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राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के विकास में मील का पत्थर बनेगी

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काशी (विसंकें). काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंतर विश्वविद्यालयीय अध्यापक शिक्षा केन्द्र की ओर से “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : प्राचीन ज्ञान परम्परा एवं आधुनिक शिक्षा” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार आयोजित किया गया. वेबिनार में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 राष्ट्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी. इसमें बहुविषयी शिक्षा तथा समग्र विकास की बात समाहित है. 185 वर्षों के बाद भारतीयता पर आधारित शिक्षा नीति बनी है, जो आज के संदर्भ में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को बताएगी.

वेबिनार में मुख्य अतिथि कलराज मिश्र ने कहा कि बहुविषयी शिक्षा, संपूर्ण विकास, जड़ से जग तक, मानव से मानवता तक की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में समावेषित है. नई शिक्षा नीति में आधुनिक शिक्षा से प्राचीन भारतीय ज्ञान को जोड़ने से आम जन संस्कारित होगा. शिक्षा के साथ संस्कार का होना आवश्यक है.

देश में अनेक भाषा और बोलियों के साथ शास्त्रीय नृत्य, संगीत, लोककला की विकसित परम्परा, मिट्टी के पात्र, मूर्तियां और कांसे की उम्दा वस्तु कला, असाधारण व्यंजन, हर एक प्रकार के उत्तम टेक्सटाइल जीवन के सभी क्षेत्रों में हमारी महान विविधता को प्रदर्शित करता है. विश्व धरोहर के लिए इन समृद्ध विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए पोषित और संरक्षित किया जाना आवश्यक है, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के जरिए इन्हें बढ़ाना और इन्हें ने तरीके से उपयोग में भी लाना जरूरी है.

बाणभट्ट के कादम्बरी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कादम्बरी में वर्णित 64 लोककलाओं पर आधारित अंतरविषयी, स्वावलंबन, एवं हमारे प्राचीन ज्ञान भारत को सार्वभौमिक एवं शाश्वत ज्ञान के रूप में विकसित करेंगे और भारत विश्व को दिशा देगा. शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च संस्थानों के माध्यम से शिक्षा नीति को पूर्णतः प्रतिबद्धता के साथ प्रतिपादित करना होगा. अंतर विश्वविद्यालयीय अध्यापक शिक्षा केन्द्र काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक-शिक्षा हेतु एक सर्वोच्च संस्था के रूप में स्थापित की गयी है, उसका यह दायित्व बनता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उच्च शिक्षा में शिक्षक-शिक्षण की अनुशंसाओं को पूर्णतया प्रतिपादित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करे.

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