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भारत प्राचीन काल से ज्ञान का देवालय रहा है – दत्तात्रेय होसबाले

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पुणे, 20 जुलाई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान का देवालय रहा है. अब युवाओं को फिर से शिक्षक बनना चाहिए और पूरी दुनिया में जाना चाहिए और पूरी दुनिया को सभ्य बनाना चाहिए.

सरकार्यवाह बुधवार को महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड करियर कोर्स (आईएमसीसी) के नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

इस अवसर पर महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एयर मार्शल (अवकाशप्राप्त) भूषण गोखले, संगठन के उपाध्यक्ष प्रदीप नाइक, सहायक सचिव सुधीर गाडे, महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष राजीव सहस्रबुद्धे, उपाध्यक्ष आनंदीताई पाटिल और उपाध्यक्ष बाबासाहेब शिंदे, आईएमसीसी के निदेशक डॉ. संतोष देशपांडे, उप निदेशक मानसी भाटे और आईएमसीसी की कॉलेज विकास समिति के अध्यक्ष धनंजय खुर्जेकर मंच पर उपस्थित थे.

सरकार्यवाह ने कहा कि मैं शिक्षा क्षेत्र के संस्थानों में जाता रहता हूं. देश-विदेश के संस्थान देखने के लिए मैं अक्सर समय निकलता हूं. इसमें आनंद मिलता है क्योंकि नया नेतृत्व देने वाले युवक युवतियां यहां से निकलते हैं. विश्व के शैक्षिक मानचित्र में पुणे का अलग स्थान है. पुणे शैक्षिक केंद्र बन चुका है. पुणे का सांस्कृतिक वायुमंडल समृद्ध है. यहां रहकर छात्र केवल डिग्रियां पाते हैं ऐसा नहीं है, बल्कि वे हर तरह से परिपूर्ण होते हैं.

उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा की परंपरा प्राचीन है. लोग विश्वभर से यहां आते रहे हैं. भारत ज्ञान का देवालय रहा है. विश्वभर के लोग यहां शिक्षक भी थे और शिक्षा भी लेते थे. भारत में शिक्षा कुछ लोगों तक सीमित थी, यह कहना विकृत इतिहास का उदाहरण है. आज नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के स्वर्णिम पड़ाव पर 130 करोड़ देशवासी खड़े हैं.

प्रबंधन शिक्षा को लेकर कहा कि भारत के शिक्षा संस्थानों से केवल नौकरी लेने वाले विद्यार्थी नहीं निकलने चाहिए. उन्हें दुनिया के विभिन्न देशों में शिक्षक बनकर जाना चाहिए और उन लोगों को भी संस्कृति सिखानी होगी. ऐसा नहीं हुआ तो कृण्वन्तो विश्वमार्यम् की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? हमारे देश में हर वर्ष साढ़े तीन लाख मैनेजमेंट ग्रेजुएट निकलते हैं. दुर्भाग्य से उनमें से केवल 15 प्रतिशत नौकरी के योग्य पाए गए हैं. मैनेजमेंट के लोगों को इस पर सोचना ही होगा. आईटी की तरह भारत मैनेजमेंट के क्षेत्र में खास जगह बना सकता है, ऐसा सामाजिक वातावरण यहां है. अपने मैनेजमेंट कौशल से एक अद्भुत विश्व हम बना सकते हैं. यहां के मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए कई अवसर उपलब्ध हैं.

संस्था के अध्यक्ष एयर मार्शल (अवकाशप्राप्त) भूषण गोखले ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है. यह सिर्फ एक युवा देश नहीं है, बल्कि आकांक्षाओं वाला एक युवा देश है. महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी उन युवाओं के सपनों को पूरी ताकत देगी.

शुभदा पटवर्धन ने सूत्र संचालन किया. जबकि डॉ. संतोष देशपांडे ने आभार प्रकट किया.

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