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नागराजू, अंकित, ध्रुव, राहुल, निकिता और … … …?

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तेलंगाना के हैदराबाद में बुधवार को अपने स्कूटर पर पत्नी अशरीन के साथ जा रहे नागराजू की सैयद मोबिन अहमद ने अपने 3-4 सहयोगियों के साथ मिलकर लोहे के रॉड से पीट पीटकर हत्या कर दी, नागराजू ने अशरीन के घरवालों से स्वीकृति ना मिलने के उपरांत जनवरी में आर्य समाज मंदिर में अशरीन से विवाह किया था. पीड़िता के अनुसार हमलावरों ने नागराजू को तब तक पीटा जब तक उसकी मौत ना हो गई.

इस दौरान पीड़िता अपने भाई के सामने पति को छोड़ देने के लिए गिड़गिड़ाती रही, यहां तक कि पति को बचाने के लिए उसने हमलावरों के मर्जी से दूसरा निकाह करने की भी बात कही. लेकिन जिहादियों ने नागराजू को तब तक पीटना जारी रखा, जब तक सड़क पर उसके सिर के चिथड़े ना फैल गए. जानकारी है कि फल बेचने वाला मोबिन एक महीने से नागराजू को मारने के प्रयास में था.

18 वर्षीय राहुल राजपूत की मोहम्मद अफरोज, मोहम्मद राज एवं उसके तीन साथियों द्वारा बर्बरता से पीट- पीटकर उसकी हत्या कर दी जाती है, यह घटना अक्टूबर 2020 की है. राहुल का दोष बस इतना था कि जहांगीरपुरी की एक मुस्लिम लड़की के साथ उसकी दोस्ती थी और दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे. एक हिन्दू लड़के के साथ बात करना लड़की के भाइयों को नागवार गुजरा और उन्होंने पीट पीटकर उसकी हत्या कर दी. राहुल मूलचंद क्षेत्र के आदर्श नगर का रहने वाला था.

जहां राहुल की हत्या की गई, वहां से थोड़ी दूर दिल्ली के ही ख्याल क्षेत्र में वर्ष 2018 में पेशे से फोटोग्राफर अंकित सक्सेना को उनकी प्रेमिका शहजादी के घरवालों ने भरी सड़क पर गला रेत कर हत्या कर दी. कारण अंकित का शहजादी के साथ रिश्ते में होना था, अंकित अपने माता पिता का इकलौता बेटा था.

एक वर्ष बाद दिल्ली के ध्रुव त्यागी की बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर जहांगीर नाम के युवक और उसके परिवार वालों ने चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी. दिल्ली से ही लगे फरीदाबाद में वर्ष 2020 में निकिता तोमर को रेहान और उसके साथी ने दिनदहाड़े इसलिए गोली मार दी क्योंकि निकिता जबरन धर्म परिवर्तन से मना कर रही थी, निकिता ऐसी मानसिकता का शिकार हुई कोई अकेली हिन्दू युवती नहीं, बल्कि ऐसे कई उदाहरण है जहां जबरन धर्मांतरण करा पाने में विफल रहने के उपरांत हिन्दू युवती की हत्या कर दी गई हो.

खेतराम भीम (राजस्थान), जयदीप गरवा (गुजरात), संजय कुमार (फरीदाबाद), रजनीश शर्मा (जम्मू), शैलेन्द्र प्रसाद (बंगाल), मुकेश कुमार-नूर जहां (बिहार), ये सूची बहुत लंबी है, इन सब का दोष केवल इतना ही कि इन्होंने या तो संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के अनुसार मुस्लिम लड़कियों के साथ विवाह किया या फिर जबरन धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से विवाह करने से मना कर दिया, इन सब को बेरहमी से मारा गया.

बीच सड़क पर हुई इस हृदयविदारक घटना (नागराजू की हत्या) की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, हालांकि उससे भी ज्यादा विचलित करने वाला प्रश्न यह है कि आखिर हम किस समाज, किस देश का हिस्सा है. जहां एक हिन्दू व्यक्ति की उसकी पत्नी के सामने इतनी नृशंस रूप से केवल इसलिए हत्या कर दी जाती है क्योंकि उसने और उसकी मुस्लिम प्रेमिका ने संविधान प्रदत अधिकारों के अनुसार एक कथित धर्मनिरपेक्ष देश मे एक दूसरे को अपने जीवनसाथी के रूप में चुना था.

विडंबना यह भी है कि इस देश मे एक वर्ग विशेष जो अपने एजेंडे को सूट करती कुछेक घटनाओं का उल्लेख कर, समाज में पनप रहे हिन्दू घृणा की बात करने वालों को मनुवादी बता कर, छाती पीट पीटकर जय मीम जय भीम और कथित धर्मनिरपेक्षता का स्वर बुलंद करता हो वो ये नहीं बताएगा कि नागराजू को इतनी बर्बरता से केवल इसलिए मारा गया क्योंकि नागराजू एक हिन्दू था, उनके अनुसार तो ऐसी हत्याएं कानून व्यवस्था अथवा आपसी रंजिश की श्रेणी में ही रखी जानी चाहिए. इसका किसी धर्म विशेष के प्रति घृणा से क्या लेना देना.

आज देश भर में चर्चा का विषय बना यह प्रकरण हफ्ते भर में ही महत्वहीन हो जाएगा और एक 25 वर्षीय युवक जिसके सामने उसका पूरा जीवन शेष था, आंकड़े गिनाने की कड़ी में केवल एक नाम के रूप में रह जाएगा. इस तथ्य से विपरीत मत रखने वालों को सुल्तानपुरी के हीरा के विषय में जानना चाहिए, जिसे इरफान और उसके भाई शान ने केवल इसलिए मार दिया क्योंकि उसने इरफान द्वारा अपनी बहन से किए गए बलात्कार की प्राथमिकी दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई थी.

इन घटनाओं का सार यही है कि जिस देश को आप धर्मनिरपेक्ष मानकर स्वयं को इसका स्वतंत्र नागरिक मान कर जी रहे हैं, वहां चरमपंथियों का एक वर्ग विशेष आपको घृणा योग्य समझता है. जहां ना केवल मुस्लिम युवती के साथ संविधान प्रदत अधिकारों के अनुसार विवाह अपितु छेड़छाड़, जबरन धर्मपरिवर्तन अथवा बलात्कार जैसे जघन्य अपराध का विरोध भी आपको नृशंस हत्या के लिए  “वाजिब-ए-कत्ल” बना देता है.

जहां तक प्रश्न जय मीम जय भीम के नारे लगाने वाले समूह का है तो उनके लिए तो बस यही की हीरा से लेकर नागराजू तक दोनों ही दलित समुदाय से संबंध रखते थे.

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