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वाल्मीकि आश्रम से हरियाणा प्रान्त में निधि समर्पण अभियान का शुभारम्भ

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गोहाना, सोनीपत (हरियाणा). हरियाणा में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान का शुभारंभ त्रिकालदर्शी वाल्मीकि महासभा गोहाना से पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन व अभियान के प्रांत प्रमुख राकेश त्यागी ने किया.

गगन हरियाणवी द्वारा गाये गीत “समय आ गया रामलला के मंदिर के निर्माण का. आओ मिलकर कर्ज चुकाएं सदियों के बलिदान का.” की लॉन्चिंग की गई. इसी के साथ पाञ्चजन्य व ऑर्गनाइजर के राममंदिर विशेषांक का विमोचन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष दीपक आदित्य ने की. मंच संचालन प्राण रत्नाकर ने किया.

पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने वाल्मीकि बस्ती में जाकर घरों से निधि समर्पण के लिए कूपन वितरित कर धन संग्रह किया. महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भारत की आत्मा में है समरसता, भारत की संजीवनी है समरसता. इसी भाव को संजोए यह निधि समर्पण अभियान है. श्रीराम मन्दिर निधि समर्पण अभियान केवल धन संग्रह के लिए नहीं, वरन सम्पूर्ण विश्व को भारत के दर्शन व चिंतन से अवगत कराने का है. यह अभियान गांवों, वनों व नगरों में रहने वाले रामभक्तों तक पुनः पहुंचने का है, जिन्होंने राम मंदिर आन्दोलन के समय प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका निभाई थी. राम जी का 14 वर्ष का वनवास समरसता के भाव को पुष्ट करने के लिए है. राम सबके हैं, सब राम के हैं…. यही भाव वनवास के समय व्यक्त हुआ.

डॉ. सुरेन्द्र जी जैन ने कहा कि भगवान वाल्मीकि व श्रीराम एक दूसरे के पूरक हैं. दोनों मिलकर पूर्णता के भाव को जाग्रत करते हैं. भगवान राम का सम्पूर्ण जीवन समरसता का साकार रूप है. इसलिये श्रीराम ने केवट व निषादराज को अपना मित्र बनाया. पक्षीराज जटायु का अंतिम संस्कार करके पिता तुल्य सम्मान दिया. शबरी के झूठे बेर खाकर उन्हें मातातुल्य सम्मान दिया. 14 वर्ष के वनवास में भीलों व वनवासियों के बीच मे रहकर उन्हें संगठित करके लंका में भी रामराज्य की स्थापना की. यदि श्री राम को 14 वर्ष का वनवास न होता, यदि वे वनवासियों के बीच न रहे होते तो वह सिर्फ राजाराम ही होते. वनवासियों के साथ रहने के कारण ही भगवान राम बने.

उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रोटी व कमल प्रतीक बने थे. अब रामराज्य की स्थापना के लिए भगवान राम व अयोध्या प्रतीक बनेंगे. भगवान राम का दिया हुआ, भगवान राम को समर्पित करने का प्रतीक और यही समर्पण की भावना नए भारत का निर्माण करेगी, जिससे राम राज्य का उदय होगा.

विहिप के उपाध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि राम का दिया हुआ, राम जी को देने का समय आ गया है. सभी को राम मंदिर के लिए अपना समर्पण अवश्य करना चाहिए.

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