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राम वन गमन पथ पर लगेंगे शिलालेख, 290 स्थान चिंहित

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गुड़गांव. श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान और श्री अशोक सिंघल फाउंडेशन ने पूरे राम वन गमन मार्ग पर शिलालेख लगाने का निर्णय लिया है. शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राम अवतार शर्मा ने 40 वर्षों के शोध के बाद 290 स्थान चिन्हित किए हैं, प्रभु श्री राम 14 वर्ष के वनवास के दौरान इन स्थानों पर गए थे. ये स्थान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल सहित आठ राज्यों में स्थित हैं.

डॉ. राम अवतार शर्मा ने बताया कि इनमें से बहुत से स्थल ऐसे हैं, जो उपेक्षित पड़े हैं और केवल चुनिंदा स्थानीय निवासियों को ही उनके बारे में जानकारी है. अब इन स्थलों का महत्व बताते हुए वहां पर शिलालेख लगाए जाएंगे.

श्री अशोक सिंघल फाउंडेशन के अध्यक्ष महेश भागचंदका के अनुसार श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण में अशोक सिंघल का अद्वितीय योगदान है. अशोक सिंघल प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त थे और उनसे जुड़े सभी स्थानों का पुनरुद्धार करने के पक्षधर थे. अशोक सिंघल की इसी भावना को देखते हुए अशोक सिंघल फाउंडेशन ने श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान के साथ मिलकर संयुक्त रूप से राम वन गमन मार्ग के सभी स्थानों पर शिलालेख लगाने का संकल्प लिया है.

महेश भागचन्दका ने बताया कि शिलालेख चार भाषाओं में होंगे. इनकी स्थापना से सालों तक राम भक्तों को प्रेरणा मिलती रहेगी. श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान और श्री अशोक सिंघल फाउंडेशन के बीच इन शिलालेखों की स्थापना को लेकर एक अनुबंध हुआ है. संस्था के उप-प्रधान अतुल सिंघल और महासचिव जगदीश राय गोयल ने बताया कि कार्य में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य सरकारों का भी सहयोग लिया जाएगा. शिलालेख लगने से ना केवल प्रभु श्रीराम के वन गमन के बारे में श्रद्धालुओं को पूरी जानकारी मिलेगी, बल्कि इनसे सनातन संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. दोनों संस्थाओं के मध्य इस अनुबंध पत्र हस्ताक्षर के समय में जय पारीक और संजय कौल भी मौजूद रहे.

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