मुंबई पुलिस ने करिश्मा भोंसले की मां को भेजा आईपीसी सेक्शन 149 का नोटिस…!!! Reviewed by Momizat on . मुंबई. अजान के दौरान मस्जिद में ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजते हैं. अनेक जगह पर इसके कारण वृद्ध व्यक्ति, मरीजों को परेशानी होती है. पर, कोई आवाज नहीं उठाता. अगर मुंबई. अजान के दौरान मस्जिद में ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजते हैं. अनेक जगह पर इसके कारण वृद्ध व्यक्ति, मरीजों को परेशानी होती है. पर, कोई आवाज नहीं उठाता. अगर Rating: 0
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    मुंबई पुलिस ने करिश्मा भोंसले की मां को भेजा आईपीसी सेक्शन 149 का नोटिस…!!!

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    मुंबई. अजान के दौरान मस्जिद में ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजते हैं. अनेक जगह पर इसके कारण वृद्ध व्यक्ति, मरीजों को परेशानी होती है. पर, कोई आवाज नहीं उठाता. अगर कोई ऐसा करता है तो उसे ही धमकाया जाता है. हालांकि, देश में न्यायालय अपने निर्णय में कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि अजान के लिए लाउड स्पीकर अनिवार्य नहीं है, दूसरा सर्वोच्च न्यायालय ने ध्वनि प्रदूषण रोकने को लेकर निर्देश जारी किये गए हैं. लेकिन, मुंबई में करिश्मा भोंसले के साथ जो हुआ वो हैरान करने वाला है.

    घटना 24 जून की है, अजान के समय लाउडस्पीकर की अत्यधिक आवाज को लेकर मानखुर्द क्षेत्र में करिश्मा भोंसले ने नूरी इलाही सुन्नी वेलफेयर मस्जिद के व्यस्थापक से आवाज कम करने का अनुरोध किया. लाउड स्पीकर की आवाज तो कम नहीं की गई, उल्टे करिश्मा को ही धमकाया जाने लगा. धमकियां मिलने के पश्चात करिश्मा पुलिस थाने पहुंची. लेकिन पुलिस का रवैया आश्चर्यचकित करने वाला था.

    24 जून को ही मानखुर्द पुलिस थाने के इंस्पेक्टर किशोर खरात ने आईपीसी की धारा १४९ के अंतर्गत संज्ञेय अपराध का नोटिस करिश्मा की माताजी वर्षा भोंसले के नाम भेज दिया. पुलिस ने नोटिस में तर्क दिया कि अजान के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का निवेदन लेकर सीधे मस्जिद जाना अनुचित था. करिश्मा की हरकत कानून और व्यवस्था को खतरा पैदा कर सकती है. करिश्मा को पुलिस के पास आना चाहिए था.

    घटना का वीडियो और पुलिस द्वारा जारी नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए. करिश्मा के पक्ष में जन समर्थन जुटने लगा है. करिश्मा भोंसले द्वारा ट्वीट किये वीडियो को देखने पर ध्यान में आता है कि आवाज कम करने का अनुरोध करने पर उसे ही धमकाया जा रहा है.

    करिश्मा के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने (बंद नहीं) के अनुरोध पर मुस्लिम समाज आक्रामक हो सकता है? अगर किसी को लाउड स्पीकर से तकलीफ हो रही हो तो क्या वो न्याय नहीं मांग सकता? लाउडस्पीकर का उपयोग न करने के लिए अनुरोध करना यह असंज्ञेय अपराध कैसे हो सकता है? पिछले दिनों इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में कहा था कि अजान इस्लाम का अनिवार्य भाग है, परन्तु उसके लिए लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है.

    करिश्मा भोंसले पर केस दर्ज करने वाली मुंबई पुलिस यह भूल जाती है कि जुलूस में ढोल बजाने पर गणेशोत्सव मंडलों को उन्होंने ही नोटिस भेजे हैं. गणेशोत्सव शुरू होने से पहले यही मुंबई पुलिस अपने ट्वीटर से ध्वनि प्रदूषण न करन का आग्रह करती है. यही नीति मस्जिद में अजान के समय लाउडस्पीकर बजाने पर कहां जाती है. यहां शिकायत करने वाले को ही नोटिस भेज दिया. ये कैसा न्याय है?

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