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धार में डीलिस्टिंग को लेकर महारैली का आयोजन

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धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का लाभ नहीं देने पर एकजुट जनजाति समाज

डीलिस्टिंग यानि हिन्दू धर्म को छोड़ अन्य धर्म अपना चुके लोगों को आरक्षण से वंचित किया जाए, जनजाति सुरक्षा मंच ने किया रैली का आयोजन

धार. डीलिस्टिंग को लेकर ऐतिहासिक महारैली का आयोजन किया गया. जनजाति अंचल के भाई-बहनों ने अपने अधिकार और धर्मांतरण के खिलाफ एकजुटता के साथ रैली निकाली. आंदोलन से जुड़े पदाधिकारी और अंचल के नेता बड़ी संख्या में शामिल हुए. शहर के प्रमुख मार्गों पर महारैली के स्वागत के लिए समाजजनों एवं शहर वासियों ने विशेष इंतजाम किए थे. जगह-जगह पानी, शीतल पेय का इंतजाम किया गया था. समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सुमधुर संगीत के साथ महारैली में शामिल हुए.

डीलिस्टिंग को लेकर क्षेत्र में बहुत बड़ा आंदोलन चल रहा है. डीलिस्टिंग से तात्पर्य है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग, कतिपय विधर्मी लोग जिनका धर्म परिवर्तन लालच देकर या अन्य प्रलोभन से करते हैं. ऐसे मतांतरित लोगों को डीलिस्ट किया जाए, जिससे वे आरक्षण के लाभ से दूर हों. साथ ही अपने धर्म में स्थित अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को आरक्षण का समुचित लाभ मिल सके.

10% धर्मांतरित व्यक्तियों ने  80% आरक्षण व सुविधाओं का लाभ उठाया

महारैली के दौरान मुख्य वक्ता व जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हासदा ने कहा कि यह आंदोलन 50 वर्ष पूर्व डॉक्टर कार्तिक उरांव द्वारा चलाया गया था. जनजाति समाज, अपनी रीति रिवाज परंपराएं छोड़ चुके व्यक्तियों को जनजाति सूची से बाहर करना है. ऐसा कानून संसद में बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है. पंचायत से लेकर संसद तक अभियान को चलाया जाएगा. यह आंदोलन उन लोगों के खिलाफ है जो हमारी आस्था, परंपरा, रीति रिवाज, संस्कृति का त्याग कर चुके हैं. ऐसे लोगों ने हमारे आरक्षण का, हमारी सुविधाओं का लाभ उठाया है. आरक्षण का लाभ अब इन लोगों को नहीं लेने देंगे. 10% धर्मांतरित व्यक्तियों ने 80% आरक्षण व सुविधाओं का लाभ उठाया है. जो वास्तव में जनजाति समाज का हक  था. ये अब नहीं चलेगा.

मुख्य वक्ता के रूप में मंच पर जनजाति सुरक्षा मंच के डॉ. राजकिशोर हसदा विशेष रूप से उपस्थित रहे. मंच पर जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सूर्य नारायण सूरी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़   संयोजक कालू सिंह मुजाल्दा, प्रदेश संयोजक कैलाश निनामा, तथा क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित रहे. रामप्रकाश मच्छार ने कहा कि आज का समय अनुसूचित जनजाति के लोगों की रक्षा का समय है. सुरक्षा मंच का उद्देश्य है, वह पूरा करने के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा. कार्यक्रम का शुभारंभ मां शबरी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ. कैलाश झाबा और उनके दल ने नृत्य की प्रस्तुति दी.

नगर के प्रमुख मार्गों से महारैली निकली. जगह-जगह इसका स्वागत किया गया. पूरे शहर में भ्रमण के बाद यह रैली पुनः किला मैदान पहुंची. यहां इसका समापन हुआ. महारैली में 10 नृत्य दल शामिल हुए.

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