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अपने बच्चों को प्रताप-शिवा बनाएं – प्रमिला शर्मा

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जयपुर. समाज में सभी प्रकार की कुरीतियों को दूर करने हेतु बालिका शिक्षा अत्यंत आवश्यक है. विद्या भारती बालिका शिक्षा की अखिल भारतीय सह संयोजिका प्रमिला शर्मा ने सोमवार को माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर में “राष्ट्र निर्माण में मां की भूमिका” विषय पर आयोजित मातृ सम्मेलन में संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बालक की प्रथम गुरु मां ही होती है. वह मां ही होती है जो बालक को प्रताप और शिवा बना सकती है. उन्होंने माताओं से बच्चों को भारतीय सनातन संस्कृति के संस्कारों का धनी बनाने का आह्वान किया. आदर्श विद्या मंदिर में प्रारंभ से ही शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए 12 आयामों के द्वारा अध्ययन कराया जाता है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महामंत्री विजय कुमार शर्मा ने कहा कि बालक के सर्वांगीण विकास के लिए विद्या मंदिर में जो प्रयास किए जाते हैं, वह सराहनीय हैं.

राष्ट्र निर्माण के लिए शिवाजी, महाराणा प्रताप, झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई जैसे राष्ट्रीय सपूतों का निर्माण एक माता की गोद में ही संभव हो सकता है.

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि किरण यादव ने यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता श्लोक द्वारा समाज में नारी के महत्व को बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगीता गुप्ता ने प्रथम गुरु मां के महत्व को स्पष्ट किया. कार्यक्रम में सुरपुर बोराज धाम के बाल व्यास महाराज का आशीर्वचन प्राप्त हुआ. महाराजश्री ने बताया कि मां सीता, मां सावित्री के त्याग और समर्पण ने नारी को पूजनीय बनाया. विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. महावीर सिंह बलवदा ने मातृशक्ति को विश्वास दिलाया कि विद्यालय की सुविधाओं का विस्तार एवं प्रबंधन शिशु को केंद्र मानकर किया जाता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार अनुभवजन्य शिक्षण पर पूर्व से ही बल दिया जा रहा है और इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा.

मातृशक्ति के कार्यक्रम में समाज में विशिष्ट कार्य जैसे पर्यावरण संरक्षण, योग के प्रचार प्रसार, बालिका संस्कार, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाजिक जागरण के लिए कार्य करने वाली 10 महिलाओं को भी सम्मानित किया गया एवं विद्यालय की प्रतिभावान 11 पूर्व छात्रों को विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया.

 

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