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विकास की राह पर जम्मू कश्मीर – जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून को स्वीकृति, 12 लाख टन सेब की खरीद को भी मंत्रिमंडल की हां

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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम 1989 (Jammu and Kashmir Panchayati Raj Act 1989) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति प्रदान कर दी. इससे जम्‍मू-कश्‍मीर में देश के अन्य हिस्सों की तरह तीन स्तरीय लोकतंत्र की स्थापना होगी.

इसके अलावा केंद्र सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत साल 2020-21 के लिए जम्मू-कश्मीर में सेब की खरीद का फैसला किया है. बुधवार को मंत्रिमंडल बैठक में प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई. नेफेड राज्य एजेंसियों के सहयोग से सेब की खरीद करेगा. सेब की कीमत का हस्तान्तरण सीधे किसानों-बागवानों के बैंक खातों में किया जाएगा. मंत्रिमंडल ने चालू वर्ष में राज्‍य से 12 लाख टन सेब के खरीद को मंजूरी दी है.

केंद्र सरकार ने नेफेड को 2500 करोड़ रुपये के गारंटी कोष का उपयोग करने को भी स्वीकृति प्रदान की. यदि कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार और प्रदेश आधी-आधी राशि वहन करेंगे. जम्‍मू-कश्‍मीर प्रशासन सेब की खरीद के लिए मंडियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा. उक्‍त खरीद प्रणाली की लगातार निगरानी भी की जाएगी.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जनकल्याण के अनेक कानून भारत में होकर भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होते थे. आज उस निर्णय पर मुहर लगी और अब जिला विकास परिषद के सीधे चुनाव होकर जनप्रतिनिधियों के हाथ में सत्ता आएगी. ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और अब जिला पंचायत… ऐसी त्रिस्तरीय रचनाएं हैं जो पंचायत राज के कानून में निहित हैं, उन्‍हें कश्मीर में लागू करने को लेकर फैसला किया गया है.

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद भारत के अनेक जन कल्याण के कानून वहां लागू होना शुरू हो गए हैं. जन कल्याण के अनेक कानून भारत में होकर भी लागू नहीं होते थे. अब जिला विकास परिषद के सीधे चुनाव होकर जन प्रतिनिधियों के हाथ में सत्ता आएगी.

जम्मू और कश्मीर के लोग इस बदलाव का स्वागत करेंगे. कश्मीर का एक दुख था कि सत्ता जनता के पास नहीं चंद लोगों के पास थी.

इस बीच जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने केंद्र शासित प्रदेश में युवाओं को कट्टरपंथ के रास्ते पर जाने से रोकने के लिए व्यापक उपायों को आजमाने का समर्थन किया है. हजारों मील दूर से आतंकी तत्व दुष्प्रचार के मध्‍यम से समाज के एक बड़े वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. कट्टरपंथ रोकने के उपायों के तहत एक समन्वित, समुदाय समर्थित मंच होना चाहिए ताकि आतंकवाद के खिलाफ सही विचारों का प्रचार किया जा सके.

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