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कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद पी. विजयन ने ईद के लिए लॉकडाउन में ढील दी

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नई दिल्ली. वर्तमान कोरोना संकट को देखते हुए कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है. उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले भी चिंताजनक स्थिति में नहीं है. इसके विपरीत केरल की सेकुलर सरकार है. केरल में लगातार कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हो रही है. इसके बावजूद पिनराई विजयन सरकार ने 21 जुलाई को पड़ने वाली बकरीद को देखते हुए तीन दिनों के लिए लॉकडाउन प्रतिबंधों को हटा दिया है. देश में 4.25 लाख सक्रिय कोविड-19 मामलों में से केरल में 1.25 लाख हैं. देश के दैनिक मामलों में राज्य की हिस्सेदारी लगातार 35 प्रतिशत के आसपास है.

केरल में 18, 19 और 20 जुलाई को अनेक क्षेत्रों में लॉकडाउन में ढील देने के राज्य सरकार के आदेश को लेकर चिकित्सकों की संस्था आईएमए ने एतराज जताया है. केरल सरकार के निर्णय पर आईएमए ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए इसे चिकित्सा आपातकाल के समय अनुचित बताया. आईएमए ने कहा, “जब जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे कई उत्तरी राज्यों ने सार्वजनिक सुरक्षा, पारंपरिक और तीर्थ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल ने भीड़ को बढ़ावा देने वाले निर्णय लिए हैं.”

केरल की पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने बकरीद के अवसर पर, ए, बी, और सी दर्जे के क्षेत्रों में ‘जरूरी सामान’ बेचने वाली दुकानों को सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी है. प्रतिबंधों में छूट के तहत कपड़ा, जूते-चप्पल, आभूषण, घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों के साथ सभी प्रकार की मरम्मत की दुकानें भी खुली रहेंगी.

मुस्लिम तुष्टीकरण के कारण केरल सरकार ने बकरीद से पहले कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को अनदेखा करते हुए ढील देने की घोषणा कर दी. लेकिन इस पर तमाम राजनीतिक दलों सहित आईएमए ने कड़ी टिप्पणी की  है. केरल सरकार से अपील की है कि कोविड पाबंदियों में ढील देने का आदेश वापस लें.

आईएमए ने पत्र में कहा, ‘आईएमए को यह देखकर अफसोस हुआ है कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केरल सरकार बकरीद के मजहबी समारोह की आड़ में राज्य में लॉकडाउन में ढील देने का आदेश जारी किया है. ऐसा करना मेडिकल आपातकाल के आज के समय में अनावश्यक और अनुचित है.’

आईएमए का कहना है कि देश के व्यापक हित और मानवता के हित में हम मांग करते हैं कि इस आदेश को वापस लिया जाए. कोविड मानदंडों के उल्लंघन को बिल्कुल भी बर्दाश्त न किया जाए.

 

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