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जम्मू कश्मीर – वन विभाग की ज़मीन क़ब्ज़ा करने वालों की सूची जारी; कई बड़े नेताओं के नाम शामिल

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करनैल चक्क में राजस्व विभाग की जमीन पर बने पूर्व मंत्री ताज मोहिउद्दीन के बंगले को गिराए जाने के बाद अब वन विभाग भी ऐसी ही कार्रवाई करने जा रहा है. वन विभाग ने जम्मू संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों के कुल 996 वन भूमि अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार की है. अब जल्द ही जारी की गई सूची के आधार पर एक-एक कर वन विभाग भी अपनी जमीन खाली करवाएगा.

वन विभाग की सूची के अनुसार, सुजवां, चौआदी, भठिडी, चाटा, बाहू, रैका, जटकी, दवारा, सिद्दड़ा, बजालता, परगालता, पलौड़ा, रूप नगर, चिन्नौर के अलावा अखनूर, पगरवाल आदि क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों ने विभाग की लगभग 12,510 कनाल वन भूमि पर कब्जा जमा रखा है. इन अतिक्रमणकारियों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने अकेले ही भठिडी, सुजवां आदि शहर से लगते क्षेत्रों में ही 50 से 150 कनाल वन भूमि पर कब्जा जमाया है.

इन क्षेत्रों में एक कनाल भूमि की कीमत करोड़ों रूपये में है. लिहाजा वन विभाग ने भूमि का सर्वे कर एक रिकार्ड तैयार कर लिया है. अतिक्रमण की गई भूमि पर कहीं कच्चा निर्माण हुआ है तो कहीं बड़े बंगले भी बन चुके हैं. इसके अलावा कुछ जगहों पर खेतीबाड़ी के नाम पर भी भारी संख्या में जमीनें कब्जाई गई हैं.

जानकारी के अनुसार, कुछ जगहों पर तो भूमि अतिक्रमणकारियों ने राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर भूमि के अवैध दस्तावेज भी बना लिए हैं. जबकि इस मामले में वन विभाग का रिकार्ड कुछ और ही कह रहा है. वहीं इस बारे वन विभाग के आयुक्त सचिव संजीव वर्मा का कहना है कि विभाग ने पिछले कुछ समय में अपनी काफी भूमि अतिक्रमणकारियों से छ़ुड़वाई है. वन विभाग अपनी एक इंच भूमि पर भी अतिक्रमणकारियों के कब्जे में नहीं रहने देगा.

फिलहाल विभाग द्वारा भूमि अतिक्रमणकारियों की जो सूची जारी की गई है, उनमें सबसे बड़ी संख्या में मुस्लिम हैं. जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल अतिक्रमणकारियों की संख्या है वो 996 है.

इनमें मुसलमान : 752 (यानि कुल संख्या का 76%)

गैर मुस्लिम : 244 ( यानि 24%).

सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन जम्मू जिले की केवल 7% मुस्लिम आबादी ने ही अतिक्रमणकारियों की सूची में 76 फीसदी तक पहुंचाया है. अतिक्रमण की गई वन भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए, जम्मू-कश्मीर प्रशासन तैयारी कर रहा है.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह एक अतिक्रमण विरोधी अभियान में, जम्मू जिला प्रशासन ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और राज्य मंत्री ताज मोहिउद्दीन सहित राजनेताओं से 260 कनाल से अधिक अतिक्रमित भूमि को खाली कराया था. सिर्फ इतना ही नहीं वन भूमि के अतिक्रमणकारियों की सूची में जेल में बंद अलगाववादी नेता शब्बीर शाह और शेख अब्दुल्ला के भाई मुस्तफा कमाल भी शामिल हैं.

अवैध कब्जे वाले जमीन का रोहिंग्या भी ले रहे हैं लाभ

उदाहरण स्वरूप जम्मू के उपायुक्त द्वारा उस वक्त न्यायालय में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार तवी नदी के कछार में अतिक्रमण करने वाले 668 लोगों में से 667 मुस्लिम समुदाय से थे. जम्मू शहर की सीमावर्ती वनभूमि पर बसाई गई भटिंडी नामक कॉलोनी इसकी एक और उदाहरण थी. हजारों की संख्या में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए भी इसके लाभार्थी रहे हैं.

यह धर्म-विशेष के लोगों को लाभ पहुंचाकर, विशेष रूप से जम्मू संभाग में उनके वोट बनवाकर और बढ़वाकर लोकतंत्र के अपहरण और अपनी सत्ता के स्थायीकरण की बड़ी सुनियोजित और संगठित कोशिश थी. अगर कहा जाए कि रोशनी एक्ट वास्तव में भ्रष्टाचार और जिहादी एजेंडे के कॉकटेल की एक बेमिसाल नजीर है तो कदापि गलत नहीं होगा.

रोशनी एक्ट गुपकार गैंग के कारनामों की बानगी

रोशनी एक्ट तो गुपकार गैंग के कारनामों की बानगी भर है. अभी ऐसे ना जाने कितने कच्चे चिट्ठे खुलने बाकी हैं जो इनकी हकीकत से परिचित कराएगा. रोशनी एक्ट वाली जांच में तो मात्र साढ़े 3 लाख कनाल भूमि की लूट का ही हिसाब-किताब हुआ है, बल्कि जांच तो इस बात की भी होनी चाहिए कि इस भूमि को लुटाने से कितनी कमाई हुई, उससे कितने पावर प्रोजेक्ट लगे और कितने गांवों का विद्युतीकरण कराया गया?

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