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काशी विश्वनाथ एवं मां विंध्यवासिनी के चरणों में चढ़े फूलों से बनेगा हर्बल रंग व गुलाल

स्वदेशी दीवाली के पश्चात अब ईको फ्रेंडली होली मनाने की तैयारी हो रही है. उत्तरप्रदेश में इस बार पर्यावरण हितैषी होली मनाई जाएगी. जिसके लिए मंदिरों में चढ़े फूलों से हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काशी विश्वनाथ मंदिर और माता विन्ध्यवासिनी सहित अन्य मंदिरों में चढ़े फूलों से गुलाल तैयार कर रही हैं. साथ ही स्वरोजगार- स्वावलंबन की दिशा में भी कदम आगे बढ़ा रही हैं. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रारंभ की गई राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन योजना स्वरोजगार में वरदान साबित हो रही है.

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अर्न्तगत 32 जिलों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं. विशेषकर वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर काशी विश्वनाथ में महादेव एवं बसंती समूह, मिजार्पुर के विन्ध्याचंल में गंगा एवं चांद, खीरी जिले के गोकर्ण नाथ में शिव पूजा प्रेरणा लखनऊ के खाटू श्याम मंदिर तथा श्रावस्ती के देवीपाटन के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मंदिरों में चढ़े हुए फूलों से हर्बल रंग और गुलाल तैयार कर रही हैं.

ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि मंदिरों में चढ़े पुष्पों से हर्बल रंग और गुलाल तैयार कराया जा रहा है. इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है. इस प्रकार बने गुलाल एक तो हनिकारक नहीं होंगे. दूसरा, इससे बहुत सारी महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा.

परियोजना प्रबंधक आचार्य शेखर ने बताया कि प्रत्येक जनपद से 5 से 10 लाख रुपये का लक्ष्य रखा गया है. प्रदेश स्तर पर इसका लक्ष्य एक करोड़ रुपये का रखा गया है. स्थानीय बाजारों के साथ ही ई-कॉमर्स जैसे फ्लिपकार्ट और अमेजन पर ऑनलाइन बिक्री भी की जाएगी. इसके अलावा उत्पाद की बिक्री के लिए राज्य के सभी ब्लाकों के प्रमुख बाजारों में मिशन की ओर से स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा. मिशन का मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिले.

गंगा समूह मिर्जापुर की सचिव सविता देवी ने बताया कि मंदिरों से निकलने वाले फूल कचरे का हिस्सा नहीं बन रहे. न ही यह नदी को दूषित करते हैं. मंदिरों से फूलों को इकट्ठा कर इनको सुखा लिया जाता है. गरम पानी में उबालकर रंग निकाला जाता है. उसके बाद फूल की पंखुड़ियों को पीसकर अरारोट मिलाकर गुलाल तैयार किया जाता है. इसे बाजार और स्टॉलों की माध्यम से 140-150 रुपए में बड़े आराम से बेचा जा रहा है.

बलरामपुर अस्पताल के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ एमएच उस्मानी कहते हैं कि रासायनिक रंगों का प्रयोग मानव शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालता है. रंग में मिले कैमिकल्स से त्वचा कैंसर तक हो सकता है. इसके केमिकल स्किन को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. कॉपर सल्फेट रहने से नेत्र एलर्जी भी कर सकता है. होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग होना चाहिए ताकि स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण की भी रक्षा हो सके.

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