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भक्तों से 10₹ से अधिक दान स्वीकार नहीं करते, श्रीराम मंदिर के लिए 2.5 लाख समर्पित किए

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मालवा,

ऐसे संत जो स्वयं किसी से 10₹ से अधिक का दान स्वीकार नहीं करते, पर जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में समर्पण देने बारी आई तो स्वयं 2,50,000₹ की निधि समर्पित कर दी. निमाड़ नर्मदा मइया के किनारे रहने वाले पूज्य संत सियाराम बाबा ने 10 -10 रुपये भेंट के रूप में एकत्रित राशि का श्रीराम मंदिर के लिए समर्पण कर दिया.

ऐसा बताया जाता है कि संत सियाराम बाबा ने तय कर रखा है कि वह अपने किसी भी भक्त या उनके यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से 10 रु से अधिक की भेंट ग्रहण नहीं करेंगे. और उनके इस नियम का दृढ़ता के साथ पालन होता है.

सन्त ही सनातन की रीढ़ है, सन्तों ने ही हजारों वर्षों से सारे थपेड़े खाकर भी हमें सनातन सुरक्षित लाकर सौंपा है. सियाराम जी जैसे संत ही वह भगीरथ हैं जो इतिहास के सारे घाव सहकर भी सनातन धर्म को सुरक्षित यहां तक लेकर आए.

वामपंथियों और फूहड़ फिल्मकारों ने सनातन धर्म व साधु संतों की जो छवि निर्माण की है, उसके बहकावे में आकर अपने सनातन सन्तों का कभी अपमान नहीं करना. ये सन्त ही भारत और सनातन की आत्मा हैं. पूज्य सियाराम बाबा जैसे सन्त हर जगह हैं, उनका सम्मान करें. ये धरोहर हैं, हमारे सनातन की….

निधि समर्पण के लिए आतुर एक वृद्ध मां

अवध,

26 फरवरी, 2021 प्रातः लगभग 8:00 बजे मेरे पास लड़खड़ाती आवाज में एक वृद्ध मां का फोन आया – “भैया नमस्ते! मंदिर वाले बोल रहे हैं. शक्ति बस्ती में हम छूट गए हैं, आप सब जब इधर आए होंगे तो हम बाहर थे, आप दोबारा आ जाइए. हम भी भगवान श्रीराम जी के मन्दिर के लिए कुछ देना चाहते हैं”

सायं काल में श्रीराम मंदिर निधि समर्पण समिति की टोली के साथ हम लोग जब उस मां के घर पहुंचे तो देखकर आश्चर्य हुआ. सामने लगभग 80 वर्षीय वृद्ध मां पुष्पावती शाहू ने विगत कई दिनों से 50 -50 ₹ इकट्ठा करके श्रीराम मंदिर के लिए कुछ समर्पण निधि संकलित कर रखी थी. उन्होंने सबको बिठाकर बड़ी प्रसन्नता के साथ ₹5100/ का समर्पण किया. हम सब उनकी श्रद्धा, प्रसन्नता, समर्पण देखकर अत्यधिक भावुक थे, वास्तव में समर्पण मन की श्रद्धा से  ही होता है केवल धन से नहीं.

अंजनी कुमार

शुक्लागंज, उन्नाव

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