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भारत चीन युद्ध – जब संतों ने देशहितार्थ खोल दिया था खजाना

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मुंबई स्थित संन्यास आश्रम में 400 वर्ष पुराने सूरतगिरि बंगला, हरिद्वार के एकादश पीठाधीश्वर श्री विश्वेश्वरानंद गिरि जी महाराज का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया. श्री महाराज जी के संन्यस्त जीवन का यह स्वर्ण जयंती वर्ष है. श्री महाराज जी को हाल ही में श्रीमाता वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट-जम्मू का ट्रस्टी नियुक्त किया गया है. इसी उपलक्ष्य में आनंद महोत्सव समिति की ओर से आचार्य पवन त्रिपाठी के नेतृत्व में श्री महाराज जी का संतों-महात्माओं तथा अन्य मान्यवरों की उपस्थिति में विशेष सत्कार समारोह आयोजित किया गया.

समारोह में महामंडेलश्वर श्री स्वामी अभेदानंद गिरि जी महाराज, महामंडेलश्वर श्री स्वामी शंकरानंद सरस्वती जी महाराज, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्रीधराचार्य जी महाराज, महामंडेलश्वर श्री स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी महाराज और श्री स्वामी परमात्मानंद सरस्वती जी महाराज तथा अन्य मान्यवर उपस्थित थे.

‘हमने श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन देखा है और उसका शिखर भी देखेंगे’

श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि मैं तो केवल प्रतीक हूं. इस आश्रम की परंपरा चार सौ साल पुरानी है जो उससे भी बहुत पहले वेदव्यास तक जाती है, जिस प्रकार एक पत्ता मंदिर में पहुंच जाने पर सम्मान पाता है. उसी प्रकार मैं भी हूं. यदि संस्कृति अपने धर्म का पालन नहीं कर पाती तो देश समाप्त हो जाता है. हमारे देश पर इतने हमले हुए, पर संत परंपरा ने उसे बचाने में योगदान दिया. हम लोग भाग्यशाली हैं कि हमने श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन देखा है और उसका शिखर भी देखेंगे. श्री महाराज जी ने कहा कि शीघ्र ही जम्मू स्थित बाणगंगा से लेकर वैष्णोदेवी तक रोपवे बन जाएगा.

भारत-चीन युद्ध में संतों का सहयोग

एक जानकारी यह भी मिली कि जब भारत चीन का युद्ध चल रहा था, उस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आह्वान पर देश की जनता ने प्रधानमंत्री राहत कोष में धन, स्वर्ण व रजत आदि जमा करना शुरू कर दिया. जब यह बात संत समाज को पता चली तो संतों ने भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार प्रधानमंत्री कोष में योगदान दिया. मुंबई स्थित संन्यास आश्रम के माध्यम से कई किलो सोना और चांदी प्रधानमंत्री कोष में दान किया गया. उस समय संत समाज ने भगवान की मूर्तियों को स्वर्ण अलंकार से सुशोभित करने से ज्यादा महत्व मां भारती की रक्षा को दिया और इसे सिद्ध भी कर दिया कि राष्ट्र की आन, बान और शान की रक्षा के लिए संत समाज सदैव अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार है.

कार्यक्रम में प्रतिभावान गायक सूर्या दुबे ने अपने भक्ति गीतों से श्रोताओं को सराबोर कर दिया.

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