के द्वारा पर्यावरण के अनुकूल गोबर मिश्रित उत्पाद जैसे दीपक, हवन के लिये लकड़ी आदि प्रमुख रूप से तैयार किये जा रहे हैं. वहीं, राजाजीपुरम में चल रहे केंद्र पर प्रमुख तुषार श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां दीपक, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, बंदनवार, स्वास्तिक, श्री आदि उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं.

सहकार भारती के संयुक्त क्षेत्र संगठन मंत्री लक्ष्मण पात्रा के अनुसार पूरे प्रदेश में 4000 समूहों द्वारा 3 करोड़ से ज्यादा दीपक बनाये जा रहे हैं. जबकि एक अवध प्रान्त के 8 जिलों में 200 समूहों में 2000 महिलाएं काम कर रहीं है.

मोमबत्ती व चाइनीज झालरों के स्थान पर समाज के लोग गौ आधारित उत्पादों का प्रयोग करें, इसका आह्वान भी कार्यकर्ताओं द्वारा समाज से किया जा रहा है. ये सभी उत्पाद पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी होंगे. कुछ स्थानों पर सेवाभारती के कार्यकर्ताओं के द्वारा भी प्रशिक्षण का कार्य चल रहा है.

गोपेश्वर गौशाला प्रबंधक उमाकांत ने बताया कि नगर और ग्राम के प्रत्येक परिवार तक पांच दीपक पहुंचेंगे. एक प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्येक परिवार में गाय के गोबर से बने 5 दीपक अवश्य जलें और गाय के गोबर, कपूर, कचरी व अन्य औषधियों द्वारा तैयार की गई हवन की लकड़ी से हवन करने पर वातावरण शुद्ध होगा.

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग द्वारा एक लाख गाय के गोबर से बने दीपक से मां गोमती के तट पर देव दीपावली मनाई जाएगी. लखनऊ महानगर के 100 स्थानों पर नगर निगम के माध्यम से बात कर स्टाल लगाने की चर्चा हुई है.

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