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गाय के गोबर की महत्ता – कुवैत ने 192 मीट्रिक टन गाय के गोबर का ऑर्डर दिया

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नई दिल्ली. भारत में भले ही गौ-उत्पादों को लेकर बयानबाजी होती रहे, लेकिन अब इस्लामिक देश भी गाय के गोबर की महत्ता को स्वीकारने लगे हैं. इसी के चलते इस्लामिक देश कुवैत ने भारत से गाय के 192 मीट्रिक टन (1 लाख 92 हजार किलो) गोबर की मांग की है. कुवैत में एक वैज्ञानिक रिसर्च में पता चला है कि फसलों के लिए गाय का गोबर काफी बेहतर खाद है. इसके बाद कुवैत ने गाय के गोबर के लिए ऑर्डर दिया है. गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से गाय के गोबर पहली खेप कुवैत भेजी जाएगी.

इससे पहले तक भारत पशु उत्पादों में मांस और पशुओं के खाल के अलावा दूध और दूध के दूसरे उत्पादों का निर्यात करता रहा है. अब विदेशी वैज्ञानिक रिसर्चों में भी गाय के गोबर की गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद भारत को अन्य देशों से भी ऑर्डर मिल सकते हैं. बड़ी बात यह कि गोबर का निर्यात सरकारी नहीं, बल्कि सहकारी स्तर पर हो रहा है. विदेशों में गोबर निर्यात करने की योजना के बारे में देश के लगभग सभी राज्यों से बातचीत की जाएगी.

कुवैत ने खजूर के फसल के लिए मंगवाया गोबर

रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब, कुवैत और कतर के वैज्ञानिकों ने भारतीय देशी गाय के गोबर को बेहद उपयोगी बताया है. इसी कड़ी में भारत में राजस्थान की प्रमुख गोशालाओं से गाय का गोबर तीनों देशों में भेजा जाएगा. कुवैत से ऑर्डर भेजने की शुरुआत हो रही है. भारतीय गाय के गोबर के उपयोग से खजूर की फसल का आकार और उत्पादन बढ़ता है. कुवैत में देशी गाय के गोबर का पाउडर के रूप में खजूर की फसल में इस्तेमाल किया जाएगा. गाय के गोबर में 0.5 से 0.6 फीसदी नाइट्रोजन, 0.25 से 0.3 फीसदी फास्फोरस 0.25 से 0.3 और पोटाश की मात्रा 0.5 से 1.0 फीसदी होता है. गोबर की खाद में कैल्शियम, मैग्नीशियम, गंधक, लोहा, मैंगनीज, तांबा और जस्ता आदि जमीन को उपजाऊ बनाने वाली  तत्व भी पाए जाते हैं. इसलिए कुवैत ने पहली बार गाय के गोबर के लिए ऑर्डर दिया है.

खाड़ी देशों में पेस्टीसाइड के कारण खजूर की फसल प्रभावित हो रही है. खाड़ी देशों के निर्यात होने वाले पेस्टीसाइड से स्थानीय लोगों के साथ अब यूरोपियन देश भी तौबा कर रहे हैं. इसकी वजह से खाड़ी देशों के बाजार पर भी असर हो रहा है. वैज्ञानिक रिसर्च में पाया गया कि पेस्टीसाइड को खत्म करने में गाय का गोबर सबसे ज्यादा कारगर है.

खाड़ी देशों में गाय के गोबर की डिमांड का हाल ऐसा है कि ट्रांसपोर्ट का 40 फीसदी अधिक दाम चुकाकर मंगवाया जा रहा है. कहा जा रहा है कि अगले महीने गोबर की खेप अमेरिका और कतर में भी भेजी जाएगी. ब्रिटेन में पहले से ही गोबर गैस से प्रतिवर्ष करीब सोलह लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. अब ब्रिटेन की कुछ कंपनियों ने भारत की देशी गायों का गोबर मंगवाने को लेकर दिलचस्पी दिखाई है. पड़ोसी देश चीन 1.5 करोड़ परिवारों को बिजली देने के लिए गोबर का इस्तेमाल करता है.

गोशालाओं-पशुपालक किसानों की बढ़ेगी आमदनी

कृषि क्षेत्र में भारत में पशु उत्पादों का सफल इस्तेमाल हजारों वर्षों से होता आ रहा है. इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में पशु उत्पादों के निर्यात मामले में भी भारत पहले से ही एक बड़ा हब रहा है. अब कुवैत से शुरू हो रहे गाय के गोबर के बड़े पैमाने पर निर्यात के साथ ही क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. इससे गोशालाओं और पशुपालक किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुवैत की लैमोर नामक कंपनी ने गोबर मंगाया है. ‘सनराइज एग्रीलैंड एंड डेवलपमेंट रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड’ को ये ऑर्डर मिला है. कनकपुरा रेलवे स्टेशन से गोबर की पहली खेप रवाना की जाएगी.

कंपनी के डायरेक्टर प्रशांत चतुर्वेदी ने बताया कि भारत में पहली बार शायद इस तरह का कुछ काम हो रहा है. साल 2020-21 में भारत का पशु उत्पाद निर्यात 27,155.56 करोड़ रुपये था. जैविक खाद की मांग लगातार बढ़ रही है. भारत के तीस करोड़ मवेशी रोज 30 लाख टन के आसपास गोबर देते हैं. गाय के गोबर के निर्यात की वजह से गाय के संरक्षण में एक बड़ी पहल साबित होगी.

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