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सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना, यही हमारी संस्कृति है – डॉ. मनमोहन वैद्य

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रोहतक (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि हरियाणा के युवकों के लिए कृषि लघु प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता है. जिससे कृषि के नवाचारी शोधों का उपयोग किसान के विकास के लिए हो सके. डॉ. वैद्य शुक्रवार को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद् एवं स्वदेशी स्वावलम्बन न्यास द्वारा आयोजित वेबिनार के प्रथम सत्र में सम्बोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि भारत की सम्पन्नता के बारे में दुनिया जानती है. भारत के लोग विदेशों में व्यापार करने के लिए गए लेकिन भारत के लोगों ने कभी भी किसी की जमीन पर कब्जा नहीं किया, न किसी का शोषण किया. हरियाणा की 85 प्रतिशत जमीन खेती करने लायक है. लेकिन यहां सबसे बड़ी परेशानी यह है कि खेती करने वाले ज्यादातर लोगों को उत्तम खेती का अनुभव नहीं है. यहां युवा एग्रीकल्चर में डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन डिग्री हासिल करने के बाद वो खेती करने की बजाय नौकरी को प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब ने खेती में सम्पन्नता तो हासिल की लेकिन अत्याधिक पेस्टीसाइट के प्रयोग से कैंसर जैसी बीमारी को भी निमंत्रण दे दिया. फिर ऐसी सम्पन्नता किस काम की. इसलिए युवाओं का रुझान खेती की तरफ बढ़ाने के लिए युवाओं के लिए खेती-बाड़ी के प्रशिक्षण की व्यवस्था की आवश्यकता है. युवाओं को ऑर्गेनिक खेती के महत्व के बारे में जागरुक करने की आवश्यकता है. ताकि युवा जमीन की उपजाऊ शक्ति के अनुसार वहां आर्गेनिक खेती कर सकें और पानी के महत्व को समझ कर पानी की बर्बादी को रोकने में अपनी भूमिका निभा सकें.

उन्होंने न्यूजीलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि न्यूजीलैंड में जर्सी व होस्टन गाय के दूध का प्रयोग अधिक होता था. इसके चलते वहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती चली गई क्योंकि इन गायों का दूध इतना पौष्टिक नहीं होता. इसके बाद न्यूजीलैंड द्वारा भारत के गुजरात से गिर नस्ल की गायों को वहां ले जाया गया. क्योंकि हमारी गिर व देशी गायों के दूध में ए-2 होता है और आज ए-2 दूध की बिक्री बड़ी तेजी से बढ़ रही है क्योंकि यह दूध पौष्टिक है. उन्होंने कहा कि अगर कृषक अपनी पूरी जमीन पर आर्गेनिक खेती नहीं कर सकते तो पहले एक तिहाई से शुरुआत करके देखें. धीरे-धीरे जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और हमें जहरमुक्त भोजन भी प्राप्त हो सकेगा. आर्गेनिक खेती के साथ-साथ आमदनी बढ़ाने के लिए किसान औषधियों व वनस्पति की खेती भी कर सकते हैं. इससे किसान की आमदनी बढ़ेगी.

डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि आज इंटरनेट का दौर है, इसलिए किसान भी ऑनलाइन बाजार का उपयोग कर देशभर में अपनी फसलों को अच्छे दामों में बेच कर मुनाफा कमा सकते हैं. क्योंकि ऑनलाइन फसल की बिक्री शुरु होने से कोल्ड स्टोर का निर्माण होगा, ट्रांसपोर्ट का काम बढ़ेगा, आईटी विभाग में रोजगार बढ़ेगा. युवाओं को नौकरी की बजाय स्वरोजगार की तरफ अपना रुझान करना चाहिए. इसके लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए तथा अधिक से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन हो. उत्पादन की बिक्री में वृद्धि करने के लिए उत्पादन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी डिजाइनिंग की तरफ भी विशेष ध्यान देना चाहिए. यदि डिजाइन आकर्षक होगा तो उत्पाद की बिक्री बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जाए. केवल मुझे ही आगे बढ़ना है, यह पाश्चात्य संस्कृति का विचार है. हमें सभी को साथ लेकर चलना है. अपने साथ-साथ सभी को आगे बढ़ाना है, यही हमारी संस्कृति है. हरियाणा में टूरिज्म के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं. इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि यहां आने वाले टूरिस्ट यहां से अच्छी जानकारी व संस्कार लेकर जाएं ताकि दूसरे प्रदेशों व देशों में भी हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिल सके. परिषद के अध्यक्ष प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हमें अपने युवाओं को चुनौतीपूर्ण वातावरण देना चाहिए, जिससे वे नवाचार व अविष्कार के अभ्यासी बनें.

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