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भारत अपने स्वतंत्रता सेनानियों को कभी नहीं भूलेगा – प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से ‘पदयात्रा’ (फ्रीडम मार्च) को झंडी दिखाकर रवाना किया तथा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’India@75 के पूर्वावलोकन कार्यकलापों का उद्घाटन किया. आजादी का अमृत महोत्सव स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला है. यह महोत्सव जन-उत्सव के रूप में मनाया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2022 से 75 सप्ताह पूर्व “आजादी का अमृत महोत्सव” आरंभ किए जाने की चर्चा की. उन्होंने महात्मा गांधी और महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दी.

प्रधानमंत्री ने पांच स्तंभों अर्थात स्वतंत्रता संग्राम, 75 पर विचार, 75 पर उपलब्धियां, 75 पर कार्रवाइयां तथा 75 पर संकल्प पर बल दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी अमृत महोत्सव का अर्थ स्वतंत्रता की ऊर्जा का अमृत है. स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं की प्रेरणाओं का अमृत; नए विचारों और संकल्पों का अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत.

प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल लागत के आधार पर नमक का मूल्य कभी भी नहीं आंका गया. भारतीयों के लिए नमक का अर्थ ईमानदारी, भरोसा, वफादारी, श्रम, समानता और आत्मनिर्भरता है. उस समय नमक भारत की आत्मनिर्भरता का एक प्रतीक था. ब्रिटिश सरकार ने भारत के मूल्यों के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी क्षति पहुंचाई. भारत के लोगों को इंग्लैंड से आने वाले नमक पर निर्भर रहना पड़ता था. गांधी जी ने देश के इस पुराने दर्द को समझा, लोगों की धड़कन को समझा तथा उसे एक आंदोलन में बदल दिया.

प्रधानमंत्री ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, विदेश से महात्मा गांधी के लौटने, सत्याग्रह की शक्ति का राष्ट्र को स्मरण कराने, लोकमान्य तिलक द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता का आह्वान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज का दिल्ली मार्च तथा दिल्ली चलो के नारे जैसे स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्षणों का स्मरण किया. स्वाधीनता आंदोलन की इस अलख को निरंतर जगाए रखने का काम प्रत्येक क्षेत्र में, प्रत्येक दिशा में देश के कोने-कोने में हमारे आचार्यों, संतों तथा शिक्षकों द्वारा किया गया था. इस प्रकार भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी स्वाधीनता आंदोलन के लिए मंच तैयार किया. चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, श्रीमंत शंकर देव ने राष्ट्रव्यापी स्वतंत्रता संग्राम की आधारशिला का निर्माण किया. इसी प्रकार, देश के सभी क्षेत्रों के संतों ने राष्ट्र की चेतना और स्वाधीनता संग्राम में योगदान दिया. देश भर के ऐसे कई दलित, जनजाति, महिलाएं और युवक थे, जिन्होंने अनगिनत कुर्बानियां दी हैं. तमिलनाडु के 32 वर्षीय कोडी कठा कुमारन जैसे अज्ञात नायकों की कुर्बानियों को याद किया, जिसने सिर में गोली लगने के बावजूद देश के झंडे को जमीन पर नहीं गिरने दिया. तमिलनाडु की वेलु नचियार पहली महारानी थी, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ीं.

हमारे देश के जनजातीय समाज ने विदेशी शासन को झुकाने के लिए निरंतर बहादुरी और हिम्मत के साथ लड़ाई लड़ी. झारखंड में, बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों को चुनौती दी तथा मुर्मु बंधुओं ने संथाल आंदोलन का नेतृत्व किया. ओडिशा में, चकरा बिसोई ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी तथा लक्ष्मण नायक ने गांधीवादी सिद्धांतों के जरिए जागरूकता फैलाई. उन्होंने आंधप्रदेश में मन्याम विरुडु अलुरी सीताराम राजू, जिसने राम्पा आंदोलन का नेतृत्व किया तथा पसाल्था खुंगचेरा जिसने मिजोरम की पहाड़ियों में अंग्रेजों का सामना किया, जैसे अन्य अज्ञात जनजातीय नायकों का भी नाम लिया, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उन्होंने गोमधर कोन्वार, लाचित बोरफुकन तथा सेरात सिंह जैसे असम तथा पूर्वोत्तर के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया. देश हमेशा गुजरात के जम्बुघोडा में नायक जनजातीयों के बलिदान को याद रखेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य तथा प्रत्येक क्षेत्र में इसके इतिहास को संरक्षित करने के लिए पिछले छह वर्षों से सजग प्रयास किया है. दांडी यात्रा के साथ जुड़े स्थल का पुनरुत्थान दो वर्ष पहले किया गया. उस स्थान का भी पुनरुत्थान किया जा रहा है, जहां देश की प्रथम स्वतंत्र सरकार के निर्माण के बाद नेताजी सुभाष ने अंडमान में तिरंगा फहराया था. बाबा साहेब से जुड़े स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जालियांवाला बाग में स्मारक तथा पैका आंदोलन के स्मारक का भी विकास किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की जननी भारत अभी भी लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाते हुए आगे बढ़ रहा है. भारत की उपलब्धियां समस्त मानवता को भरोसा दे रही है. भारत की विकास यात्रा आत्मनिर्भरता से भरी हुई है और यह पूरी दुनिया की विकास यात्रा को गति दे रही है.

प्रधानमंत्री ने युवाओं और विद्वानों से हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास के दस्तावेजीकरण के द्वारा देश के प्रयासों को पूरा करने की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की उपलब्धियों को विश्व के सामने प्रदर्शित करने का अनुरोध किया. उन्होंने कला, साहित्य, थियेटर की दुनिया, फिल्म उद्योग तथा डिजिटल मनोरंजन से जुड़े लोगों से उन अनूठी कहानियों, जो हमारे अतीत में बिखरी हुई हैं, की खोज करने और उन्हे सबके सामने लाने का आग्रह किया.

 

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