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हाथरस मामला – सीएए की तर्ज पर हाथरस घटना की आड़ में बड़े स्तर पर जातीय हिंसा फैलाने की साजिश

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लखनऊ (विसंकें). सीएए की तर्ज पर हाथरस घटना की आड़ में भी उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश को हिंसा की आग में झोंकने का प्रयास चल रहा था. इसके लिए अमेरिका की तर्ज पर बड़े स्तर पर योजना की गई थी. न सिर्फ ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम से एक वेबसाइट बनाई गई थी, बल्कि उसमें भड़काऊ कंटेंट डालकर लोगों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा था. यही नहीं, हाथरस के नाम पूरे देश को जातीय हिंसा में धकेलने की साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए विदेशों से पैसा भी आया था. सरकार के अनुसार वेबसाइट को इस्‍लामिक देशों से फंडिंग मिल रही थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल संस्‍था से भी इसके कनेक्‍शन पर जांच की जा रही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने http://justiceforhathrasvictim.carrd.co/ नाम से एक वेबसाइट का पता लगाया है. इस पर पुलिस से बच निकलने और विरोध करने के तरीकों की जानकारी दी जा रही थी. साथ ही अपील की जा रही थी कि लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में विरोध प्रदर्शन में शामिल हों. ये भी निर्देश थे कि दंगा भड़कने पर आंसू गैस के गोलों से और गिरफ्तारी से कैसे बचें.

बताया जा रहा है कि यह साइट दिल्‍ली, कोलकाता, अहमदाबाद सहित देश के दूसरे हिस्‍सों में विरोध प्रदर्शन और मार्च आयोजित करने के लिए उकसा रही थी. महज कुछ ही घंटों में हजारों की संख्‍या में लोग फर्जी आईडी के जरिए इससे जुड़ गए. इसके बाद सोशल मीडिया पर हाथरस से जुड़ी अफवाहें और झूठी खबरें पोस्‍ट करने लगे. जैसे ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं यह वेबसाइट बंद हो गई. पर, वेबसाइट पर मौजूद कंटेंट एजेसियों ने सुरक्षित कर लिया है. इनमें फोटोशॉप की हुई कई फोटो, फेक न्‍यूज और एडिट किए विजुअल हैं.

सरकार के सूत्रों का कहना है कि वेबसाइट को इस्‍लामिक देशों से भारी मात्रा में आर्थिक मदद मिल रही थी. यह भी शक है कि सीएए विरोध में शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) का वेबसाइट को तैयार करने और संचालित करने में हाथ रहा है.

वेबसाइट पर कैसी जानकारी?

सरकार का दावा है कि इस तरह की वेबसाइट का मुख्य लक्ष्य सीएम, पीएम और सरकार की छवि को खराब करना है. वेबसाइट पर फर्जी आईडी से कई लोगों को जोड़ा गया. साथ ही इसमें दंगे कैसे करें और फिर दंगों के बाद कैसे बचें, इसके कानूनी उपाय की जानकारी वेबसाइट पर दी गई है. वेबसाइट में बताया गया है कि प्रदर्शन के वक्त क्या पहनें, कब किधर भागें, सोशल मीडिया पर कोई रिकॉर्डिंग ना डालें. अगर पुलिस लाठीचार्ज करती है तो क्या हो, प्रदर्शन वाली जगह माहौल भड़के तो कैसे निपटें.

यूपी सरकार का कहना है कि इसके जरिए फंडिंग की जा रही थी, सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पोस्ट, गलत तस्वीरें डालकर माहौल बिगाड़ा जा रहा था. साथ ही बताया गया कि वेबसाइट पर जानकारी दी गई थी मास्क पहनकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन करें, ताकि पहचान ना हो.

अभी ये वेबसाइट डिलीट कर दी गई है, लेकिन इसके लैंडिंग पेज से बता चला है कि वह फ्री में वेबसाइट बनाने के काम आता है. Carrd.co नाम के प्लेटफॉर्म से दुनियाभर के कई प्रोटेस्ट के लिए वेबसाइट बनाई जाती रही हैं, फिर चाहे अमेरिका में चल रहा ब्लैक लाइव मैटर से जुड़ा कोई प्रोटेस्ट हो या फिर कुछ और. इसके अलावा भारत में भी मजदूर, कश्मीर से जुड़े कुछ प्रोटेस्ट पेज इसी प्लेटफॉर्म से बने हैं.

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