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जयपुर – जलप्रलय के बाद सेवा कार्यों में जुटे स्वयंसेवक 

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जयपुर (विसंकें).कोरोना काल में प्रवासी श्रमिकों, वंचित व अभावग्रस्त लोगों के लिए सेवा कार्य हो या फिर संक्रमण से बचाने के लिए सेवा बस्तियों में दवा वितरण. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने हमेशा समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है. जयपुर में 14 अगस्त को मूसलाधार बरसात से बस्तियों व निचले क्षेत्रों में मिट्टी और जलभराव से लोगों का जीवन संकट में आ गया. लोगों को कष्ट में देख संघ के स्वयंसेवक स्वतःस्फूर्त आगे आए और सेवा कार्यों में जुट गए.

पानी के तेज बहाव और कटाव के कारण लाल डूंगरी क्षेत्र की गणेशपुरी कच्ची बस्ती के घरों में 6 से 8 फीट मिट्टी जमा हो गई. दर्जनों वाहन मिट्टी में दब गए. मिट्टी के जमा होने से घरों में जाना ही कठिन हो गया. बस्ती के लोगों के आसन्न संकट को देख संघ के स्वयंसेवक तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किए. लोगों के लिए भोजन का प्रबंध किया.

गणेशपुरी बस्ती में अभावग्रस्त व वंचित श्रेणी के कई परिवार रहते हैं. जिनको ना तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा और ना ही वे एक-दूसरे का सहयोग करने की स्थिति में हैं. ऐसे में जब बारिश विपत्ति बनकर आए तो इन लोगों के पास ना तो खाने के लिए भोजन होता है, ना ही पहनने के लिए कपड़े होते हैं.

सेवा कार्य में लगे स्वयंसेवक राकेश खंडेलवाल बताते हैं “जो दृश्य हमने यहां देखा, उसे देखते ही हम सभी का ह्रदय रो पड़ा. चारों और महिलाओं और बच्चों का रूदन था. उनके पास न तो खाने को अन्न था और न ही पहनने को कपड़े. बारिश में जैसे-तैसे घरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लेकर अपना जीवन बचाया. मिट्टी इतनी मात्रा में आ चुकी थी कि सभी लोग जमीन से 6 फीट ऊपर चल रहे थे.”

संघ के स्वयंसेवकों ने अथक प्रयास करते हुए बस्ती में सेवा कार्य किए. स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर कई घरों के अंदर भर चुकी करीब 5-6 फीट मिट्टी को बाहर निकलवाया. जब स्वयंसेवकों को पता लगा कि महिलाओं और बच्चों के पास पहनने को कपड़े तक नहीं हैं और वे सभी उन्हीं कपड़ों में हैं जो कल बारिश के समय भीग गए थे, तो स्वयंसेवकों ने कपड़े एकत्रित कर लोगों को दिए. सुबह-शाम लोगों को भोजन कराया गया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर महानगर के सह प्रौढ़ कार्यवाह राजकुमार गुप्ता ने बताया कि बारिश रुकने के बाद शाम 5.45 बजे स्वयंसेवकों को एकत्रित कर श्रमदान व सेवा कार्यों के बारे में निर्देश दिए. बस्ती की स्थिति सुनने के बाद मात्र आधे घंटे में स्वयंसेवकों ने बस्ती के लोगों के लिए भोजन बनाकर एकत्रित कर लिया. क्षेत्र में लोगों को सबसे अधिक आवश्यकता भोजन, पानी, और कपड़ों की थी. जीवनयापन के सारे साधन खत्म हो चुके थे.

स्थानीय निवासी गणेश खींची ने बताया कि संघ के कार्यकर्ताओं ने जिस जोश और स्फूर्ति से बस्ती में काम किया वो उल्लेखनीय है. समाज के लिए हमेशा तत्पर खड़े रहने वाले संघ और उसके कार्यकर्ताओं के कारण आज कई लोग अच्छी जिदंगी जी पा रहे हैं. समाज में सेवा देना कोई सेवा कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है.

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