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समुद्री निगरानी के लिए भारत ने अमेरिका से लीज पर लिये दो ड्रोन

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नई दिल्ली. एलएसी पर चीन से तनातनी और आतंकिस्तान के ठोस इलाज के लिए भारतीय सेना निरंतर अपनी शक्ति को सुदृढ़ करने में लगी है. अमेरिका, रूस, फ्रांस और इजरायल से आधुनिक हथियार व सैन्य तकनीक लेने के साथ ही विश्वस्तरीय प्रोफेशनल नौसैन्य, वायुसेना और थल सेना के निरंतर अभ्यास भारत की तैयारी के प्रमाण हैं.

हवा, ज़मीन और पानी में शत्रु को मात देने में सक्षम भारतीय रक्षा तन्त्र नितनवीन तैयारियों को विस्तार दे रहा है. अमेरिका से समुद्री निगरानी के लिए एक वर्ष की लीज़ पर लिए गए दो ड्रोन MQ-9B सीगार्जियन अनमैन्ड एरिअल व्हीकल्स (UAV) इसी रणनीति का हिस्सा हैं.

MQ-9B UAV ड्रोन कई आधुनिक सुविधाओं से लैस है, यह 40 हजार फीट की ऊंचाई से ऑपरेट किया जा सकता है. यह ड्रोन लगातार 30 घंटे तक उड़ान भर सकता है, इसमें लगे कैमरे 5000 नॉटिकल माइल्स तक देख सकते हैं.

दो ड्रोन की मदद से भारत सैन्य बलों को इंटेलिजेंस, सर्विलांस और शत्रु की टोह लेने की क्षमता बढ़ेगी. इन ड्रोन का उत्पादन अमेरिकी कंपनी जनरल ऑटोमिक्स ने किया है.

अमेरिका से मंगवाकर इन UAV ड्रोन को तमिलनाडु स्थित राजाली नेवल एयर स्टेशन पर तैनात किया गया है. इसी स्टेशन पर इंडियन नेवी के P-8I लॉन्ग रेंज मैरिटाइम टोही विमानों को भी रखा गया है. UAV ड्रोन नवंबर माह के प्रारंभ में ही भारत आ गए थे और पिछले सप्ताह से ये काम पर भी लग गए हैं. नई रक्षा खरीद प्रणाली को स्वीकृति मिलने के पश्चात यह पहला उपकरण है, जिसे भारत ने लीज़ पर लिया है.

भारतीय नौसेना दोनों ड्रोन की मदद से हिंद महासागर के एक बड़े क्षेत्र पर नजर रख सकती है. कुछ यूएवी ऐसे भी हैं जो दुश्मनों को पहचानकर उन पर हमला भी कर सकते हैं. ये आधुनिक हथियारों से लैस हैं.

भारत ने ऐसे 30 यूएवी को तैनात करने की योजना बनाई है. इसके बाद समुद्री क्षेत्र से घुसपैठ के सारे प्रयासों को नाकाम किया जा सकेगा. अमेरिका की सहायता से इनके भारत में निर्माण की संभावना पर कार्य चल रहा है.

लीज़ पर लेने का यह अभूतपूर्व निर्णय रक्षा मंत्रालय द्वारा हथियारों और उपकरणों की खरीद पर होने वाले खर्च को कम करने के उद्देश्य से सुझाया गया था. हथियारों और उपकरणों को लीज़ पर लेने की प्रक्रिया को डिफेंस एक्वीजिशन प्रोसीजर 2020 का नाम दिया गया है.

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