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राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती जासूसी की गतिविधियाँ चिंता का विषय

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जयपुर. पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था ISI पश्चिमी राजस्थान में जासूसी नेटवर्क फैला रही है. विगत सप्ताह 2 दिनों में 2 संदिग्ध जासूस पकड़े जाने से यह आशंका बलवती हुई है. हाल ही में पकड़े गए आरोपी नवाब खान की निशानदेही पर फलसूंड इलाके से 1 अन्य युवक पकड़ में आया है. दूसरा आरोपी फतन खान बाड़मेर के शिव गांव का निवासी है. वह लगभग 10 साल पहले फलसूंड आकर रहने लगा था तथा यहाँ टायर ट्यूब की दुकान चलाता है.

इससे पहले पकड़ा गया नवाब खान (32) जैसलमेर स्थित चनेसर खान की ढाणी का निवासी है. उसकी चांधन में दुकान है. चांधन में सेना की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज है. वह लगातार सेना के मूवमेंट की जानकारी पाकिस्तान को भेज रहा था. पिछले एक वर्ष से सुरक्षा एजेंसियां नवाब पर नजर रखे हुए थीं. जासूसी गतिविधियों की पुष्टि होने पर 24 नवंबर बुधवार को उसे पकड़ा गया.

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवाब खान पाकिस्तान के रहिमयार खान इलाके की ओर अपनी रिश्तेदारी में कई बार आता-जाता रहा है. इस दौरान वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में आया. सैन्य जानकारियों के बदले नवाब के बैंक खाते में पाकिस्तान की तरफ से कई बार पैसे भेजे गए. नवाब 3 वर्षों से आईएसआई के संपर्क में था तथा फील्ड फायरिंग रेंज में होने वाली सेना की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था.

विगत कुछ वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती आपराधिक व देशविरोधी गतिविधियों के लिए आयातित मुस्लिम कट्टरता को उत्तरदायी माना जा रहा है. 2018 में बीएसएफ द्वारा एक अध्ययन किया गया. ‘Study of demographic pattern in the border area of Rajasthan & it’s security implications’ शीर्षक वाले इस अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में राजस्थानी संस्कृति सिमट रही है तथा विदेश से आयातित कट्टर इस्लामी विचारधारा का प्रभाव बढ़ा है. यहाँ बाहर से, विशेषतः उत्तरप्रदेश के देवबंद से मौलवियों का आना-जाना बढ़ गया है. वे स्थानीय मुस्लिम नागरिकों को राजस्थानी संस्कृति त्यागकर कट्टर इस्लामी रहन-सहन अपनाने की शिक्षा देते हैं. फलस्वरूप यहाँ मुस्लिम जनसंख्या में 20-25% की दर से वृद्धि हुई, जबकि अन्य (अर्थात् हिन्दू) मात्र 8 से 10% बढ़े.

इस अध्ययन से पहले भी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सीमावर्ती क्षेत्रों के आसपास बढ़ते मौलवियों के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की जाती रही है. एक समय था, जब क्षेत्र के मुस्लिम स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों, देवी-देवताओं, स्थानीय परंपराओं में विश्वास रखते थे. किंतु वर्तमान में बढ़ती कट्टरता के चलते वे अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में स्थानीय युवकों को विभिन्न प्रकार के लालच अथवा मजहब का हवाला देकर जासूसी जैसी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कर लेना कठिन नहीं रह गया है. इसी प्रकार संस्कृति से कटने का असर बढ़ती गौ तस्करी तथा गौहत्या के रूप में भी देखा जा सकता है. मार्च 2021 में जैसलमेर जिले में गौसेवा के नाम पर चलती कई गौशालाओं से गौवंश गायब मिला. इनमें से अधिकांश गौशालाएँ अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से चलाई जा रही हैं. इस प्रकार के परिदृश्य को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को भारत तथा भारतीयता से जोड़े रखने तथा आयातित कट्टरता को रोकने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव प्रयास किए जाने की आवश्यकता है.

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