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कोरोना काल में जब प्रियंका राजनीति कर रही थीं, तो विद्या मंदिरों ने हजारों लोगों की सहायता की

सौरभ कुमार

केरल में मछली पकड़ने और सिक्स पैक दिखाने के बाद राहुल गांधी राजनीति में वापस आ गए हैं. घूम फिर के आये तो आते ही अपने दिमाग में जमा विध्वंसकारी जहर उगलने लगे. अर्थशास्‍त्री कौशिक बसु के साथ वीडियो चर्चा में कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी ने “विद्या भारती द्वारा (संघ से प्रेरित संस्थान) संचालित स्‍कूलों पर हमला शुरू किया. कहा, जैसे पाकिस्‍तान के इस्लामिक कट्टरपंथी अपने मदरसों का इस्‍तेमाल करते हैं, काफी कुछ उसी तरह आरएसएस अपने स्‍कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है.”

राहुल गांधी ने शिशु मंदिरों की तुलना पाकिस्तान के मदरसों से करके उन लाखों माता-पिता का अपमान किया है, जो अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार के लिए शिशु मंदिर में भेजते हैं. राहुल की आंखों पर पड़ा नफरत का चश्मा इस कदर हावी हो चुका है कि वो राजनीतिक लाभ के लिए न केवल लाखों बच्चों, अपितु हजारों शिक्षकों की तुलना पाकिस्तानी कट्टरपंथियों से कर रहे हैं.

राहुल गांधी कह रहे हैं कि “आरएसएस अपने स्‍कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है.”

तो हाँ..! विद्या भारती अपने स्‍कूलों में बच्चों व एक खास तरह की दुनिया दिखाता है. वो दुनिया जहां अपने पूर्वजों और संस्कृति का अपमान नहीं, बल्कि उन पर गर्व करना सिखाया जाता है. रॉक और पॉप म्यूजिक नहीं, संस्कारों की दुनिया. अपने माता-पिता और धरती मां को प्रणाम करना सिखाया जाता है. एक ऐसी दुनिया जहां राष्ट्र के लिए सर्वस्व समर्पण करने की प्रेरणा दी जाती है.

राहुल गांधी, जिन छात्रों की तुलना मदरसों में पलने वाले आतंकवादियों से कर रहे हैं…..उन बच्चों की उपलब्धियों, सेवाओं की सूची बनाने लगेंगे तो वह राहुल गांधी द्वारा अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में कहे गए शब्दों से भी ज्यादा हो जाएगी.

इसलिए सिर्फ कोरोना काल में विद्या भारती के विद्यालयों (छात्र, शिक्षक, प्रबंधन) द्वारा मध्यभारत प्रान्त में किये कार्यों की जानकारी हासिल कर लें.

सेवा कार्यों के लिए सौंप दी भवन और वाहनों की चाबी

कोरोना के शुरुआत में कोई भी सरकार व्यवस्थाओं के लिए तैयार नहीं थी, अधोसंरचना की कमी थी और हजारों की संख्या में लोगों को आइसोलेशन में रखना था. इस समय राहुल गांधी राजनीति में लगे थे. लेकिन विद्याभारती समाज की पीड़ा में साथी था. विद्या भारती ने मध्यभारत प्रांत के 16 जिलों के 80 से ज्यादा विद्यालयों को शासन की सहायता हेतु खोल दिया. विद्यालय परिसरों को उपयोग के लिए प्रशासन को सौंप दिया.

लॉकडाउन में ही देश ने एक और संकट देखा, जब लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने घरों की तरफ लौटने लगे. लोगों का समंदर सड़कों पर उतरा था, प्रियंका गांधी उस समय उत्तरप्रदेश में राजनीति की बिसातें जमा रही थीं. दूसरी तरफ सिर्फ मध्यभारत प्रान्त में विद्याभारती के लगभग 800 छात्र, 1100 स्थानों पर लोगों की सहायता के लिए तैनात थे. विद्याभारती ने अपनी बसों से प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुचाया. अपने भवनों को विश्राम गृह में बदल दिया. 82,000 से ज्यादा लोगों को भोजन करवाया, 15,000 खाने के पैकेट बांटे. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में 03 लाख रूपए से ज्यादा की सहायता प्रदान की.

जनजातीय अंचलों में पहुंचाए मास्क

विद्या भारती अपने स्कूलों में ऐसी दुनिया दिखाता है, जिसमें मानव, मानव की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहे. कोरोना काल में जब अचानक लाखों की संख्या में मास्क की आवश्यकता पड़ी तो संस्था से जुड़ी शिक्षिकाएं अपने घरों में बैठकर निर्धन असहाय नागरिकों के लिए मास्क बनाने का कार्य करने लगीं. कुछ अन्य ने मास्कों को सेवा बस्तियों में जाकर नागरिकों के मध्य वितरित करने की भूमिका अदा की. सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षक भी बस्तियों में जाकर नागरिकों के बीच कोरोना से बचाव करने के लिए जन जागरूकता अभियान चला रहे थे. विद्या भारती की शिक्षिकाओं द्वारा लाखों मास्क बनाये और वितरित किये गए.

लॉकडाउन में घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया

कोरोना वायरस के कारण जब देश भर में लॉकडाउन लगाया गया तो एक सबसे बड़ी चिंता तो सामने आई कि बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? शहरों में तो डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई शुरू हो गयी, लेकिन वनवासी, ग्रामीण अंचलों का क्या? ऐसी स्थिति में लोग जब संक्रमण के डर से अपने घरों से नहीं निकल रहे थे, तब विद्या भारती के शिक्षण संस्थानों में कार्यरत लगभग 2365 आचार्य पूरे प्रांत भर में मोहल्ला पाठशाला के माध्यम से लगभग 40,000 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे.

यही नहीं बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आए इसके लिए लगातार बच्चों के टेस्ट लिए गए और सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई प्रकार की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित करके बच्चों का सामाजिक व धार्मिक ज्ञान बढ़ाने का प्रयास किया गया.

लेकिन राहुल गांधी की आँखें उनका साथ नहीं दे रहीं, नफरत की परत इतनी मोटी हो गयी है कि उन्हें इन सेवा भावी छात्रों और आचार्य/दीदियों में उन्हें आतंकवादी दिखाई दे रहे हैं. या हो सकता है उनके परेशानी की वजह कुछ और हो, दर्द की वजह कुछ और हो. कहीं ये तो नहीं कि विद्या भारती के संस्कारों से अब मिशनरी स्कूलों का षड्यंत्र असफल हो रहा है? कहीं ये तो नहीं कि विद्या भारती के संस्कारयुक्त छात्र इनके जाल में नहीं फंस रहे?

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