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हम सावधानी से रहेंगे, तो तीसरी लहर को रोक पाएंगे..!!

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सुखदेव वशिष्ठ

भारत में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बार-बार चर्चा हो रही है. सरकार-प्रशासन द्वारा तीसरी लहर के संकट को कम करने के लिए नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है. तीसरी लहर का संकट इसलिए क्योंकि हम अभी भी ‘हर्ड इम्यूनिटी’ के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं और न ही हम संक्रमण के चरण में पहुंचे हैं. हम संक्रमण के माध्यम से ‘हर्ड इम्यूनिटी’ हासिल नहीं करना चाहते हैं. दुनियाभर में कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है और अगर हमने कोरोना नियमों का पालन नहीं किया तो हमें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल के शब्दों में, “कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अगले 100-125 दिन महत्वपूर्ण हैं.”

इंडोनेशिया में 40 हजार से अधिक मामले प्रतिदिन आ रहे हैं. बांग्लादेश में पहले सात हजार मामले मिल रहे थे, लेकिन अब 13 हजार से अधिक मामले हर दिन मिल रहे हैं. ब्रिटेन में भी कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है. वहां दूसरी लहर में प्रतिदिन 50 हजार से ज्यादा मामले मिल रहे थे, पर अभी तीसरी लहर की शुरुआत में ही 35 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के भी कई शहरों में लॉकडाउन लगाया जा चुका है. स्पेन में सप्ताह में कोरोना वायरस मामलों की संख्या में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि नीदरलैंड में 300 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है.

भारत में कोविड का वर्तमान परिदृश्य

दूसरी लहर के पीक यानि मई महीने के दौरान भारत में प्रतिदिन औसतन चार लाख नए मामले दर्ज किए जा रहे थे, वो अब औसतन 50,000 से कम हैं. राज्यों में सख्ती के बाद कोरोना के नए मामलों में गिरावट संभव हो पाई है. कोरोना संक्रमण के नए मामले पहले की तुलना में कम हुए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गलतियों को दोहराया गया, तो ये गलतियां तीसरी लहर के घातक होने का कारण बन सकती हैं. लोगों ने कोविड के सेफ़्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, तो इससे वायरस को तेज़ी से फैलने में मदद मिलेगी जो तीसरी लहर के जल्दी आने का कारण बन सकती है. डेल्टा वेरिएंट की वजह से भारत को कोरोना की दूसरी लहर का सामना करना पड़ा. लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर वायरस के प्रसार को अतिसंवेदनशील आबादी में फैलने से रोका नहीं गया, तो कोरोना के ऐसे कुछ और वेरिएंट आ सकते हैं.

दिल्ली सहित उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में कोविड की स्थिति नियंत्रण में है. लेकिन, केरल  और महाराष्ट्र में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अकेला केरल ही भारत के कुल कोरोना मामलों का 30.3% हिस्सेदार है, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा मात्र 6.2% का ही था और जून में यह क्रम से बढ़ते हुए 10.6% और 17.1 % हो गया. कुछ ऐसी ही हालत महाराष्ट्र की है. देश के कुल केस का 20.8% महाराष्ट्र में है. अप्रैल में यह 26.7% ही था, जबकि उस समय दूसरी लहर अपने चरम पर थी. इसके साथ ही तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा में भी अप्रैल-मई की अपेक्षा वर्तमान में भारत के कुल केसों में हिस्सेदारी बढ़ गई है. मणिपुर, मिजोरम , त्रिपुरा ,आंध्र प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी कोविड-19 केसों में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

नए वेरिएंट और भारत में कोविड की तीसरी लहर

भारत में जून महीने तक क़रीब 30 हज़ार सेंपल सीक्वेंस किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि गति बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. तीसरी लहर का प्रभाव और इसका प्रसार इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारतीय आबादी में इम्युनिटी कितनी है. जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, उन्हें कोरोना से संभावित इम्युनिटी मिल चुकी है. साथ ही जिन लोगों को एक बार कोरोना संक्रमण हो चुका है, उन्हें भी इस वायरस से कुछ हद तक इम्युनिटी मिल गई है.

प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के. विजय राघवन का कहना है – तीसरी लहर टाली नहीं जा सकती. लेकिन यह कब आएगी, इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है. सावधानियां अपनाकर, नियमों का पालन करके इससे कुछ हद तक बचा जा सकता है.

प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं कि, “कई बार लोग सवाल पूछते हैं कि तीसरी लहर के बारे में क्या तैयारी है? तीसरी लहर पर आप क्या करेंगे? आज सवाल यह होना चाहिए कि तीसरी लहर को आने से कैसा रोका जाए.”

‘कोरोना ऐसी चीज है, वह अपने आप नहीं आती है. कोई जाकर ले आए, तो आती है. इसलिए हम अगर सावधानी से रहेंगे, तो तीसरी लहर को रोक पाएंगे. कोरोना की तीसरी लहर को आते हुए रोकना बड़ी बात है. इसलिए कोरोना प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है.’

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