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भारतीय दर्शन कहता है ‘जगत भोग्य नहीं, जगत पूज्य है’

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भोपाल. मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग के आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव को एकात्म पर्व के रूप में मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत कर्नाटक शैली के प्रख्यात युवा गायक सूर्यगायत्री व राहुल वेल्लाल द्वारा आचार्य शंकर रचित स्तोत्रों के गायन से हुई. इन बाल कलाकारों ने शिवपंचाक्षर स्तोत्र, शिवाष्टकम्, गणेश पंचरत्नम और अयगिरी नंदिनी जैसे स्तोत्रों की मनमोहक प्रस्तुति दी. भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में संपन्न आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, आचार्य शंकर न्यास के न्यासी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, मार्कंडेय आश्रम ओम्कारेश्वर के स्वामी प्रणवानंद जी व स्वामी वेदतत्त्वानंदपुरी सम्मिलित हुए.

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में अद्वैत वेदांत के लोकव्यापीकरण के लिए उल्लेखनीय योगदान देने के लिए मार्कंडेय संयास आश्रम, ओमकारेश्वर के आचार्य स्वामी प्रणवानंद सरस्वती व डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के प्राध्यापक प्रोफेसर अंबिका दत्त शर्मा को सम्मानित किया गया.

मुख्य वक्ता स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ने सारस्वत उद्बोधन में कहा कि वर्तमान विश्व में अधिकांश समस्याएँ हमारे व्यक्ति केंद्रित होने के कारण उत्पन्न हुई हैं. भारतीय दर्शन सदैव सिद्धांत केंद्रित रहा है. जब विभिन्न मत मतांतरों में एकता लाने की आवश्यकता हुई तब आचार्य शंकर का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने करुणा पूर्ण रूप से सभी मतों को संस्कारित कर वैदिक दर्शन अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया. स्वामी जी ने बताया कि हिन्दू धर्म ‘वे ऑफ लाइफ’ नहीं है, बल्कि ‘विजन ऑफ ट्रुथ है’, हम सत्य के पुजारी हैं.

यह दर्शन चार पुरुषार्थों पर आधारित है, जिसमें धर्म सभी का मूल है. स्वामी जी ने कहा कि धर्म का अर्थ रिलीजन नहीं होता है. रिलिजन आस्था विशेष को कहते हैं और धर्म कर्तव्य विशेष को कहते हैं. यदि मोक्ष साध्य है तो धर्म साधन है. आचार्य के योगदान को रेखांकित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि शंकर ने सर्वसमावेशी दर्शन दिया. सभी तीर्थों में आचार्य शंकर की स्मृतियां हैं, सभी देवी देवताओं पर उन्होंने स्तोत्र लिखे. भारतीय दर्शन कहता है कि ‘जगत भोग्य नहीं, जगत पूज्य है’ और हमें उपभोक्तावाद की संस्कृति से आत्मवत् सर्वभूतेषु के विचार की ओर अग्रसर होना होगा. अंत में स्वामी जी ने ओम्कारेश्वर प्रकल्प के महत्व को बताते हुए कहा कि यह प्रकल्प आधुनिक युग का नालंदा सिद्ध होगा.

विशिष्ट अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि से चलकर यहाँ आया हूँ. उनकी दीक्षाभूमि से मुझे आमंत्रण मिला यह मेरा सौभाग्य है. वेदांत दर्शन एक वैश्विक दर्शन है जो मानव मात्र के लिए उपयोगी है. सनातन दर्शन ने यह कहा कि मानव दिव्य है और दिव्यता का प्रकटीकरण हमारे जीवन में होना चाहिए. संतों के योगदान पर कहा यह संत ही हैं, जिन्होंने नैसर्गिक सिद्धांतों को खोजा और इस भूमि की धुरी को टिका कर रखा. मानव जीवन का उद्देश्य ही ज्ञान की प्राप्ति है. सनातन दर्शन ही ऐसा एक दर्शन है, जिसने देवों का मानवीकरण और मानव का दैवीकरण किया. आचार्य शंकर ने भारत की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए और उन चारों मठों को चार वेदों से चार महावाक्य दिए जो कहते हैं कि जीव दिव्य चैतन्य है. आचार्य शंकर के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का अधिकार है कि इसे विश्व गुरु होना ही चाहिए. भारत ज्ञान और विज्ञान की परंपरा के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता है और ओमकारेश्वर प्रकल्प इसी दिशा में एक सराहनीय पहल है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सभी एक ही चेतना के अंश हैं. पशु पक्षी, जीव जंतु, पेड़ पौधे सभी में एक ही चेतना विद्यमान है. सनातन दर्शन में साकार उपासक, निराकार उपासक, आस्तिक, नास्तिक विभिन्न विचारों को स्वीकार किया गया. भौतिकता की अग्नि में दग्ध मानवता को शाश्वत शांति का संदेश यदि कोई दे सकता है तो केवल अद्वैत वेदांत दर्शन दे सकता है. आपने ओमकारेश्वर प्रकल्प के विषय में सभी को अवगत कराया.

 

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