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मुंबई – राहुल गांधी, कसूर आपका नहीं…!!!

मुंबई. राहुल गांधी, राष्ट्र सेवा में रत विद्या मंदिर यदि आपको पाकिस्तान के मदरसों की तरह आतंकी पैदा करने वाले संस्थान लगते हैं, तो इसमें कसूर आपका नहीं है. हाईक्लास परवरिश के कारण आपको भारत का ज्ञान ही नहीं है, आप भारत की मिट्टी, संस्कारों की बेल से जुड़ ही नहीं पाए हैं. इसी कारण दृष्टिदोष से ग्रसित हैं, जो वास्तविकता को देखने ही नहीं देती.

दृष्टिदोष को दूर करने के लिए कल मध्यप्रदेश के बारे में विद्या मंदिरों द्वारा किए सेवा कार्यों की जानकारी दी थी. आज महाराष्ट्र के छह जिलों को मिलाकर बने कोकण प्रांत की जानकारी….

विद्या भारती के विद्यालयों में केवल शिक्षा और संस्कार ही नहीं, छात्रों-शिक्षकों को सामाजिक दायित्व निभाने का भान भी करवाया जाता है. कोरोना संकट के दौरान सेवा कार्य में विद्याभारती से संबंधित विद्यालय प्रबंधन ने भी अहम भूमिका निभाई.

कोकण प्रांत (मुंबई व आस पास के 6 सरकारी जिले) में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की गईं. साथ ही अध्यापकों व अभिभावकों के लिए चार ऑनलाईन प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए गए. जरूरतमंदों की सहायता के लिए राशन, मास्क, कपड़ों का वितरण किया गया. विद्याभारती के विद्यालयों के १०१ आचार्यों द्वारा २८ स्थानों पर २०,००० लोगों को मास्क वितरण किया गया. १२२ आचार्यों ने ५९६ स्थानों पर १७१८ लोगों को राशन का वितरण किया. ११,१६८ लोगों को ४ स्थानों पर भोजन का वितरण किया गया. ८ स्थानों पर १३८० लोगों को सेनेटाइजर का वितरण किया गया. चार स्थानों पर १०० पुलिसकर्मियों को विद्यालय प्रबंधन ने सहयोग किया. विद्या मंदिरों ने प्रधानमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष, सेवा संस्था को कुल ६,९२,५०० रु का आर्थिक योगदान दिया.

धाराशिव (उस्मानाबाद) में घुमंतू एवं विस्थापित मजदूरों को लगभग २५ दिनों के लिये निवास की सुविधा पाठशालाओं ने उपलब्ध कराई. भोजन उपलब्ध करवाने में विद्यार्थियों के अभिभावकों ने आगे आकर अपना सहयोग दिया.

आज के बच्चे कल का भविष्य हैं. अच्छे भविष्य के लिये योग्य पद्धति से शिक्षा देना आवश्यक होता है. विद्याभारती ने इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छात्रों का सर्वांगीण विकास करने वाली रचना तैयार की है. कोकण प्रांत में विभिन्न स्थानों पर विद्यालय संचालित होते हैं. ये पाठशालाएँ ना केवल शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत है, बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी इन पाठशालाओं ने महत्त्वपूर्ण कार्य किया है.

विद्याभारती के शिक्षा पैटर्न को नई शिक्षा नीति की रचना का प्रारूप कहा जा सकता है. 8वें वर्ष तक आनंददायी, स्लेट-पेन्सिल मुक्त, अनुभवजन्य, प्रयोगशील शिक्षा विद्यार्थी के विकास में सहायक होती है. श्रवण, संभाषण, वाचन और लेखन चार चरणों में इन शिशु वाटिकाओं में शिक्षा दी जाती है. पंच ज्ञानेंद्रिय और पंच कर्मेंद्रिय को सक्षम करना, भाषा सक्षम करने को प्रमुखता दी जाती है. छात्रों को संस्कार देने के लिए संगीत, योग, शारीरिक शिक्षा (क्रीड़ा), संस्कृत एवं नैतिक शिक्षा दी जाती है. संस्कृति ज्ञान परीक्षा के साथ ही अतुल्य भारत परिचय योजना भी चलाई जाती है.

 

 

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