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जयपुर – हाजी रफअत अली के जनाजे में उमड़ी भीड़ की सुरक्षा में तैनात रही पुलिस, नियमों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं

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बूंदी में बेटी की शादी में कुछ अधिक मेहमान आने पर परिवार पर लगाया था एक लाख जुर्माना

जयपुर. सेकुलरिज्म व वोट बैंक की चिंता में रत राजस्थान की गहलोत सरकार का दोहरा चरित्र फिर सबके सामने है. वोट बैंक की राजनीति में कोरोना गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाना सीखना हो तो राजस्थान की गहलोत सरकार से सीखा जा सकता है.

अप्रैल में प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर के जनाजे में भी कोरोना गाइडलाइंस को धत्ता बताते हुए 10,000 से अधिक की भीड़ शामिल हुई थी. इसमें स्वयं सालेह मोहम्मद भी शामिल हुए, जबकि मात्र 4 दिन पहले ही वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे.

अब, दूसरी परिस्थिति में उदाहरण उन्हीं दिनों धौलपुर में सुखराम खोली ने हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखंड रामायण का पाठ कराया. इसमें 500 से अधिक लोग जुट गए. इस पर सीएम ने एक बैठक में वहां के DM-SP को सबके सामने फटकार लगा डाली. उन्होंने मुख्य सचिव को भी आदेश दिया कि वे इस मामले का स्पष्टीकरण स्थानीय प्रशासन से तलब करें.

उस समय कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन कराने को लेकर राजस्थान सरकार की दोहरे रवैये के कारण खूब फजीहत हुई थी. लेकिन, वोट बैंक के लिए दिल है कि मानता नहीं….!!

अब एक बार फिर सोमवार को जयपुर के रामगंज में कोरोना गाइडलाइंस की जमकर धज्जियां उड़ीं. रामगंज निवासी हाजी रफअत अली खान की मृत्यु पर उनके जनाजे में हजारों की भीड़ शामिल हुई और पुलिस इस भीड़ को रोकने की जिम्मेदारी भूल, जनाजे को सुरक्षा देने में लगी रही. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खान की अंतिम यात्रा में लोगों के साथ ही सौ से अधिक पुलिस के जवान, डीसीपी, रामगंज व सुभाष चौक थाना प्रभारी भी मौजूद थे.

बूंदी जिले के कापरेन नगरपालिका क्षेत्र के अड़ीला गांव में 14 मई, आखातीज पर पुत्री की शादी के दौरान गाइडलाइन के विपरीत कुछ अधिक लोग मिलने पर प्रशासन ने बृजमोहन मीणा पर एक लाख रुपये का चालान कर दिया था. बृजमोहन मीणा ने प्रशासन के दबाव के चलते 17 मई को चालान की राशि जमा करवाई और 20 मई को मीणा की सदमे से मौत हो गई.

परिजनों व कुछ ग्रामीणों के साथ थाने पहुंची मृतक बृजमोहन मीणा की पत्नी पांची बाई द्वारा कहा गया कि, “14 मई, 2021 को मेरी छोटी पुत्री इन्द्रा बाई की शादी कोरोना गाईडलाइन के अनुसार हो रही थी. जिसमें कोरोना से बचाव के सभी नियमों का पालन किया जा रहा था.

इन घटनाओं के बाद यदि कोई कांग्रेस सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाता है तो उसे साम्प्रदायिक करार दे दिया जाता है. जबकि, इन उदाहरणों से कांग्रेस की साम्प्रदायिक राजनीति स्पष्ट दिखती है.

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