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दूध स्पेशल – किसान रेल के पश्चात दूध स्पेशल दुग्ध उत्पादकों के लिए वरदान, प्रतिदिन आंध्रप्रदेश से दिल्ली पहुंच रहा दूध

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नई दिल्ली. किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने की दृष्टि से भारतीय रेलवे द्वारा प्रारंभ की गई किसान रेल अहम भूमिका निभा रही है. किसान स्पेशल ट्रेन देशभर में विक्रेता और ग्राहक को नजदीक लाने में मददगार बन रही है. कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के दौरान सुदूर क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के साथ-साथ विभिन्न राज्यों से फलों व सब्जियों की ढुलाई कर रही रेलवे ने दिल्ली को अब तक तीन करोड़ लीटर दूध भी उपलब्ध करवाया है.

दूध दूरंतो ट्रेन (दूध स्पेशल) दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए कामधेनु बनकर उभर रही है, ट्रेन के माध्यम से दिल्ली में प्रतिदिन ढाई लाख लीटर दूध पहुंच रहा है.

लॉकडाउन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति बनाए रखने का दायित्व भारतीय रेलवे ने बखूबी निभाया. उत्तरी क्षेत्र में दूध की मांग को पूरा करने में दक्षिणी राज्यों की भूमिका अहम रही, जिसमें सेतु का काम नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड ने (एनडीडीबी) किया. यह सिलसिला अब भी जारी है, जिससे रोजाना ढाई लाख लाख लीटर से अधिक की आपूर्ति दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर पहुंच रही है. एनडीडीबी के आंकड़ों के अनुसार दूध दूरंतो ट्रेन से अब तक तीन करोड़ लीटर से अधिक दूध दिल्ली पहुंचाया जा चुका है.

दूध दूरंतो स्पेशल ट्रेन आंध्रप्रदेश के रेनिगुंटा रेलवे जंक्शन से हजरत निजामुद्दीन के बीच 2,300 किमी की दूरी 36 घंटे में पूरी करती है. इसकी शुरुआत 26 मार्च से सप्ताह में एक या दो दिन के लिए हुई थी. लेकिन डेयरी से जुड़े लोगों में इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि अब यह ट्रेन 15 जुलाई से प्रतिदिन चलाई जा रही है. रेलवे के अनुसार दूध दूरंतो स्पेशल में सामान्य रूप से दूध से भरे छह टैंकर लगाए जाते हैं. प्रत्येक टैंकर में 40 हजार लीटर से अधिक दूध होता है. दूध दूरंतो स्पेशल के अब तक कुल 126 फेरे लग चुके है.

भारतीय रेलवे के अनुसार दूध दूरंतो ट्रेन के साथ अन्य पार्सल वैन के माध्यम से कुछ और कच्ची जिंसों की आपूर्ति भी की जा रही है. इन दूरंतो ट्रेनों में अतिरिक्त पार्सल वैन भी लगाए जा रहे हैं. रेलवे अब पूरी तरह व्यावयायिक संस्था के रूप में काम कर रहा है. मांग आने पर देश के दूसरे हिस्से से अन्य जिंसों की आपूर्ति भी शुरू की जाएगी. किसान ट्रेनों का प्रयोग बहुत सफल साबित हुआ है, जिसका लगातार विस्तार किया जाएगा. इस ट्रेन के संचालन से रेलवे को भाड़े के रूप में तकरीबन 15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है.

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